ईसाणंद म्हारा आदेश

आसा ईशर अवन उण, प्रगट्या मोटा पात।
भोम अहो भादरेस री, विमल़ चहुदिस बात।।

।।गीत वेलियो।।
आयो कुळ जात उजाळण अवनी
भायो भोम नमो भादरेस,
सूरै भाग सरायो सारां।
ईसर पायो पूत आदेस।।1[…]

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पुस्तक समीक्षा – पखापखी विहुणी निरख-परख

साहित्य सिरजण रै सीगै बात करां तो सगल़ां सूं अबखो अर आंझो काम है आलोचना रो। आलोचना रै पेटै काम करणियो नामचीन ई हुवै तो बदनाम ई। इण छेत्र में तो वो ई काम कर सकै जिणरै मनमें “ना काहू सों दोस्ती, ना काहू सों बैर “री भावना हुवै। हकीकत में आज इणरै ऊंधो हुय रह्यो है, आज तो आलोचना ई मूंडो काढर तिलक करण री परंपरा में बदल़ रह्यी है।
राजस्थानी आलोचना री बात करां तो आपां रै सामी आलोचकां रा नाम कमती अर पटकपंचां रा नाम ज्यादा अड़थड़था लखावै। यूं भी आलोचना करणो कोई बापड़ो विषय नीं है जिको हर कोई धसल़ मार देवै। आलोचना करणो खांडै री धार बैवणो है। जिण खांडै री धार माथै सावजोग रूप सूं बैवणो सीख लियो वो आलोचना रै आंगणै आपरी ओपती ओल़खाण दिराय सकै कै थापित कर सकै।[…]

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छंद करनीजी रा

।।छंद – रोमकंद।।
दुसटी कल़ु घोर हुवो दुख देयण, रेणव जात सुमात रटी।
महि गांम सुवाप पिता धिन मेहज, पाप प्रजाल़ण तूं प्रगटी।
इल़ जात उजाल़ण पातव पाल़ण, बात धरा पर तो वरणी।
धिन लोहड़याल़िय लाल धजाल़िय, तूं रखवाल़िय संत तणी।।1

प्रजपाल़ तुंही सरणाणिय पोखण, रोकण राड़ बिगाड़ रसा।
सबल़ापण हाकड़ धाकड़ सोखण, जोगण काज बखांण जसा।
जुध मांय अरी सिर वीजड़ झोखण, हेकण हाथ जमात हणी।
धिन लोहड़याल़िय लाल धजाल़िय, तूं रखवाल़िय संत तणी।।2[…]

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पुस्तक समीक्षा: गीतां पैली घूघरी – श्री भागीरथ सिंह भाग्य

राजस्थानी कविमंचां रा महारथी कवियां मांय सूं अेक गीरबैजोग कवि है- श्री भागीरथसिंह भाग्य। आपरी अलबेली अदा, सरस रचनावां, सुरील राग, मनमौजी सभाव, ऊंडी दीठ, लोकरंग-ढंग री गैरी पिछाण, संस्कृति अर सामाजिक जीवणमूल्यां री जबरी जाण-पिछाण, लोकव्यवहार री लळकती-टळकती रगां नैं टंटोळण री लकब अर जनता-जनार्दन री चाह रा जाणीजाण कवि भागीरथसिंह भाग्य री रचनावां रा अनुभूति अर अभिव्यक्ति दोनूं पख प्रबळ है। कवि जीवण रा लगैटगै साठ बसंत देख चुक्यो अर मोकळी रचनावां लिखी है। कवि री लगैटगै 90 काव्यरचनावां रूपी सुमनां सूं सज्यो गुलदस्तो है ‘गीतां पैली घूघरी’ सिरैनामक पोथी। पोथी सद्भावना समिति पिलाणी सूं प्रकाशित हुई है। आमुख पं. नागराज जी शर्मा, संपादक-बिणाजारो रो लिख्योड़ो है, जकां रो अनुभव अर साहित्यिक दखल किणी परिचै री मोहताज नीं है। नागराजजी लिखै कै ‘भागीरथसिंह भाग्य कविता लिखै ई कोनी, कविता नैं जीवै है।’ साव साची बात है।[…]

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कीरत गिरधर आ कत्थी

।।छंद – रेंणकी।।
हरणी हर कष्ट समरियां हर दिन, करणी तूं हर काज करी।
सरणी नर रटै सबर रख, सांप्रत, खबर जैण री जबर खरी।
झरणी नित नेह बाळकां, जरणी, वरणी जस इळ बीसहथी।
तरणी कळु नीर डूबती, तारण, भीर करै मा भगवती।।१

