यक़ीनन ये गिले शिकवे – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

यक़ीनन ये गिले शिकवे अग़र बाहम हुये होते।
दिलों के फासले यारों कभी के कम हुये होते।।

कभी इक दूसरे को हमने पहचाना नहीं वरना।
न तुम शिकवा व लब होते ना हम बरहम हुये होते।।

कभी मिलकर के हमने काश खुशियाँ बांट ली होतीं।
कभी इक दूसरे के हम शरीक़ेग़म हुये होते।।[…]

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शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।[…]

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गज़लें – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

ये जानी पहचानी ग़ज़लें।
ख़ालिस हिन्दुस्तानी ग़ज़लें।।
कान्हा की मुरली में खोयी।
मीरा सी दीवानी ग़ज़लें।।
नानक सूर कबीरा गाये।
भाव भरी रूहानी ग़ज़लें।।[…]

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बेटियाँ – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

बाबुल की बेशक़ीमती थाती है बेटियाँ।
बेटे अग़र चिराग हैं बाती हैं बेटियाँ।।

अंजाम हर फ़रज को हमेशा दिया मग़र।
हरग़िज नहीं हकूक जताती हैं बेटियाँ।।

बेटों से एक घर भी संभलता नहीं मग़र।
दो मुख़्तलिफ़ घरों को मिलाती हैं बेटियाँ।।

बाबुल की देहरी से विदाई के बाद भी।
नैहर के नेगचार निभाती हैं बेटियाँ।।[…]

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बड़े मियाँ – राजेश विद्रोही(राजूदान जी खिडिया)

सबकी सुनकर भी अपनी पर अड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
लोग शहर के कैसे चिकने घड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
पहले यूं ख़ुदगर्ज़ नहीं था कुछ अपनापा बाक़ी था।
आख़िर हम भी इसी शहर में बड़े हुये हैं बड़े मियाँ।
ये मत सोचो इस मरभुख्खे गाँव में क्या तो रक्खा है।
जाने कितने बड़े ख़जाने गड़े हुये हैं बड़े मियाँ।[…]

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बदलते हैं – ग़ज़ल – राजेश विद्रोही (राजूदान जी खिडिया)

बदलने को बहुत कुछ आज भी अक्सर बदलते हैं।
न शीशे हम बदलते हैं न वो पत्थर बदलते हैं।।

ज़मीं फिरती है बरसों और फ़लक बरसों बरसता है।
कसम से तब कहीं जाकर ये पसमंजर बदलते हैं।।

हमें ख़ौफ़े ख़ुदा है और तुम्हें ज़ालिम जहाँ का डर।
चलो कुछ देर की ख़ातिर हम अपने डर बदलते हैं।।

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बच्चे – ग़ज़ल – राजेश विद्रोही

हमारे मुल्क में मासूमियत खोते हुये बच्चे .
लङकपन में बुजुर्गों की तरह होते हुये बच्चे ..

कहीं से भी किसी उम्मीद के वारिस नहीं लगते .
घरौंदो की बगल में बेबसी बोते हुये बच्चे ..

उदय होते हुये भारत की शाईनिंग पे धब्बा हैं.
अभावों की सङक पर गिट्टियाँ ढोते हुये बच्चे .[…]

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सम्बन्धों की फुहारें-भाटी नीम्बा और रतनू भीमा – डा. आईदान सिंह जी भाटी

मारवाड़ के चाणक्य कहे जाने वाले भाटी गोयन्ददास के दादा की कथा है यह। उनका नाम नीम्बा था। यह नीम्बा उस समय उचियारड़े नामक ग्राम में रहता था, जहां सोलंकी राजपूतों का आधिक्य था। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि यह नीम्बा भाटी ‘जैसा’ का पौत्र था। इस जैसा को राव जोधा अपने संकट काल में इस वचन के साथ अपने साथ जैसलमेर रियासत से लाये थे कि वे राजकीय आय का चौथा हिस्सा उसे देंगे। यह ‘जैसा’ जैसलमेर के रावल केहर का पौत्र और राजकुमार कलिकर्ण का पुत्र था व सुप्रसिद्ध हड़बू सांखला का दोहिता था। पर मंडोर हाथ […]

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गीत सूंधा माता रो – दल़पत बारठ

स्वंय पिडं ब्रहमंड भुज डंड ईकवु सस,
दयतां डंड प्रचण्ड दाता।
सकल़ विहमंड चंड कुण कर सकै,
मंड ज्यां मंडी चामण्ड माता।।
आठ सिध थापणी थाल़ आसाएवां,
आपणी माल नवनिध अनूंधा।
रिधव रूक दे मूंघा न व्है रायहर,
सकत सूंधा तणी राय सूंधा।।[…]

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ગરબો-ખોડિયાર રમવા ને આવે-કવિ આપા ભાઈ કાળા ભાઈ બાળદા

કોઇ તાતણીયા ધરાથી તેડાવો મારી બેનુરે….
ખોડીયાર રમવા આવે…
કોઈ માટેલ જઇને મનાવો મારી બેનુ રે..
ખોડીયાર રમવા આવે…ટેક

હા…આસોના ઉજળા આવ્યા છે નોરતા મનડે કોડ નથી માતો..
માં ના તેહવારનો મહિમા છે મોટો સૃષ્ટીમાં નથી સમાતો..
હવે સૃષ્ટીની શોભા વધારો મારી બેનુ રે..
ખોડીયાર રમાવા આવે…[…]

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