આજ તરછોડ માં જોગમાયા – કવિવર દુલા ભાયા “કાગ”

છંદ – ઝૂલણા
ભાન બેભાનમાં માત ! તુજને રટયા, વિસારી બાપુનું નામ દીધું,
ચારણો જન્મથી પક્ષપાતી બની, શરણ જનનીતણું એક લીધું ;
તેં લડાવી ઘણાં લાડ મોટાં કર્યા, પ્રથમ સત્કાવ્યનાં દૂધ પાયાં ;
ખોળલે ખેલવ્યાં બાળને માવડી, આજ તરછોડ માં જોગમાયા ! ૧[…]

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सखी! अमीणो साहिबो

मित्रों जब भी कविता की बात होती है तो एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि कालजयी कविता वह होती है जो आज भी हमैं नित्य नवीन लगे।
बरसों पहले जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह के दरबारी कविराजा बांकीदास जी आसिया ने “सूर छत्तीसी” लिखी थी। वीर रस से लबरेज इन दोहों में कवि ने एक अमर पंक्ति का प्रयोग कर सात आठ दोहै रचे थे। पंक्ति थी “सखी! अमीणो साहिबो”
यह पंक्ति इतनी शानदार है कि यह आज के कवियों को भी प्रेरणा देती है। इसी पंक्ति से प्रेरणा लेकर आज के चारण कवियों ने कुछ दोहों के सृजन का प्रयास किया है। तो प्रस्तुत है बांकीदासजी आसिया के दोहों के साथ साथ कवि नरपत आसिया “वैतालिक” और गिरधरदान जी रतनू “दासोडी” द्वारा लिखे दोहै।[…]

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दीकरा – गज़ल

तूं तो ग्यो परदेस दीकरा।
सूनो करग्यो नेस दीकरा।।
कदै आय पाती विलमाती।
अब बदल़्यो परिवेस दीकरा।।
गया ठामडा भाज दीकरा!
रांधूं कीकर आज दीकरा!
छाछ मांगनै करूं राबड़ी
नहीं घरां पण नाज दीकरा!

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જીવનમાં ફેરફાર – કવિ શ્રી દુલા ભાયા કાગ

એના જીવનમાં ફેરફાર જી.
જીવનમાં ફેરફાર, બેઉ છે પાણીમાં વસનાર-એના.ટેક
મીન દેડક માજણ્યાં બેય, જળ થકી જીવનાર જી (2),
જળમાં જન્મયાં, જીવ્યાં જળમાં(2), જળ સંગે વેવાર-એના.1
નીર થકી એ નોખુ પડતાં માછલું મરનારજી (2),
જળ સુકાતાં દેડકા જોઈ લ્યો (2) કાદવમાં રમનાર-એના.2 […]

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🌺वाह! जवानां🌺 – कारगिल माथै कवि वीरेन्द्र लखावत कृत एक गजल

कढ करगिल परवांन जवानां वाह जवानां।
भारत री थै शान जवानां वाह जवानां ।
जग ने दियौ जताय भीम भारत री फौजां,
जस चढ्यौ असमान जवानां वाह जवानां।
भुल्यौ भगनी भ्रात बंध्यो हित देश बचावण,
धी रौ कियौ न ध्यान जवानां वाह जवानां।[…]

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चंदू मा रा छंद – धूड़जी मोतीसर जुढिया

।।छंद – सारसी।।
मनधार मत्ती सज सगत्ती, आप रत्थी आविया।
पोक्रण पत्ती बड कुमत्ती, छोह छत्ती छाविया।
तन झाल़ तत्ती सूर सत्ती, रूक हत्थी राड़वै।
बढ चरण वंदू शील संधू, मात चंदू माड़वै।।1[…]

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चारणों के गाँव – नोख / बासणी (कवियान)

नोख (कवियान) चारणो की जागीरो में से एक ऐसी जागीर है जो एक बहुत बड़े राजपूती सँघर्ष के फलस्वरुप अस्तित्व मे आयी। नोख एक राजपूत और एक चारण कवि की घनिष्ठ मित्रता का परिणाम है। आज राजस्थान राज्य के पाली जिले मे राजपूतों की उदावत खाँप का प्रभुत्व है। ये महान वीर यशस्वी राव उदाजी के वँशज है। राव उदाजी जोधपुर के सँस्थापक महावीर जोधाजी के पौत्र थे। राव उदाजी और खेतसी जी कविया की बहुत अच्छी मित्रता थी, ये मित्रता चँदरवरदाई और सम्राट पृथ्वीराज चौहान की तरह थी। राव उदाजी और खेतसीजी दोनो उस वक्त जवान थे। वे हर वक्त […]

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नागदमण – सांयाजी झूला

सांयाजी झूला महान दानी, परोपकारी भक्त कवि थे। वे कुवाव गांव गुजरात के निवासी थे। इनका लिखा हुआ “नागदमण” भक्ति रस का प्रमुख ग्रन्थ है|

भक्त कवि श्री सांयाजी झूला कृत “नागदमण”
।।दोहा-मंगलाचरण।।
विधिजा शारदा विनवुं, सादर करो पसाय।
पवाडो पनंगा सिरे, जदुपति किनो जाय।।…१
प्रभु घणाचा पाडिया, दैत्य वडा चा दंत।
के पालणे पोढिया, के पयपान करंत।।…२
किणे न दिठो कानवो, सुण्यो न लीला संघ।
आप बंधाणो उखळे, बीजा छोडण बंध।।…३
अवनी भार उतारवा, जायो एण जगत।
नाथ विहाणे नितनवे, नवे विहाणे नित।।…४
।।छंद – भुजंगप्रयात।।
विहाणे नवे नाथ जागो वहेला।
हुवा दोहिवा धेन गोवाळ हेला।।
जगाडे जशोदा जदुनाथ जागो।
मही माट घुमे नवे निध्धि मांगो।।…१[…]

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