जंगी गढ जोधांण / बंको बीकानेर

जग में चावो जोधपुर, भल चमकंतो भाण।
अड़ियो जाय अकास सूं, जंगी गढ जोधांण।।११
***
जाहर गढ जोधांण रो, हाड अकूणी हेर।
सदा निशंको सांप्रत, बंको बीकानेर।।14[…]

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*समय को पहचानो*

हे मित्र! समय को पहचानो,
बस इतना सा कहना मानो,
आलस से यारी मत करना,
ज्यादा होंशियारी मत करना।

ये क्षण में सबको छलता है,
पल पल में रूप बदलता है।
ये टाले से नहीं टलता है,
अपनी ही गति से चलता है।[…]

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इक टक उन को जब जब देखा – ग़ज़ल

इक टक उन को जब जब देखा।
हम ने उन मे ही रब देखा।।१

लोग पुकारे “निकला चंदा”
छत पर उनको कल शब देखा।।२

साँझ सकारे त़का उन्ही को,
आन उन्हीं के कुछ कब देखा?३

“मय के प्याले लगे छलकने”,
माह जबीं का जब लब देखा!!४[…]

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कांई आपरै आ मनगी कै म्है आपनै मार दूं ला?

भरमसूरजी रतनू आपरै समय रा मोटा कवि अर पूगता पुरुष हा। इणां नै मेड़ता रा राव जयमलजी मेड़तिया मौड़ी अर बासणी नामक दो गांम देय कुरब बधायो। भरमसूरजी रा डिंगल़ गीत उपलब्ध हैं। इणी रतनू भरमसूरजी री ई वंश परंपरा में ईसरदासजी रतनू हुया। जद अकबर चित्तौड़गढ माथै आक्रमण कियो उण बखत जयमलजी मेड़तिया री सेना में रतनू भरमसूरजी अर ईसरदासजी मौजूद हा। कह्यो जावै कै भरमसूरजी इण लड़ाई में वीरगति वरी–

चारण छत्री भाइयां, साच बोल संसार।
चढियो सूरो चीतगढ, अंग इधक अधिकार।।

जयमलजी मेड़तिया जैड़ै जबरेल वीर री वदान्य वीरता नै अखी राखण सारू ईसरदास जी ‘जयमल मेड़तिया रा कवत्त’ लिखिया। आ रचना डिंगल़ री महताऊ ऐतिहासिक रचना मानी जावै। रचना री एक बांनगी कवि री मेधा नै दरशावण सारू-[…]

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थपिया कीरत थंब

सांचोर माथै राव बरजांगजी राज करै। बडो दातार। बडो सतवादियो। कवियां रो कद्र करणियो अर खाग रो धणी। केई चारण कवेसरां नै गांम इनायत किया। इणी कवियां में एक नाम सोडैजी मईया रो ई चावो।

इण सोडैजी मईया नै राव बरजांगजी, गोमेई गांम दियो। नैणसी री ख्यात रै परिशिष्ट में दाखलो मिलै कै उन्नीसवें सईकै में गोमेई में दो पांतीदार हा-

“कोस 9आथूण। इकसाखियो। कोसोटो हुवै। चारण करता जमांवत, चारण अभा मांनावत रै आदो-आद सो गांव बरजांगजी दीया चारण सोडै मई नै। “

जैड़ोक दाखलो आयो कै अभा मानावत रै आधोआध है। इणसूं ठाह लागै कै अभजी मईया गांम रा आधिया हा। उवै आपरी बखत रा नामजादीक कवि पण हा-

अभमल तोसूं ऊजल़ी, सो मईयां री साख।[…]

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आव योगिनी बण अठे

आज चाल आकास रो, आपां देखां छोर।
म्है थांनें देख्या करूं, थें देखो मम ओर।।१

मन री गति सूं मानुनी, आवौ मम आवास।
छत पर दोन्यूं बैठ नें, देखांला आकास।।२

गिण गिण तारां रातड़ी, आज बिताद्यां, आव!
अर दोन्यूं ल्यां नाप फिर, आभ तणौ उँचाव।।३[…]

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पछै ओ माथो कांई काम रो?

