दोहा-वंदना
दोहा थानें साधवा, करतो जतन करोड।
रीझ छंद रा-राजवी, कहूं हाथ द्वयजोड॥1
मंतर लय रा मारतो, जागूं निश अर भोर।
दोहा अम पर रीझझै, रे छंदों सिरमोर॥2
दोहा जो थूं हा कहै, तौ लिख दूं कुछ ओर।
पुत्र वरद पिंगळ प्रखर, कविता-काळज-कोर॥3 […]
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दोहा थानें साधवा, करतो जतन करोड।
रीझ छंद रा-राजवी, कहूं हाथ द्वयजोड॥1
मंतर लय रा मारतो, जागूं निश अर भोर।
दोहा अम पर रीझझै, रे छंदों सिरमोर॥2
दोहा जो थूं हा कहै, तौ लिख दूं कुछ ओर।
पुत्र वरद पिंगळ प्रखर, कविता-काळज-कोर॥3 […]
आवो तो जावो मती, नैणां रहौ नजीक।
गरथ गांठ जिम बांध लूं, बिछुडण री नह बीक॥1
जावण ! री जचती नहीं, मनभावण मनमीत।
सावण में दामण सदा, सँग घन रहै नचीत॥2
जावौ दूर दिसावरां, ठाकर बात न ठीक।
चाकर री चिंता करो, आछी नहीं उडीक॥3 […]
🌺छंद रेणकी🌺
आतप मँह छाय करे जन जन औ, रुत पावस सिर त्राण करे।
शुभ पवन सुबांटत शीतल सुंदर, विहग सदा जिण पर विहरे।
दिल सूं उपकार करे वह हरदम, जिणरो सभी बखाण करे।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरुवर, कायम जग कल्याण करे॥1
तीरथ सरवर वळ ताल नदी तट, वट गुलर अस्वत्थ वळे।
बिच ओरण केर बोर बण ओपत, जंगळ गिर पर जोत जळे।
करता बहु नीड विहग घण कलरव, इसडो कुण उपकार करै।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरूवर,कायम जग कल्याण करे॥2 […]
ह्रदय- कोटडी हे सखी!, जाजम नेह जमाव।
आखां तणा अफीम रो, हाकौ करै बुलाव॥1
नैणां तणा खरल्ल में, सैण नेह रस घूंट।
पछै अमल पा प्रेम सूं, लेय काळजौ लूंट॥2
करै पलक री गाळणी, खरल नेह रस घोळ।
अमल पिवाडो आंख सूं, पीतम थें मन -पोळ॥3 […]
म्है खत थांनै आज लिखूं सा।
मत व्हैजो नाराज लिखूं सा।
कदे शिकायत थें मत कीजो,
घणै मान सूं राज लिखूं सा।
थांरी सूरत रा हेताळू,
अजब गजब अंदाज लिखूं सा।
मन री बातां खोल बतासूं
खरा ज आखर आज, लिखूं सा।[…]
क्रां काळी मां काळिका, गळ नर मुंडां माळ।
बाळक नें मत बीसरै, रहजै थूं रखवाळ॥1
काळी खपराळी कथी, खेंगाळी खळ खाण।
क्रां क्रीं क्रूं बीजाक्षरी, माता बसै मसाण॥2
क्रां काळी विकराळ मुख, खळां खपावण वाळ।
लप लप लपकारा करै, जीभ अगन री ज्वाळ॥3 […]
दीपक! तौ दुशमन तिमिर, छुपियौ थारे हेठ।
कह कीकर करसी सखा, उणरो थूं आखेट॥1
देखै अंधड दीवला, मत पडजै थूं मंद।
तम हर नित तव तेज सूं, अर जग दे आणंद॥2
रे दीपक री दीकरी, जळ हळ जळ हळ जोत।
थारी ऊजळ किरण सूं, चारु चांदणौ होत॥3 […]
सुरमे ज्यूं रखजै सखी, आंख्या माँही आँज।
पछै पलक कर बंद अर, रख घुंघट पट मांझ॥1
नैण कोटडी मौ छुपा, द्वार पलक कर बंद।
अवगुण्ठन ताळां जडै, कूंची फैक समंद॥2
केस रैण जिम काजळी, तारक जिम बनफूल।
आनन शशि अनूप लख, जाऊं सुधबुध भूल॥3 […]
छंद बंद को छोड कर, मन के अंतरद्वंद।
लिखते हो कितने सरल, सुंदर काव्य निबंध॥1
लिए सहज कर तूलिका, और मिलाकर रंग।
मन माफिक चित्रित सरस, करते भाव प्रसंग॥2
कविता कलकल आपकी, लय की लिए न लीक।
भावों से चित को हरै, सुन्दर, सरस, सटीक॥3 […]
दुआ मुझे तुमने छुआ, हुआ तभी खुशहाल।
वरना नरपत का सखी, बहुत बुरा था हाल॥1
दुआ आप मुझको मिली, खिली तभी मन डाल।
पंछी फिर आने लगै, इस सुखै मरु- ताल॥2
दुआ दुःखी मन की दवा, दुआ हरे सब पीर ।
दुआ काज सब भटकते, खोजत संत फकीर॥3 […]