मरांला!!पण बेटी कीकर देवांला?

राजस्थान री आंटीली धरा माथै एक सूं एक बधर सूरमा अर साहसी मिनख जनमिया है। जदै तो कवियां कैयो है – पुरस पटाधर नीपजै, अइयो मुरधर देश! इण सिंह उत्पन्न करण वाल़ी धरा रै नर-नाहरां री अंजसजोग कथावां आज ई अमिट है अर पढियां कै सुणियां आपां नै गौरव री अनुभूति करावै। ऐड़ो ई एक किस्सो है रूण रै शासक सीहड़देव सांखला रो।
विक्रम रै चवदमे सईकै रै पूर्वार्द्ध में रूण माथै सांखलां रो राज। अठै रो शासक सीहड़देव महावीर अर स्वाभिमान रो साक्षात पूतलो। सीहड़देव रै मेहाजल़ दधवाड़िया पोल़पात। मेहाजल़ घणजोड़ो कवि, सामधर्मी अर चारणाचार रै गुणां सूं अभिमंडित मिनख।
सीहड़देव रै महारूपवंत कन्या। उणरै शील अर रूप गुणां री चरचा चौताल़ै चावी।[…]

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दासोड़ी मीठो दरियाव!!

लारलै सईकै रै सिरै डिंगल़ कवियां में बगतावरजी मोतीसर रो नाम चावो है। बगतावरजी रो जनम गांम सींथल़ में होयो। मोतीसर चारणां रै सारु पूजनीक अर श्रद्धेय जात। लच्छीरामजी बारठ (गोधियाणा)रै आखरां में-

ज्यांसूं भेद कदै नह जांणूं,
हर कर आंणूं चीत हुलास।
मावल भला बणाया मांगण,
आयां आंगण हुवै उजास।।

बगतावरजी आपरी बगत रा नामी डिंगल़ कवि। जिणां री करणी सुजस प्रकास, पाबू गुण प्रकास, गंगेस रो गौरव, सेति मोकल़ी रचनावां चावी।
बगतावरजी रो गांम दासोड़ी में घणो आघमान। एकर बगतावरजी मेवाड़ गया। ढोकलिया ढूका उठै दो चार दिन रैया। पाछा आपरै गांम संभिया जणै दधवाड़ियां कैयो कै अबै आप डोढ दो महीणा अठै ई विराजो क्यूंकै इतरै दिनां पछै कविराज री बाईसा री शादी है अर जान जोधपुर कविराजजी रै अठै सूं आवैली।[…]

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छप्पय

।।छप्पय।।
सब सेणां रै साथ, प्रात उठ दरसण पाऊं।
मात चरण में माथ, नेम सूं नित्त नमाऊं।
सुरसत देवै सुमत, कुमत मेटै किनियाणी।
जुगती सबदां जोड़, उरां उकती उपजाणी।
जगदम्ब कृपा रै जबर बल, पंगु पहाड़ां पूगियो।
कर जोड़ नमन गजराज कर, आज भाण भल ऊगियो।[…]

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सुकवी गजदान सुणावै रे

सब सज्जनां मन होय सौराई, दुष्ट दौराई दूरै।
भेळप-संप रखै सब भाई, प्रेम भलाई पूरै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 01।।

हर घर माँहीं हेत-हथायाँ, कुटिल मितायाँ कड़खै।
अणहद माण मिलै घर आयाँ, रंच न जायां रड़कै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 02।।[…]

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नमो जुड़दै नाम

सुण मोदी सरकार, सुणो तो दरद सुणावां।
मुलक आजादी मांय, क्यूं न आजाद कहावां।
रहां भोम रजथान, मान-मरजाद न मोड़़ां।
हरदम रह हद मांय, जस्स रा आखर जोड़ां।।
मदद कर्यां गुण मानस्यां, अदद अेक अरदास है।
गजराज कहै मोदी गुणो, (म्हानैं) थांसूं अणहद आस है।। 01।।[…]

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करनी बिन कुण मदत करे!

करनी बिन कुण मदत करै।।टेर।।

कल़जुग राह कठण हुई कटणी
डग मन धरत डरै
थल़वट राय भरोसै थारै
तरणी दास तरै।।१
करनी बिन कुण मदत करै।।[…]

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वैर सगतो किनियो लेवैला!!

एक किस्सो है ‘किनियां री बस्ती’ (किनियां रो गांम, बीकानेर) रो। घणै वरसां पैली किनियां री बस्ती रा चेलोजी किनिया आपरै घोड़े चढिया खेतां सूं गांम कानी जावती बगत आपरो घोड़ो एक नाडियै माथै पावण लागा तो उणां नै अचाणचक एक ओपरी छाया दीसी।

विशालकाय छाया मिनख वाणी में बोली कै ‘चेला तूं लांठो मिनख है भाई ! म्हनै पाणी पा ! वरसां सूं तिस मर रैयो हूं !’

एकर तो चेलेजी रै समझ में नीं आई पण दूजै पल बे समझग्या कै कोई भूता चाल़ो है। चेलोजी बिनां डरियां बोलिया ‘ओ नाडियो थारै आगे पड़ियो, पीवै नीं पाणी। कुण हाथ झालै ?’

‘म्हैं इंयां पाणी नीं पी सकूं, पाणी तो तूं पगां हेठकर फेंकेला जद म्हैं पी सकूंला। ‘ बा छाया बोली।[…]

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राजस्थानी साहित्य रा थंभ सौभाग्य सिंहजी शेखावत ने श्रद्धांजलि

परम श्रद्धेय सौभाग्य सिंहजी शेखावत, राजस्थानी साहित्य रा थंभ हा। उणां डिंगल़ अर विशेषकर चारण साहित्य री जिकी सेवा करी, बा अनुपम अर अद्वितीय ही। म्हारै माथै उणांरी घणी मेहरबानी ही। म्हारी पोथी ‘मरूधर री मठोठ’ में आप आशीष सरूप अंजस रा आखर लिखिया। बीकानेर विराजता जितै, म्हनै फोन करर बंतल़ सारू बुलावता। लारलै वरस पोतै नै परणावण पधारिया जणै व्यक्तिगत फोन करर मिलण रो आदेश दियो पण दुजोग सूं मिल नीं पायो। अणुंतो स्नेह हो। म्हारी उण पुण्यात्मा अर दिव्यात्मा नैं सादर श्रद्धांजलि। 2003 में म्हारो निबंध संग्रह ‘मरूधर री मठोठ’ छप्यो। आदरणीय नाहटाजी री भूमिका अर शेखावत साहब […]

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बोल रबारी ! जै बाबा री

🍀ग़ज़ल🍀
मतकर ज्यादा थारी मारी,
बोल रबारी! जै बाबारी!
बाट बेव बस ह्वै अलगारी,
बोल रबारी! जै बाबारी!१

छाल़्यां थूं संभाल़ बावल़ा,
औ थारौ अणमोल खजानो,
हवल़ै. जा देतौ टीचकारी,
बोल रबारी जै बाबा री!२[…]

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