जोगमाया रो सपाखरु गीत – कवि बेणूजी

।।गीत-सपाखरु।।
काळी कामाखा कृष्णा कळा कमळ्ळा कराळी क्रोधा,
वामंगा विमल्ला बाळा वसंती विराट।
हरसिध्ध हिंगळाज हेमपुत्री हेला हरा,
मातंगी मंगळा माता मंडे मही माट।।1

कुषमंडा काळरात्र कातयणी भद्रकाळि,
साकुंभरी शैलपुत्री सोख चडा सीत।
चंद्रघंटा चंद्रेसुरी चाँवंड चाळक्कनेची,
जोगणी जगाडों ज्वाळामुखी जंगजीत।।2[…]

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आवाहण गीत सपाखरु – कवि खोडीदान जी

।।गीत सपाखरु।।
बाइ आविए सँकटाँ पडये, तारवाँ चारणाँ बेडो।
नाम रा भामणाँ लियाँ, वधारणी नूर।।
चारणी पधारो मैया, सुधारणी कविसराँ।
हिँगऴाज आदि माता, हाजराहजूर।।1।।

जाऴँधरी गातराड, काळिका भवानी जपाँ।
रवेची अंबिका देवी, कथाँ जगराय।।
वडाँवडी आशापुरा, डुँगरेची थऴाँ वाळी।
माढराणी तुझ नमाँ, भुजाळी मोमाय।।2।।[…]

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मंदोदरी-सूर्पणखा संवाद – बांकजी बीठू

मंदोदरी उवाचः……
ज्वाऴा लगाई कपेश लंक मंदोदरी बोली जठै,
लंका तणो कोट भाई-बैन लेख।
कठै सिया हेर आई नाक कांन लेर आई,
वऴै साई देर आई लंका री विसेख।।1।।

सूर्पणखा उवाचः…….
भोजाई विचार बोल म्हनै ई कहै छै भूंडी,
जांणै नहीं बात उंडी म्हांरै सांमी जोय।
डुलंती द्वै वाट वीच प्रिथी में फूटगी डूंडी,
सांमियां री मूंडी जिका नाक काटै सोय।।2।।[…]

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अवतरण अर प्रवाड़ां रो गीत

।।गीत।।
प्रथम देश जैसाण बीकाण प्रगटी पछैं,
बरजियो भांण बेड़ो उबारियो।
अबै परब्रह्म वाऴी प्रकृति अद्रजा,
धजाऴी मद्र अवतार धारियो।।1।।

बंस रतनूं धनो छात बीसोतरां,
धनो धिन मातरी मात धापू।
बाप सागर धनो सकति मा बापरो,
बाप-मह धिनो शिवदान बापू।।2।।[…]

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डिंगल फेशन – कवि भंवरदान गढवी “मधुकर”

इण पढ्यो लिख्यो री पंगत में, जुनोड़ा आखर कुण जांणे।
नखरा कर नये जमांने रा, तिरछी हद रागां लो तांणे।।
जा जोर तमासा कर जितरा, जोवे जनता मन जोकरिया।
वाजे आधुनिक वायरियो, डिंगल फेशन कर डोकरिया।।१

ऊचे शब्दां रा अरथ करे, वो कूंत करणिया रैया कठे।
जुनी भाषा ने जांणणिया, अब देख किता सच कया अठे।।
तड़का बाजे लै ताड़ी रा, हाका कर लड़का होकरिया।
वाजे आधुनिक वायरियो, डिंगल फेशन कर डोकरिया।।२[…]

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मन अनुरागी माव रो

मन अनुरागी माव रो, रागी औ तन राम।
लागी लगनी लाल री, बजै बीण अठजाम।।१

गावूं जस गोपाल रो, रोज सुणावूं राग।
लगन लगावूं लाल सूं, पावूं प्रेम अथाग।।२

आव!आव! री रट लियां , बैठौ आंगण-द्वार।
बोलावूं बीणा बजा, झणण करे झणकार।।३

सांई!थारी साँवरा, गाई जिण गुण गाथ।
उण पाई संपत अचल, गात गात वध जात।।४[…]

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भवानी नमो – हिंगऴाजदानजी कविया सेवापुरा

।।छंद भुजंङ्ग प्रयात।।

भवानी नमो स्वच्छ श्रृंगार अंगा !
भवानी नमो सुन्दरी शिम्भु संगा !
भवानी नमो कासरिद्रारी हन्ता !
भवानी नमो आसि आभा अनंता !!1!!

भवानी नमो ब्रह्मजा बुध्दि धामा !
भवानी नमो शिम्भु संहारि स्यामा !
भवानी नमो भूत कैलास बासी !
भवानी नमो ओज अम्भोज आसी !!2!![…]

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श्री किरपारामजी खिड़िया री विलक्षण सूझ बूझ – राजेंद्रसिंह कविया संतोषपुरा सीकर

विलक्षण बुध्दिलब्धी अर महान मेधा रा धणी किरपारामजी खिड़िया रीति-नीति अर मर्यादा रा मोटा मानवी हा। किरपारामजी रो आदू गांव जूसरी नागौर जिला री मकराणा तहसील कनै आयो थको पण कर्मक्षेत्र वर्तमान में राजस्थान रो सीकर जिलो, तात्कालीन जयपुर रियासतरो बड़ो ठिकाणों हो। उण समय जोधपुर मानसिंह जी रो राज हो अर जयपुर में जगतसिंह जी अर प्रतापसिंह जी शासक रैया। पूरा राजस्थान में मराठां, पिंडारियां री लूटाखोस अर धमचक मंडियोड़ी रैवती। उण समै सीकर में रावराजा लिछमणसिंह जी पाट बिराजिया हा अर किरपारामजी बांरा मानीता दरबारी होवता हा। उण दिनां रियासतां रा छोटा मोटा ठिकाणेदारां रे सागै झंझट झमैला चालता ई रैवता। आं झगड़ां री कड़ी में लगाण री बातां ने लेयर जयपुर रियासत री कोपदृष्टि सीकर रा ठिकाणां पर हुयगी।[…]

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इंद्र बाईसा का शिखरणी छंद – हिंगऴाजदानजी कविया

।।छंद-शिखरणी।।
ओऊँ तत्सत इच्छा बिरचत सुइच्छा जग बिखै।
लखै दृष्टि सृष्टि करम परमेष्टि पुनि लिखै।।
तुहि सर्जे पालै हनि संभाऴै उतपति।
अई इन्दू अम्बा जयति जगदम्बा भगवति।।1।।

क्रतध्वंसी विष्णु कमलभव जिष्णु स्तुति करै।
हिमांसू उष्णांसू पदम-पद पांसू सिरधरै।।
हगामां हमेशां बजत त्रिदवेसां नववती।
अई इंन्दू अम्बा जयति जगदम्बा भगवती।।2।।

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देस-देस रा दूहा-मोहन सिंह रतनू

ऊंचो तो आडावल़ो, नीचा खेत निवांण।
कोयलियां गहकां करै, अइयो धर गोढांण।।
उदियापुर लंजो सहर, मांणस घण मोलाह।
दे झोला पाणी भरे, रंग रे पीछोलाह।।
गिर ऊंचा ऊंचा गढा, ऊंचा जस अप्रमाण।
मांझी धर मेवाड. रा, नर खटरा निरखांण।।
जल ऊंडा थल ऊजला, नारी नवले वेस।
पुरख पटाधर नीपजै, अइयो मुरधर देस।।[…]

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