मां मोंगल मछराळ रा दोहा – मीठा मीर डभाल

विनय सुणन्तां वाहरू, तैयार हुय तत्काळ।।
छिन्न में बंध छुड़ावणी, मां मोंगल मछराळ।।१।।
भुज कर लम्बा भगवती, टेम विघन री टाळ।।
महर करण तुंही मुदै, मां मोंगल मछराळ।।२।।
देवी तुझ दरबार में नमै कैक नरपाळ।।
आशा पूरण अंबिका, मां मोंगल मछराळ।।३।।

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माताजी का छंद – कवि जय सिंह जी सिंढायच (मंदा)

!!छन्द: अर्ध-नाराच!!
नमामी मेह नन्दिनी! नमामी विश्व वन्दिनी!!
भुजा विशाल धारणी! दयाल दास तारणी!!1!!
क्रपानिधे क्रपालकम्! दयाल बाल पालकम्!!
विशाल बिन्द भालकम्! नयन्न नैह न्हालकम्!!2!!
न जाने भेद नारदम्! सदा जपन्त शारदम्!!
नमामि भक्त वच्छलम्! अनाद विर्द उज्ज्वलम्!!3!!

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सरस्वती आह्वाहन – हिम्मत कविया नोख

।।छंद रोमकन्द।।

शशि पूनम री धवली किरणों जिम सेत सजी उजला तु गिरा।
कर में कछपी मुख वेद उचारण की छबि माँ छन दास दिरा।।
जिण सूं जयदायिनि बीस भुजायिनि अंतस रो तम मो हरदे।
वरदे वरदायिनि बीन बजायिनि शारद आखर सुंदर दे।।1।।

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महाराणा प्रताप रौ जस – कवि स्व. भँवरदान जी वीठू “मधुकर” (झणकली)

उतर दियौ उदीयाण दिन पलट्यौ पल़टी दूणी।
पातल़ थंभ प्रमाण़ शैल गुफावा संचरीयौ।

मिल़ीयौ मैध मला़र मुगला री लशकर माय।
कलपै राज कुमार मैहला़ चालौ मावड़ी।

महल रजै महाराण कन्दरावा डैरा किया।
पौढण सैज पाखांण हिन्दुवां सुरज हालीया।

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मोगल पचीशी – जोगीदान गढवी (चडीया)

||छंद – भुजंगप्रयात||
नमौ चारणी तारणी पाय तोळे,
कहो मां खमां तो कळोयांय कोळे
हजी हाजरा तुं हजूरीय हामी,
नमो मौंगलंम्मा नमामी नमामी..||02||

हरे चित्त चिंता विघन्नो विनासे,
अखिलेशरी आवियो ऐज आसे
डणंकी रीपु ने दीयो मात डामी,
नमो मौंगलंम्मा नमामी नमामी..||03||[…]

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भ्रमरावली – वंश भास्कर

करकि करकि कोप तरकि तरकि तोप,
लरकि लरकि लोप करन लगी।
करखि करखि कत्ति परखि परखि पत्ति,
हरखि हरखि सत्ति हरन लगी।
समर लखन आय अमर गगन छाय,
भ्रमर सुमन भाय निकर जुरे।
सरजि सरजि सोक लरजि लरजि लोक,
बरजि बरजि ओक दिगन दुरे।।1।। […]

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रतनू भारमल री वात – ठा. नाहर सिंह जसोल संकलित पुस्तक “चारणौं री बातां” सूं

मारवाड़ में अेक परगनो, मालांणी। पैहलां मालांणी नांम सूं जगचावो ओ परगनो आज बाड़मेर परगना रै नांम सूं ओळखीजै। मालांणी री इण धरती ऊपर केतांन सूरमा, संत अनैं सतियां अवतरित होया। मलीनाथ, धारूजी, रूपां-दे अर ईसरदासजी जैहड़ा म्होटा संत, जैतमालजी अर वीरमदेजी जैहड़ा लांठा जोधार, अर दांनी, रांणी भटियांणीजी जेहड़ी चमत्कारिक सती पण इणीज धरती ऊपर होया।
राव सीहोज संवत 1212 में कनोज सूं मारवाड़ कांनी आय सबसूं पैहलां पाली ढ़ाबी। आस्थांन खेड़ रयो अर आठमी पीढ़ी में राव सळखोजी रा म्होबी दीकरा मलीनाथजी पाट बैठा। […]

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महाकवि हिंगलाज दान कविया

हिंगलाज दान कविया सेवापुरा के रामप्रताप जी कविया के दो पुत्रो में ज्येष्ठ थे। उनका जन्म माघ शुक्ला १३ शनिवार सम्वत १९२४ को सेवापुरा में हुआ था। तब उनके दादा नाहर जी कविया विद्यमान थे और उन्ही से इन्होने अपनी आरंभिक शिक्षा पाई। जब वे साढ़े तीन वर्ष के थे तो पिता बारहठ रामप्रताप कविया ने उन्हें बांडी नदी के बहते हुए जल में खड़ा करके जिव्हा पर सरस्वती मन्त्र लिख दिया था। बांडी सेवापुरा के पास हो कर ही बहती है और इस में बरसात में ही पानी आता है। बहता पानी निर्मल गंगा की तरह ही पावन माना जाता है। बांडी नदी के प्रवाह के प्रति भावना व आस्था के साथ पिता ने जो मन्त्र दिया, उसने अपना चमत्कारिक प्रभाव दिखाया। पांच वर्ष की अल्पायु में ही हिंगलाज दान की कवित्व-शक्ति प्रस्फुटित हो गयी और अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति तथा वंशानुगत संस्कारों के फलस्वरूप वे डिंगल के सर्वश्रेष्ठ महाकवि के रूप में प्रतिष्ठित और मान्य हुए।[…]

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🍄शिवाष्टक🍄- श्री जोगी दान जी कविया सेवापुरा

।।छंद भुजंगी।।

शिवा आवड़ा रूप ते सृष्टि जाणी,
शिवा ऊगतै भाण पै चीर ताणी।
शिवा सोखियो हाकड़ो नाम सिन्धू,
शिवा प्राण दे सोखियो मृत्त बन्धू।१।[…]

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महर कर मामड़जा माई – कविवर श्री शुभकरण जी देवल

अरज म्हारी साँभल़जो आई, महर कर मामड़जा माई।टेर।

जिण पुल़ बीच जवन जुलमाँ सूँ अघ बधियो अणपार।
महि अघ हरण सदन मामड़ रै आवड़ लिय अवतार।
सगत नित भगताँ सुखदाई।1।[…]

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