कविते! मैं सजदा करूँ

कविते! मैं सजदा करूँ

कविते ! तुझको क्या कहूँ, छुई मुई या और ।
मन में गहरी पैठ कर, फिर फैलाती छोर ॥1॥

कविते ! तुझको दूँ सजा, आ मन की दहलीज़।
आज चाँद है ईद का, कल आषाढी बीज ॥2॥

कविते ! तुम कमनीय हो, कोमल है तव गात ।
आ फूलों से दूँ सजा, हँसकर कर ले बात ॥3॥

कविते ! तुम ही प्यार हो, तूँ ही जीवन सार ।
अलंकार रस से सजे, पहने नवलख हार ॥4॥

कविते ! तनिक दुलार दे, कर ले मुझसे प्यार ।
तेरे बिन तो फूल भी, लगते हैं अंगार ॥5॥[…]

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कविता की खोज

इब्ने-बतुता की तरह, यह कविता की प्यास।
भाव विश्व से हो शुरू,चली मनोआकास॥1

मन मोरक्को में मिला, उस को एक फकीर।
बोला खोजा शब्द मैं, पाले कविता हीर॥2

छंदोलय के ऊंट पर, लाद दिया सामान।
इब्ने बतुता उड चला, राह बडी अन्जान॥3 […]

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दोहा-वंदना

दोहा थानें साधवा, करतो जतन करोड।
रीझ छंद रा-राजवी, कहूं हाथ द्वयजोड॥1
मंतर लय रा मारतो, जागूं निश अर भोर।
दोहा अम पर रीझझै, रे छंदों सिरमोर॥2
दोहा जो थूं हा कहै, तौ लिख दूं कुछ ओर।
पुत्र वरद पिंगळ प्रखर, कविता-काळज-कोर॥3 […]

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मत जावो परदेस

आवो तो जावो मती, नैणां रहौ नजीक।
गरथ गांठ जिम बांध लूं, बिछुडण री नह बीक॥1
जावण ! री जचती नहीं, मनभावण मनमीत।
सावण में दामण सदा, सँग घन रहै नचीत॥2
जावौ दूर दिसावरां, ठाकर बात न ठीक।
चाकर री चिंता करो, आछी नहीं उडीक॥3 […]

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रिषिवर धर रूप अनुपम तरुवर

🌺छंद रेणकी🌺
आतप मँह छाय करे जन जन औ, रुत पावस सिर त्राण करे।
शुभ पवन सुबांटत शीतल सुंदर, विहग सदा जिण पर विहरे।
दिल सूं उपकार करे वह हरदम, जिणरो सभी बखाण करे।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरुवर, कायम जग कल्याण करे॥1

तीरथ सरवर वळ ताल नदी तट, वट गुलर अस्वत्थ वळे।
बिच ओरण केर बोर बण ओपत, जंगळ गिर पर जोत जळे।
करता बहु नीड विहग घण कलरव, इसडो कुण उपकार करै।
रिषिवर धर रूप अनूपम तरूवर,कायम जग कल्याण करे॥2 […]

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आख्यां रा अमल रो हाको

ह्रदय- कोटडी हे सखी!, जाजम नेह जमाव।
आखां तणा अफीम रो, हाकौ करै बुलाव॥1
नैणां तणा खरल्ल में, सैण नेह रस घूंट।
पछै अमल पा प्रेम सूं, लेय काळजौ लूंट॥2
करै पलक री गाळणी, खरल नेह रस घोळ।
अमल पिवाडो आंख सूं, पीतम थें मन -पोळ॥3 […]

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गज़लें : वैतालिक कृत

म्है खत थांनै आज लिखूं सा।
मत व्हैजो नाराज लिखूं सा।
कदे शिकायत थें मत कीजो,
घणै मान सूं राज लिखूं सा।
थांरी सूरत रा हेताळू,
अजब गजब अंदाज लिखूं सा।
मन री बातां खोल बतासूं
खरा ज आखर आज, लिखूं सा।[…]

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क्रां काळी मां काळिका

क्रां काळी मां काळिका, गळ नर मुंडां माळ।
बाळक नें मत बीसरै, रहजै थूं रखवाळ॥1

काळी खपराळी कथी, खेंगाळी खळ खाण।
क्रां क्रीं क्रूं बीजाक्षरी, माता बसै मसाण॥2

क्रां काळी विकराळ मुख, खळां खपावण वाळ।
लप लप लपकारा करै, जीभ अगन री ज्वाळ॥3 […]

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रे दीपक री दीकरी

दीपक! तौ दुशमन तिमिर, छुपियौ थारे हेठ।
कह कीकर करसी सखा, उणरो थूं आखेट॥1

देखै अंधड दीवला, मत पडजै थूं मंद।
तम हर नित तव तेज सूं, अर जग दे आणंद॥2

रे दीपक री दीकरी, जळ हळ जळ हळ जोत।
थारी ऊजळ किरण सूं, चारु चांदणौ होत॥3 […]

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कूंची फैंक समंद

सुरमे ज्यूं रखजै सखी, आंख्या माँही आँज।
पछै पलक कर बंद अर, रख घुंघट पट मांझ॥1

नैण कोटडी मौ छुपा, द्वार पलक कर बंद।
अवगुण्ठन ताळां जडै, कूंची फैक समंद॥2

केस रैण जिम काजळी, तारक जिम बनफूल।
आनन शशि अनूप लख, जाऊं सुधबुध भूल॥3 […]

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