गीता रौ राजस्थानी में भावानुवाद-दसमो अध्याय
दसमो अध्याय – विभूतियोगः ।।श्लोक।। भूय एवं महाबाहो श्रृणु मे परमं वच:। यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया।।१।। ।।चौपाई।। हे अर्जुन! मम रहस्य जाणौ वचन ग्यान रा अब पहचाणौ। थूं राखै मम नेह घणा रौ इहि कारण म्हैं केऊँ सारौ।।१।। ।।भावार्थ।। भगवान् श्रीकृष्ण कैवै-हे महाबाहो! म्हारा रहस्य अर परम वचनां नै थूं सुण जिण नैं म्हैं म्हारा सूं अणूतो हेत करण वाळा नै कैऊँ मतलब थनैं म्हारा मरजी सूं कैऊँ जिण में थारौ हित होवै है। ।।श्लोक।। न मे विदु: सुरगणा: प्रभवं न महर्षय:। अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वश:।।२।। ।।चौपाई।। नीं मुझ लीला देव ज जाणै महाऋषी तक नीं पहचाणै। म्हैं इज […]
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