पांडव यशेन्दु चन्द्रिका – नवम मयूख
नवम मयूख उद्योगपर्व (उत्तरार्द्ध) युधिष्ठिर उवाच दोहा सूत गये बहु दिन भये, पीछे नाहि सँदेश। तृतीय बसीठी कृष्ण तुम, गजपुर करहु प्रवेश।।१।। वैशंपायन कहते हैं कि हे जन्मेजय! युधिष्ठिर श्री कृष्ण से पूछते हैं कि संजय को गये इतने दिन हो गए परन्तु उस ओर से कोई समाचार नहीं आया, इसलिए हे कृष्ण! अब आप सुलह का तीसरा प्रस्ताव ले कर स्वयं हस्तिनापुर पधारो। मात पिता बृध अंध मम, सोइ मोहि शोक असाध। तीजे उ माने नाहिं तो, का मेरो अपराध।।२।। मेरे माता पिता (गांधारी और धृतराष्ट्र) दोनों वृद्ध और अंधे हैं, इसका मुझे असाध्य शोक है (रंज है) पर […]
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