प्रस्तावना

राजस्थान री धरा सूरां पूरां री धरा। इण धरा रे माथे संत, सती, सूरमा, सुकवि अर साहुकारां री ठावकी परंपरा रेयी है। जग रे पांण राजस्थान आखै मुलक में मांण पावतो अर सुजस लेवतो रेयौ है। डॉ शक्तिदान जी कविया रे आखरां में-

संत, सती अर सूरमा, सुकवि साहूकार।
पांच रतन मरूप्रांत रा, सोभा सब संसार।।

इण मरू रतनां रे सुजस री सोरम संचरावण वाळौ अठेरो साहित पण सजोरो। शक्ति, भक्ति अर प्रकृति रो त्रिवेणी संगम। शक्ति जाति वीरता रो वरणाव वंदनीय तो प्रकृति सूं प्रेम पढण वाळै नें हेम करे जेडौ तो इणी गत भक्ति काव्य भक्त ह्रदय सूं निकळण बाळी गंगधार। इणी गंग धार में नहाय आपरे जीवण रो सुधार करण रा जतन करणिया अठे रा कवेसर पूरै वतन में निकेवळी ओळखाण राखै। भक्ति काव्य री परंपरा घणी जूनी अर जुगादि। राम भक्ति काव्य कृष्ण भक्ति काव्य रे साथै साथै अठै तीसरी भक्ति धारा ई संपोषित ह्वी अर समान वेग सूं चाली। अर बा है देवी भक्ति काव्य धारा।[…]

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लाडली

आस तणो आधार लाडली
सैणां रो संसार लाडली
मरजादा री असली मूरत
पत-समदर पतवार लाडली।
तूं गणगौर दिवाळी दिपती
तीज तणो त्योहार लाडली।
प्रीत नीत परतीत परस्पर
रीत तणी रखवार लाडली।
ऊंचो सीस जिहास जिगर में
है सब थारै लार लाडली।[…]

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ग़ज़ल: नुवे बरस री जै माताजी

पंडित!, फादर!, ग्यानी!, काज़ी!,
नुवे बरस री जै माताजी!१
रहो जीतता सदा बेलियाँ,
जीवन री चौसर री बाजी!!२
रेय आप रे खुशी खेलती,
करे कृपा घर करनल माजी!!३[…]

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गज़ल: उधारे आंसुओं का भार

उधारे आंसुओं का भार तुम कब तक उठाओगे,
उसूलों से अदावत को कहो कैसे निभाओगे।

किसी के गमजदा किस्से दिलों से निकलती आहें,
अगर सुन भी तनिक लोगे तो हँसना भूल जाओगे।

निभाना है निभालो तुम अभी दस्तूर रोने का,
हकीकत सामने आई कि रोना भूल जाओगे।[…]

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तूं क्यूं कूकै सांखला!!

“बारै वरसां बापरो, लहै वैर लंकाल़!!”

महाकवि सूरजमलजी मीसण री आ ओल़ी पढियां आजरै मिनखां में संशय उठै कै कांई साचाणी बारह वरसां रा टाबरिया आपरै बाप-दादा रा वैर लेय लेवता! आं रो सोचणो ई साचो है क्यूं कै आज इणां रा जायोड़ा तो बारह वरसां तक कांई बीस वरसां तांई रो ई रोय र रोटी मांगे!! सिंघां सूं झपटां करणी तो मसकरी री बात है बै तो मिनड़ी रै चिलकतै डोल़ां सूं धैलीज जावै!! जणै आपां ई मान सकां कै आजरो मिनख आ बात कीकर मानै? पैला तो हर मिनख आपरी लुगाई नै कैया करतो हो कै “जे आपांरै जायोड़ै में बारह वरसां तक बुद्धि, सोल़ह वरसां तक शक्ति अर बीस वरसां तक कुल़ गौरव री भावना नींआवै तो पछै उणसूं आगे कोई उम्मीद राखणी विरथा है”[…]

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म्है मरियां ई कोट भिल़सी !!

बीकानेर माथै जिण दिनां महाराजा सुजाणसिंहजी रो राज तो जोधपुर माथै अभयसिंहजी रो।
जोधपुर रै राजावां री कुदीठ सदैव बीकानेर माथै रैयी ही। उणां जद ई देखियो कै बीकानेर में अबार सत्ता पतल़ी है अथवा आपसी फूट रा बीज ऊग रैया है तो उणां बीकानेर कबजावण सारु आपरो लसकर त्यार राखियो।
ओ ई काम अभयसिंहजी कियो। ऐ ई बीकानेर माथै सेना लेय आया।[…]

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रात -रात तो मरुं कोनी!!

