भोर भई अब जाग जीव तू

भोर भई अब जाग जीव तू, आदीतो अम्बर आयो।
अरुण-किरण उठ आभै आई, हर पंछी मन हरसायो।।
चहकत द्वार चारु चिड़कलियां, कलियां चटकत सुख चायो।
गलियां महकत गुल-सोरम सूं, अलिसुत रलियां हित आयो।।
हिमकर उतर तजी असवारी, हिरणी रो मन हरसायो।
दधिसुत खिलत छूटियो अलिसुत, कौमुदसुत मन कुमलायो।।
नव किसलय निरखत सुख निपजै, दरखत-दरखत सरसायो।
सीतल-मन्द-सुगंध समीरण, घर-घर बांटन को आयो।।[…]

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रीत-नीत तज राड़ करै

रीत-नीत तज राड़ करै,
बाखळ में ऊभ बोबाड़ करै,
परिवार दुखी वां पूतां सूं,
कुळ नै रिगदोळ कबाड़ करै।
सावळ कावळ रो भान नहीं,
कुळ गौरव रो अभिमान नहीं,
लालच रै लपकां लाग्योड़ा,
ऐ गिणै कोई अहसान नहीं।[…]

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चिरजा: बिड़द रख बीसहथी वरदाई

बिड़द रख बीसहथी वरदाई,सेवग दुख हर लीजे सुरराई।

खल को खंडन कर खलखंडनि, मेछां उधम मचाई।
संतन के मन गहरो सांसो, पुनि-पुनि-पुनि पछताई।।1।।

खल संग निर्मल होय सफल कब, अंत मिलत अफलाई।
दुष्ट दलन कर हे दाढाळी, एक आसरो आई।।2।।[…]

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मन मान्यै री बात

मन री सत्ता घणी मजबूत है। मन री गति अपार। बिना सवारी मन तीनूं लोकां री जात्रा करतो आनंद री ल्हरां लेवै। मन री सत्ता सूं संत अर फकीर ई घबरावै। ओ ई कारण है कै कबीर जियांकलै फक्कड आदमी नैं ई मन नैं नियंत्रण में राखण सारू कलम चलावणी पड़ी। कबीर री रचनावां मांय ‘मन को अंग’ नाम सूं मोकळी साखी लिखीजी है।

मन लोभी मन लालची, मन चंचल मन चोर।
मन के मते न चालिए, पलक पलक मन और।।

कबीर आद मोकळा संतां री सीख सुण्यां पछै ई मानखो तो मन री सत्ता नैं ई मानै अर मनगत मोजां माणै।[…]

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एतबार रखिए अवस

एतबार रखिए अवस, इस बिन सब अंधार।
रिसते रिश्तों के लिए, अटल यही आधार।।

एतबार पे ही टिके, घर-परिवार-संसार।
एतबार से ही बहे, रिश्तों की रसधार।।

प्रीति परस्पर है वहीं, उर-पुर जंह पतियार।
प्रीति अगर परतीति बिन, केवल मिथ्याचार।।

मन की तनक न मानिए, मन नाहक मरवाय।
मन के शक की मार से, एतबार मर जाय।।[…]

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चरागों का जब बोलबाला रहेगा

🌺गज़ल🌺
चरागों का जब बोलबाला रहेगा।
सियह रात में भी उजाला रहेगा।।१

भरा हो,छलकता,अधूरा कि खाली,
नजर में सभी की वो प्याला रहेगा।२

भले आप धोलें उसे चांदनी में,
अँधेरा है काला तो काला रहेगा।।३[…]

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बहुत मुमकिन गुलों पर वार होगा!

🌺गज़ल🌺
बहुत मुमकिन गुलों पर वार होगा!
अगर उस शाख पर ना खार होगा!१

भरोसा ना-खुदा पर जो करे है,
उसी को डूबना मँझधार होगा!२

सफर को खूबसूरत मोड देने,
हुआ रूखसत वो आखिरकार होगा!३[…]

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खुद तो खुद सूं साचो बोल

खुद तो खुद सूं साचो बोल
सै सूं पैली खुद नै तोल,
खुद रै मन री घुन्ड्यां खोल,
औरां सूं तो झूठ भलांई
खुद तो खुद सूं साचो बोल।
मन री सगळी घात बता तूं,
प्रतिघाति हालात बता तूं,[…]

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परभड़ा वीरगत तिहारी परणमू

।।गीत-प्रहास साणोर।।

वहा! वहा! धर शेरगढ कूख धर बंकड़ां,
निडर नर निपजणी ओल़ नामी।
गोग रा वंशधर गाढ में गर्विला,
थल़ी रा मरद रण खाग थामी।।1

जिणै छतरांणियां जाहर नर जगत में
दियण धिन नाहरां टकर देखो।
वाहरां गयोड़ी भोम रा वीरवर
एक सूं आगल़ा एक एको।।2[…]

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छका मनका गज़ाला – गज़ल

उसे फिर तोड डाला जा रहा है।
अंगारों पे उबाला जा रहा है।।१
गलाकर मौम की मानिन्द कुंदन,
नये जेवर में ढाला जा रहा है।।२
कोई रोको वो पतझड का पयंबर,
बिना ओढे दुशाला जा रहा है।।३
वो सच में सल्तनत का हुक्मरां है,
पे दरबां हुक्म टाला जा रहा है।।४[…]

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