गीत तेमड़ाराय रो

।।गीत-प्रहास साणोर।।
करां झूल़ तिरशूल़ ले चढै अब केहरी,
ऐहरी बगत में भीर आजै।
दूथियां सरब सुख सिमरियां देहरी,
लालधज मेहरी साथ लाजै।।1
भगत रा देख नित मनां रा भावड़ा,
तावड़ा, छांह कर तुंही टाल़ै।
मदत तैं आजलग करी नित मावड़ा,
पेख मग आवड़ा बो ई पाल़ै।।2[…]

» Read more

चिरजा – डूंगरराय री

मगरिया मन मोहणा रे! रमै जिथ डूंगरराय।।टेर।।

अड़डड़ घाल चल़ु में उदधि, सुरड़ लियो सोखाय।
सड़डड़ चीर फैंक दिस सूरज, लंबहथ दियो लुकाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

हणिया दैत बीसहथ हाथां, ढिगल किया रण ढाय।
भाखरियां बैठी मनभावण, गाथा जग गवराय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।[…]

» Read more

चिरजा चंदू माजी री

साद करंतां कापणी संकट, आप उदाई आय।
पूर पखो नित पाल़णी पेखो, मात चंदू महमाय।।
हे मा चंदू आप पुकार सुनकर अपने भक्तों के संकट निवारण करने वाली हैं !! इसलिए तो आप अपने निजजनों का पूर्णतया पक्ष निभाती हैं।

गढवाड़ा जिण गंजण चाह्या, तरवारां बल़ ताय।
सांभ बातां जद कोप जिणां सिर, धमकै कीधो धाय।।
………………..मात च़ंदू महमाय।।1
जिसने भी गढवाड़ों (चारणों के गांव) को डराना अथवा तलवारों के बल पर विध्वंस करना चाहा और जब आपने उन आतताइयों की ऐसी मंशा देखी तो उन पर कुपित होकर गढवाड़ों की रक्षार्थ उन पातकों को रोकने हेतु उनके समक्ष अडग खड़ी रही। […]

» Read more

चिरजा करनीजी री

थल़वटराय भरोसो थारो, लेस आल़स न लावै।
आतुर भीर सुपातां आई, सिंघ हद बेग सजावै।।टेर

प्रिथमी जोर अनँत परवाड़ा, गढवाड़ा नित गावै।
देवै हरस दीहाड़ा देवी, जगत विघन मिट जावै।।
थल़वटराय भरोसो थारो……………………1[…]

» Read more

पोकरण प्रशंसा पच्चीसी

सदन भलै रै संकरी, उपनी देवल आय।
पोकण आ पिछमांण में, वसू पेख वरदाय।।1
संडायच भलिये सदन, करणी ऊजळ कोम।
जनमी देवल जोगणी, भल पोढी री भोम।।2
वंसी मेघां मे बेगड़ा, धरी मात धणियाप।
कारू समरथ यूं किया, अवनी निज री आप।।3
महिपत गड़सी माड रो, पडियो आयर पाय।
मन तन पीड़ा मेटदी, महर करी महमाय।।4[…]

» Read more

सूरमदे सुजस

।।गीत-प्रहास साणोर।।
धिनो गोर आलोत रै प्रगट भांडू धरा,
चाढणी सरासर सुजल़ चंडी।
बराबर दिपै तूं हेमजा बीसहथ,
मुरधरा रोहड़ां जात मंडी।।10

सईकै चबदमै इकावन साल सुध,
मही धिन आलरी पवित मांडू।
सूरमदे नाम जन जाणियो सांपरत,
भवा तन धारियो आय भांडू।।11[…]

» Read more

सीमाड़ो वीर रुखाल़ै है

अणभै है धरती भारत री,
सीमाड़ो वीर रुखाल़ै है।

लाय सूरज री ठंडी हीलां,
गात जोबन नै गाल़ै है।।
हिमाल़ै री ऊंची चोटी ,
बर्फ मांय पग रोप्या है।
मुरधर रै ऊंनै इण धोरां
वीर सजोरांं जोप्या है।
बिखमी री वाटा ले झाटां
वीरत सूं कीरत आ खाटी।[…]

» Read more

शहीदां नैं चढा दिया थूक रा फगत दो आंसू

ओ कांई!! सदैव री गत
गादड़िया कद बड़ग्या
सिंघां री थाहर में?
मोत रै रूप!
आपां नैं ठाह ई नीं लागो!
सागैड़ी बात है भाईड़ां!
आपां तो अबकै ई
पीठ में छुरो खाय
भारत रै लालां रो

» Read more

कोडमदेसर भैरुंजी रा छंद

।।छंद रोमकंद।।
थपियो थल़ मांय अनुप्पम थांनग,
छत्र मंडोवर छोड छती।
थल़वाट सबै हद थाट थपाड़िय,
पाट जमाड़िय बीक पती।
दिगपाल़ दिहाड़िय ऊजल़ दीरघ,
भाव उमाड़िय चाव भरै।
कवियां भय हार सदा सिग कारज,
कोडमदेसरनाथ करै।।1[…]

» Read more

गीत त्रिकुटबंध करनीजी रो

।।गीत-त्रिकुटबंध।।
इल़ रूप करनल आजरो
हिव जनम जय हिंगल़ाज रो
इम कोम किनियां करण ऊजल़, मेह रै महमाय।
अवतार करनल आपरो,
सुध भाग रँग सोयाप रो
सोयाप मुरधर रीत सुरधर
उमँग उरधर भाव भर-भर
कोड तर-तर होड कर-कर
गहक धुनिकर गीत घर-घर
सधर सज नर नार सरभर
गुमर हरदिस गहर मनभर
अमर फणधर उरस ऊतर
उछब अवसर रिधू अवतर पहर खुशियां पाय।।1[…]

» Read more
1 31 32 33 34 35 50