‘लिखी सहर सींथल़ सूं, आगे गांम कल़कतियै।‘ इण एक वाक्य सूं सींथल़ रै लोगां रो स्वाभिमान अर मातभोम रै प्रति अगाघ प्रेम नै परख सको। ओ वाक्य ई किणी कवि कै ठाकुर रै लिख्योड़ी कै लिखायोड़ो नीं है बल्कि ओ वाक्य सींथल़ रो हर साहूकार आपरै कल़कते रैवणियै पारिवारिक सदस्य नै कागज लिखती बगत लिखतो। इणी कारण तो डॉ शक्ति दानजी कविया लिखै कै मरू प्रांत रै पांच रतनां रै पाण ई इण धोरां धरती री सौभा आखै जगत में है-

संत सती अर सूरमा, सुकवी साहूकार।
पांच रतन मरू प्रांत रा, सौभा सब संसार।।

सींथल(बीकानेर)री धरती माथै संतां में हरिरामदासजी होया।[…]

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परमवीर प्रभु प्रकाशःअदम्य साहस रो अमिट उजास

रजवट (साहस) रो वट जिण सूरां आपरै रगत सूं सींच र पोखियो उणां रो नाम ई अमर रैयो है। कायर अर वीर रै मरणै में ओई फरक है कै कायर तो मरर धूड़ भेल़ा होवै अर वीर जस देह धार अमरता नै प्राप्त होवै। आजरै इण नाजोगै जमानै में ई आपरो जोगापणो बतावणिया जनम लेय, देश रै कारण मरण खाट, ऊजल़ै वेश सुरग पथ रा राही बणै। ऐड़ो ई एक वीर लारलै दिनां देश भक्ति रो दीप दीपाय अमरता नै प्राप्त होयो।
इण वीर रो नाम हो प्रभुसिंह गोगादेव।[…]

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लूणोजी रोहड़िया री वेलि

बीठूजी नै खींवसी सांखला 12 गांव दिया। बीठूजी आपरै नाम सूं बीठनोक बसायो। कालांतर में इणी गांव म़े सिंध रै राठ मुसलमानां सूं सीमाड़ै अर गोधन री रुखाल़ी करतां बीठूजी वीरगति पाई। जिणरो साखीधर उठै एक स्तंभ आज ई मौजूद है। बीठूजी री वंश परंपरा में धरमोजी होया अर धरमोजी रै मेहोजी। मेहोजी रै सांगटजी/सांगड़जी होया। बीठनोक भाईबंटै में सांगड़जी नै मिलियो जिणरै बदल़ै में तत्कालीन जांगलू नरेश इणां नै सींथल़ इनायत कियो।
सांगड़जी सींथल आयग्या। सांगड़जी रै च्यार बेटा हा-मूल़राजजी, सारंगजी, पीथोजी, अर लूणोजी। एकबार भयंकर काल़ पड़ियो तो च्यारूं भाई आपरी मवेशी लेयर माल़वै गया परा। लारै सूं सूनो गांम देख ऊदावतां सींथल माथै कब्जो कर लियो। मेह होयो। हरियाल़ी होई तो ऐ पाछा आपरै गांम आया। आगे देखै तो ऊदावत धणी बणिया बैठा है! उणां विध विध सूं समझाया पण उणांरै कान जूं ई नीं रेंगी।[…]

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अठै तो नानोसा री पगरखियां रुखाल़ूं !!

मारवाड़ में चारणां आऊवा री धरा माथै गोपाल़दासजी चांपावत रै संरक्षण में ‘लाखा जमर’ कियो-

आवधां बांध खटतीस अंग, भुजां लाज सबल़ां भल़ी!
रेणवां कनै गोपाल़ रा, बैठा आयर महाबल़ी!!
–खीमजी आसिया

इण जमर पछै, जिका चारण बचिया उणांनै अर गोपालदासजी नै महाराजा रायसिंहजी(बीकानेर) बीकानेर बुला लिया-

रायसिंघ बीकाण, पटो दीनो भुज पूजै।
सब्बां पायो सुक्ख, धरा वंकां सत्र धूजै।।
–खीमजी आसिया

उण बगत मारवाड़ सूं जितरा ई चारण आया उवै सगल़ा बीकानेर सूं सींथल़ आयग्या[…]

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