मालणदे महिमा

।।गीत – चित इलोल़।।
इल़ा भांडू करी ऊजल़,
आल रै घर आय।
देह धर हिंगल़ाज दुनियण,
मालणा महमाय।
तो भलभायजी भलभाय, भांडू भोम धिन मन भाय।।18

रमी धोरां रीझ रांमत,
बीसहथ बण बाल़।
दूल पितु नै मोद दीनो,
रोहड़ां रिछपाल़।
तो रिछपालजी रिछपाल़, रैणी रेणवां रिछपाल़।।19[…]

» Read more

शब्दां वाल़ी चोट देखलै!!

माची दोटमदोट देखलै!
सिद्ध श्री में खोट देखलै!
मिनड़्यां वाट न्याय री न्हाल़ै!
बांदर छीनै रोट देखलै!!

गाय सुवाड़ी ठाण बंधी है!!
खेत उजाड़ै झोट देखलै!!
घड़ै चौपड़ै छांट पड़ै नीं!!
काल़ा तन पर कोट देखलै!![…]

» Read more

गीत जांगड़ो

सिमर रै सांमल़ियो साहेब,
वेद पुराण बतावै।
सुधरै अंत मिटै धुर सांसो,
संत सार समझावै।।1

पुणियां नाम कटै भव पातक,
सुणियां मल़-गल़ सारा।
चुणिया नाम कोट गढ चौड़ै,
पेख हुवा पौबारा।।2[…]

» Read more

राणी पदमावती री गौरव गाथा

चित्तौड़ दुर्ग री बात चल्यां,
मन भारत माता मोदीजै।
पदमण रो पावन प्रेम पढ्यां,
हर हिंदुस्तानी गरबीजै।

वा रतन सिंह री रजपूती,
वा साख सपूती पदमण री।
गौरा-बादळ रो साम-धरम,
वा सीख सदीनै भलपण री।[…]

» Read more

बाजीसा! आप तो म्हांरी भली रा चाऊ हो!! ओ कांई….

जैसलमेर माथै महारावल़ गजसिंहजी (सन 1820-45) रो शासन। सालमसिंह मेहता उणां रो दीवाण। उण बगत राज री पौची हालत। दीवाण रै घालियो लूण पड़ै। उणरी अज्ञा बिनां पत्तो तक नीं हिलै। मेहतो अन्याय, अत्याचार, अर अनाचार रो साक्षात पूतलो। उण बगत उणरो विरोध करण रो मतलब हो मोत नै बुलावणो। महारावल रो एक ब्याव उदयपुर महाराणा भीमसिंहजी री बेटी रूपकंवर साथै होयो। उण बगत सालमसिंह आपरै रचियै तोतक अर आतंक सूं महारावल़ री जान उदयपुर में छव महीणा रोकाय राखी अर लारै सूं आपरी विश्व विख्यात ‘सालमसिंह री हवेली’ लूट लूट र भेल़ै कियै धन सूं चिणाई। ओ बो ई सालम सिंह हो जिणरै अत्याचार सूं आंती आय जैसाण धरा रै पालीवाल़ां एक ई रात म़े उछाल़ो (उचाल़ो) कियो।[…]

» Read more

शारदा स्तुति

।।रोमकंद।।
उर दैण उगत्तिय जोड़ जुगत्तिय, दांन सुदत्तिय बांण दहै।
कवि कीरत कथ्थिय साज सुमत्तिय, लम्ब सूं हत्थिय भीर लहै।
कर वीणबजत्तिय काज करत्तिय, पांण धरत्तिय दास परै।
सिमरू सुरसत्तिय साय सगत्तिय, हंस चढत्तिय दोस हरै।।१

शुकळा पट धारण हंस सवारण, वाणिय हारण तूं विपदा।
घट ग्यांन बधारण औगण गारण, बात सुधारण तूं वरदा।
पह संत पुकारण आय उबारण, तुंही उतारण पार तरै।
सिमरू सुरसत्तिय साय सगत्तिय, हंस चढत्तिय दोस हरै।।२[…]

» Read more

नीं बुझेला कदै ई प्रकाश!!

चित्तौड़ !
इण धरती रो सिरमोड़ !
ईं नीं बाजै है!
इणरै कण -कण में है
स्वाभिमान री सोरम
सूरमापणै री साख
जिकी नै राखी है मरदां
माथां रै बदल़ै!
रगत सूं सींचित
उण रेत रै रावड़ -रावड़ में
सुणीजै है अजै ई मरट रै सारू
मरण सूं हेत रा सुर![…]

» Read more

पदमणी पच्चीसी

जौहर री ज्वाल़ा जल़ी, राखी रजवट रीत।
चावै जगत चित्तौड़ नैं, पदमण कियो पवीत।।1
झूली सतझाल़ा जबर, उरधर साख अदीत।
गवराया धर गुमर सूं, गौरव पदमण गीत।।2
खप ऊभो खिलजी खुटल़, जिणनै सक्यो न जीत।
जौहर कर राखी जगत, पदमण कँत सूं प्रीत।।3
सतवट राख्यो शेरणी, अगनी झाल़ अभीत।
हिंदवाणी हिंदवाण में, पदमण करी पवीत।।4
जगमगती ज्वाल़ा जची, भल़हल़ साखी भास।
परतख रचियो पदमणी, ऊजल़ियो इतिहास।।5[…]

» Read more

पद्मिनी का प्रेम

सुंदरता खुद जिससे मिलकर, सुंदरतम हो आई थी।
जिसके मन मंदिर में अपने, पिय की शक्ल समाई थी।

शील, पतिव्रत की दुनिया को, जिसने सीख सिखाई थी।
जौहर की ज्वाला में जलकर, जिसने जान लुटाई थी।

सदियों के गौरव को जिसने, अम्बर तक पहुंचाया था।
स्वाभिमान को शक्ति देकर, खिलजी से भिड़वाया था।

जीते जी राणा को चाहा, और चाह ना उसकी थी।
सत-पथ पे चलती थी हरदम, सत पे जीती मरती थी।[…]

» Read more

जनतंत्र तो झाड़ छिंयाड़ी

जनतंत्र तो झाड़ छिंयाड़ी!
खावै गोधा हरियल़ बाड़ी!
गादी ऊपर तँत्र हावी!
जन री सांप्रत माड़ी भावी!
जन रै आडी जड़ी किंवाड़ी!
तंत्र अपणो बड़ो खिलाड़ी!
खादी कातण गांधी पचियो!
बदल़ै में अपजस ई बचियो!
चसमो जाणै कठै गम्यो है!
बिनां डांगड़ी डैण थम्यो है![…]

» Read more
1 44 45 46 47 48 91