संतन स्वामी तो सरणं
।।छंद – त्रिभंगी।।
पैहाळ तिहारो भगत पियारो, निस थारो नाम रटै।
हिरणख हतियारो ले घण लारो, झैल दुधारो सिर झपटै।
हरनर ललकारो कर होकारो, दैत बकारो द्यो दरणम।
नमहूं घणनामी जय जगजामी, संतन स्वामी तो सरणम।।
इन्दर कोपायो ब्रिज पर आयो, वारिद लायो वरसायो।
धड़हड़ धररायो जोर जतायो, प्रळै मचायो पोमायो।
नख गिर ठैरायो इन्द्र नमायो, धिनो कहायो गिरधरणम।
नमहूं घणनामी जय जगजामी, संतन स्वामी तो सरणम।।[…]