फसियो इळ पाप बहू विध फंदन, बंधन कितरा है ज वळै।
विसर्यो पड़ दोख तिहाळो वंदन, भाळो मंदन बुद्ध भळै।
इम आप तणो अवलंब, ईसरी, जाप नेम री नह जुगती।
तरणी कळु नीर डूबती, तारण, भीर करै मा भगवती।।२[…]

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सब बातन को सार

बड़ो को सनमान अरूं छोटो को स्नेह धार,
लाग लपटान बिनां खरी खरी कहबो।
झूठ जँजाल अरूं छदम को पँपाल त्याग,
हक की हजार लेय बेहक को तजबो।

आडंबर वेश नहीं धूर्त को आदेश नहीं,
कथनी रू करनी में भेद बिनां रहबो।
अरे भाई ! गीध सब बातन को सार यही,
सज्जन सों प्रीति अरूं नीति मग बहबो।।[…]

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आग नफ़रत री बुझाओ

आग नफ़रत री बुझाओ, आ समय री माँग है।
हेत री जाजम जमाओ, आ समय री माँग है।
मौन तोड्यां बिन मनां री ग्रन्थियां उळझै घुळै।
परस्पर बोलो-बुलाओ, आ समय री माँग है।
बारणा अर बारियाँ ढक, सोवणै सूं नीं सधै
आज घर सूं बा’र आओ, आ समय री माँग है।
दोष देकर दूसरां नैं, पाक-दामण मत बणो
आंगळी खुद पर उठाओ, आ समय री माँग है।[…]

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क्यूं राखै करड़ाण अणूती

क्यूं राखै करड़ाण अणूती
छोड परी आ बाण अणूती
धड़ो करंतां ध्यान राखजे
निजर-ताकड़ी काण अणूती
कुळपतराई कारण काया
खाली ओगण खाण अणूती
चाव-चूंटियो काढ़ माट सूं
छाछ मती ना छाण अणूती[…]

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पुस्तक लोकार्पण – काव्य कलरव काव्य संग्रह


काव्य कलरव काव्य संग्रह के लोकार्पण का अवसर अतिथियों के उत्प्रेरक एवम उम्दा उद्बोधनों, कवियों की प्रभावी काव्य-प्रस्तुतियों तथा समागत मित्रों की गरिमामयी एवम अपनत्व भरी उपस्थिति से अविस्मरणीय बना।

‘‘साहित्य समाज का दर्पण है लेकिन यह दर्पण सामान्य दर्पण की तरह मात्र बाह्य संसार की दृश्यमान चीजों को ही प्रतिबिम्बित नहीं करता वरन यह ऐसा विलक्षण दर्पण है जो समाज के प्रति समर्पण को प्रतिबिंबित करता है। सकारात्मक समर्पण की प्रेरणास्पद छवियों को सामाजिकों के समक्ष अभिव्यक्त कर अपनी संवेदना एवं संचेतना के बल पर करणीय एवं अकरणीय कार्यों की सम्यक पहचान कराने का काम साहित्य करता है, ऐसे साहित्यिक सृजन को एक वाट्सएप समूह द्वारा संरक्षित, संवर्द्धित एवं प्रोत्साहित किए जाने पर मुझे अपार खुशी है। इससे मुझे भरोसा है कि साहित्य सृजन की सरस सलिला सतत प्रवाहित होती रहेगी।’’ उक्त विचार काव्य कलरव समूह की ओर से रविवार को झालाना ऑफिसर्स क्लब, जयपुर में आयोजित ‘काव्य कलरव पुस्तक लोकार्पण समारोह’ के अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय न्यायाधिपति श्रीमान महेशचंद्र शर्मा ने व्यक्त किए।

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नमण धरा नागौर

नमण धरा नागौर, और कुण तो सूं आगै।
संत भगत सिरमौर, तोर जस जोती जागै।
तूँ मोटी महमाय, उदर मीरां उपजावै।
गुण गोविंद रा गाय, दाय नह दूजो आवै।
जहं सूरवीर पिरथी सिरै, (अरु) देव-देवियां अवतरै।
गजराज आज घण गरब सूं, (थनै) क्रोड बार वन्दन करै।। 01।।[…]

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