विश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक गुरू जांभोजी एवं उनके शिष्य अलूनाथ जी कविया
🌺🌺कविराज अलूजी चारण🌺🌺
गुरु जांभोजी के शिष्य तथा हजुरी चारण कवि अलूजी चारण जिनको चारणी साहित्य में सिद्ध अलूनाथ कविया कहा गया है।
अलूजी चारण के गुरु जांभोजी की स्तुति में कहे गये कवित, जिसमें जाम्भोजी को भगवान विष्णु व कृष्ण के साक्षात अवतार मानकर अभ्यर्थना की है।
।।छप्पय।।
जिण वासिग नाथियो, जिण कंसासुर मारै।
जिण गोकळ राखियो, अनड़ आंगळी उधारै।।
जिणि पूतना प्रहारि, लीया थण खीर उपाड़ै।
कागासर छेदियो, चंदगिरि नांवै चाड़ै।।[…]