आज जितरो भौतिक विकास हुयो है उतरी ईज मानसिक द्ररिद्रता बधी है। मिनखपणो, नैतिकता, संवेदनावां, अर जीवणमूल्यां रो पोखाल़ो इण लारलै वरसां में जिण तेजी सूं निकल़ियो है उणसूं इण दिनां आंरी दुहाई देवणियो अजै तो फखत गैलसफो ईज बाजै, बाकी आ ई गति रैयी तो लागै कै आवण वाल़ै दिनां में आंरो नाम लेवणियो बचणो ई मुश्किल है।

एक उवो ई बखत है जद चीकणी रोटी जरूर जीमता पण चीकणी बात करण सूं चिड़ता। आपरै साथै रैवणिये या आस-पड़ौस माथै आफत आयां उणरै साथै हरोल़ में रैता अर मदत कर’र परम सुख मानता। क्यूंकै उण काल़खंड रा मिनख वाच -काछ निकलंक हुवता। आपरै गांम कै पडौसी माथै आफत आयां पछै पाछ पगलिया नीं सिरकता बल्कि आगमना हुय आपरो माथो देवण में गुमेज मानता। जद ऐड़ै मिनखां री ऐड़ी बातां पढां कै सुणां तो इयां लागै कै उवै मिनख जावता उवै बातां अर बखत आपरै साथै लेयग्या-

वल़ता लेग्या वांकजी, सदविद्या गुण संग।

ऐड़ी ई गीरबैजोग एक बात है मोरझर रै सुरताणिया पताजी वैरावत अर अकरी रै रतनू भोजराज खेंगारोत री।[…]

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गीत महाशक्ति देवलजी रो

महाशक्ति देवल जिन्होंने अपने पिता की जागीर का चौथा हिस्सा अपने पिता के सेवक जो कि बेघड़ जाति का मेघवाल था को देकर बनाया था जमींदार। आजादी के बाद, उस मेघवाल की संतति को मिला था जागीर का मुआवजा। आज भी पशिचमी राजस्थान के बेघड़, कागिया, पन्नू आदि उपशाखाओं की इनमें हैं अगाध आस्था—–

।।चित इलोऴ।।
इऴ माड़वै हिंगल़ाज आई,
करण कवियां कार।
सदन भलियै घरै सगती,
आप ले अवतार।
तो दातारजी दातार, देवी देवला दातार।।१[…]

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चारणां रो रगत पचैला नीं!

कच्छ धरा में एक गांम है मोरझर। मोरझर जूनो सांसण। अठै सुरताणिया चारण रैवै।

ऐ सुरताणिया पैला पाधरड़ी गांम में रैवता। किणी बात माथै उठै रै ठाकुर राजाजी वाघेला सूं अणबण हुयगी अर ऐ आपरो माल-मवेशी लेय गांम सूं निकल़ग्या। मोरझर पासै आया तो इणां नै आ धरा आपरै बसणजोग लागी। घणो झूंसरो, प्रघल़ो पाणी। लीला लेर अर घेर घुमेर रूंखां री जाडी छाया देख इणां आपरो नेस अठै थापियो।

इण सुरताणिया परिवार रा मुख्या जगोजी हा। वै बोलता पुरस, डील रा डारण अर दीखत रा डकरेल हा। मोरझर री धरा लाखाड़ी री सीमा में पड़ती सो जगाजी रो ऐड़ो व्यक्तित्व देख’र उठै रा ठाकुर देवाजी इणां नै सदैव रै सारू इनायत करदी। जगाजी रै साथै ई इणां रा मोटा भाई भाखरसी ई रैता। इणी भाखरसी रै एक बेटे रो नाम हो महकरणजी।

महकरणजी रो ब्याव वावड़ी गांम रा झीबा खोड़ीदान री बेटी वानूं रै साथै हुयो।[…]

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बालक हूं बुद्धू मत मानो

इक दिन उपवन में आयुष जब,
घूम रहा था मस्ती करता,
कलियों-पुष्पों से कर बातें,
कांटों पर गुस्सा सा करता।

तभी अचानक उसके कानों,
इक आवाज पड़ी अनजानी,
बचा-बचाओ मुझे बचाओ,
बोल रही थी कातर बानी।[…]

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