गणेशपुरीजी राेहड़िया पातावत शाखा रा चारण हा। गांव चारणावास। मारवाड़ मैं बळूंदा ठिकाना रा पोलपात। पैहलौ नाम गुलाबदान। पछै राम स्नेही वे गया। सूरजमलजी मीसण रा शिष्य। पछै नांम गोस्वामी गणेशपुरी राख्यो।
महाराणा सज्जनसिंहजी मेवाड़ विद्वान अर विद्वानों रा पारखू। वांरै दरबार में केतांन विद्वान, जिण में गणेश पुरी जी एक।
दयानंद, गणेश पुरी स्वामी, उभय सुजान,
लई संगत इनकी, भयौ सज्जन, सज्जन रांण।।
बख्तावर राव पुनी, ग्याता रस सिगार,
इनकी कविता माधुर्य, लई सकै को पार।।
मोडसिंह महियारियाै अरु आ सिया जवान,
इन आदिक मेवाड़ मनो, हुति कवियन की खान।।
राज दरबार लगा हुआ है। महाराणा सिंहासन पर बिराजमान है। कविसर अपने अपने आसन पर बिराजमान हैं। बहुत ही गंभीर समस्या के समाधान हेतु विचार हाे रहा है। समस्या है, महाभारत के पात्रों में श्रेष्ठ कौन ?[…]
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