सो सुधारण ! सो सुधारण!!

रातिघाटी के युद्ध में परास्त होकर बाबर का पुत्र कामरान राव जैतसी से भयातुर होकर भागा जा रहा था। किंवदंती है कि जब वो छोटड़िया गांव से निकल रहा था कि उसके मुकुट में लगी किरण(किलंगी) गिर गई। वो बीकानेरियों के शौर्य से इतना भीरू हो गया था कि उसने उस किरण को रुककर उठाना मुनासिब नहीं समझाऔर वो बिना उसकी परवाह किए अपनी राह चलता बना। यह गांव बीकानेर के संस्थापक राव वीका ने जीवराज सूंघा को इनायत किया था। कहतें हैं कि यहां छोटा मोयल रहा करता था। जब यह गांव सूंघों को मिला तो उसने इच्छा व्यक्त […]

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गल़ी-गल़ी गल़गल़ी क्यूं छै!

आ गल़ी-गल़ी गल़गल़ी क्यूं छै! तीसरी पीढी इम खल़ी क्यूं छै!! ऊपर सूं शालीन उणियारो! लागर्यो हर मिनख छल़ी क्यूं छै!! काल तक गल़बाथियां बैती। वै टोलियां आज टल़ी क्यूं छै!! रीस ही आ रूंखड़ां माथै! तो मसल़ीजगी जद कल़ी क्यूं छै!! नीं देवणो सहारो तो छौ! पण तोड़दी आ नल़ी क्यूं छै!! काम काढणो तो निजोरो छै! कढ्यां उर आपरै आ सिल़ी क्यूं छै!! धरम री ओट में आ खोट पसरी! धूरतां री जमातां इम पल़ी क्यूं छै!! बाढणा पींपल़ अर नींबड़ां नै! तो बांबल़ां री झंगी आ फल़ी क्यूं छै!! कदै आ आप सोचोला! कै, भांग यूं कुए […]

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विनायक-वंदना

।।गीत – जांगड़ो।।
व्हालो ओ पूत बीसहथ वाल़ो,
दूंधाल़ो जग दाखै।
फरसो करां धरै फरहरतो,
रीस विघन पर राखै।।१

उगती जुगती हाथ अमामी,
नामी नाथ निराल़ो।
भगतां काज सुधारण भामी,
जामी जगत जोराल़ो।।२[…]

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ग़ज़ल – आं तो वांनै भला कहाया

आं तो वांनै भला कहाया।
भोलां नै रूड़ा भरमाया।।

फूट फजीती फोरापण सूं,
जबरा देखो पांव जमाया।।

न्याय ताकड़ी काण घणेरी,
पार पड़ेली कीकर भाया?[…]

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ऐतिहासिक तेमड़ाराय मंदिर देशनोक का करंड, रतनू आसराव नै दिया था अपनी बेटी को दहेज

जैसलमेर के महापराक्रमी वीर दुरजनशाल उर्फ दूदाजी जसौड़ को गद्दीनशीन करने में सिरुवा के रतनू आसरावजी का अविस्मरणीय योगदान रहा। दूदाजी भी कृतज्ञ नरेश थे, उन्होंने आसरावजी व उनकी संतति को हृदय से सम्मान दिया। कहतें कि एक बार दूदाजी अपनी ससुराल खींवसर गए हुए थे। खींवसर उन दिनों मांगलियों के क्षेत्राधिकार में था। वहां उनकी सालियों व सलहजों ने उनके साहस की परीक्षा लेने हेतु अपनी किसी सहेली के चोटी में गूंथने की आटी का सर्प बनाकर उनके शयनकक्ष के मार्ग में रख दिया। जब वे सोने जाने लगें तो उनके मार्ग में सर्पाकार वस्तु निगाह आई। उन्होंने बड़ी […]

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न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण

न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण,
सरायण जगत रा काज सारा।
परायण-धरम रा सको जग पाल़वा,
करायण जनमतां मुगत कारा।।1

वंश रा दीप तूं कीरती बधावण,
अंश वसुदेव रा जगत ओटो।
तोड़िया जनेतां संस सह तड़ाकै,
खाल़ियो कंस सो दैत खोटो।।2[…]

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जाग -जाग रै वोटर जाग!

मतदातावां नै समर्पित
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जाग-जाग रै वोटर जाग!
सो मत रै भारत रा भाग!!
इतरा वरस आऴस मे़ं खोया!
खोटा मिणिया माऴा पो।
भारत री तकदीर बदऴदे,
वांनै अज तक क्यूं नीं जोया?[…]

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सूरजदेव स्तुति

।।छंद – मुकंदडंबरी।।
परभात री जोत दिपै परभाकर,
नित्य नवीन करै किरणां।
उतसाह उमंग सुचंग भरै उर,
तारण नाथ सदा तरुणा।
जगचक्ख अहो जगनायक जोगिय,
काज धरा करणो करुणा।
सुण गीध सलाम सदामद सूरज,
नाम ललाम रटो निरणा।।1[…]

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हमारे अग्रज – भंवरदान रत्नू ‘मधुकर’ (खेड़ी)

जिन चारण साहित्यकारों ने व्यापक फलक पर काम किया लेकिन अपरिहार्य कारणों से उनकी पहचान सर्वत्र नहीं बन पाई।कारण कोई भी रहा हों लेकिन यह सत्य तथ्य है कि इन मनीषियों के काम की कूंत साहित्यिक जगत के समक्ष नहीं के बराबर आई है। ऐसे ही काम में अग्रणी और नाम में विश्वास नहीं रखने वालें एक मनीषी हैं, भंवरदान रत्नू ‘मधुकर’

‘मधुकर’ एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने मौलिक लिखने के साथ अपने पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा प्रणीत काव्य जो आजकी पीढ़ी के लिए सुलभ तो हैं लेकिन अध्ययनाभाव के कारण उनके लिए सुगम नहीं, को बौधगम्य बनाने हेतु स्तुत्य कार्य किया है।

इनके कार्य की तरफ इंगित करूं उससे पहले इनकी साहित्यिक विरासत की तरफ थोड़ा ध्यानाकर्षण करना समीचीन रहेगा।[…]

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