चतुर्थ वर्षगांठ – www.charans.org

दुर्गा अष्टमी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। यह नवरात्री एक और कारण से विशिष्ठ है क्योंकि चार वर्ष पूर्व शारदीय नवरात्री में ही माँ भगवती की प्रेरणा से www.charans.org साईट का शुभारम्भ किया गया था। आज इसकी चौथी वर्षगांठ है।

एक छोटा सा पौधा जो चार वर्ष पूर्व शारदीय नवरात्री स्थापना के दिन लगाया गया था, आज आप सभी के सहयोग एवं उत्साहवर्धन से निरंतर प्रगति कर रहा है। कुछ तथ्य प्रस्तूत हैं:[…]

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काव्य-कलरव सांंस्कृतिक संगम एवं स्नेह मिलन समारोह (१३-१४ जुलाई २०१९ खुड़द)

  • दो दिवसीय सांस्कृतिक संगम एवं स्नेहमिलन समारोह संपन्न
  • श्रीमढ खुड़द धाम की आस्था के उजास पर पढ़े गए छंद एवं गीत
  • सोशल मीडिया की उपादेयता एवं प्रासंगिकता” विषयक संगोष्ठी में की विद्वानों ने शिरकत
  • विशिष्ट साहित्यिक सांस्कृतिक प्रतिभाओं का किया गया अभिनन्दन
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तृतीय वर्षगांठ – www.charans.org

वि.स. २०७५ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (१० अक्टूबर २०१८)

नवरात्री स्थापना की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आज का दिन एक और कारण से विशिष्ठ है क्योंकि तीन वर्ष पूर्व आज ही के दिन माँ भगवती की प्रेरणा से www.charans.org साईट का शुभारम्भ किया गया था। आज इसकी तीसरी वर्षगांठ है।
एक छोटा सा पौधा जो तीन वर्ष पूर्व शारदीय नवरात्री स्थापना के दिन लगाया गया था, आज आप सभी के सहयोग एवं उत्साहवर्धन से निरंतर प्रगति कर रहा है। कुछ तथ्य प्रस्तूत हैं:[…]

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चारणों के पर्याय-नाम एवं १२० शाखाएं/गोत्र – स्व. ठा. कृष्णसिंह बारहट

प्रसिद्ध क्रांतिकारी एवं समाज सुधारक ठा. केसरी सिंह बारहट के पिताश्री ठा. कृष्णसिंह बारहट (शाहपुरा) रचित ग्रन्थ “चारण कुल प्रकाश” से उद्धृत महत्वपूर्ण जानकारी–
१. चारणों के पर्याय-नाम और उनका अर्थ
२. चारणों की १२० शाखाओं/गोत्रों का वर्णन[…]

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भक्तकवि महात्मा नरहरिदास बारहट

भक्त कवि श्री नरहरिदासजी बारहट महान पिता के महान पुत्र थे। इनके पिता लखाजी बारहट भी अपने समय के प्रसिद्ध कवि एवं विद्वान् थे जिन्हें मुगल सम्राट अकबर ने बहुत मान दिया। जोधपुर के महाराजा सूरसिंह जी के ये प्रीतिपात्र थे। लखाजी के दो पुत्र थे। ज्येष्ठ गिरधरदासजी एवं कनिष्ठ नरहरिदासजी। इनका जन्म १५९१ ई. में राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता उपखंड में स्थित टहला ग्राम में हुआ। नरहरिदासजी बाल्यावस्था से ही बड़े होनहार एवं तेजस्वी थे। प्रारम्भ से ही नरहरिदासजी को अपने पूर्व के संस्कारों के कारण, भगवान की कथाओं और पौराणिक शास्त्रों में बहुत रूचि थी। वे […]

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भक्तिमति समान बाई (मत्स्य की मीराँ)

राजस्थान की पुण्यधरा में अनेक भक्त कवयित्रियों ने अपनी भक्ति भावना से समाज को सुसंस्कार प्रदान कर उत्तम जीवन जीने का सन्देश दिया है। इन भक्त कवियित्रियों में मीरां बाई, सहजो बाई, दया बाई जैसी कवियित्रियाँ लोकप्रिय रही है। इनकी समता में मत्स्य प्रदेश की मीराँ के नाम से प्रख्यात समान बाई का अत्यंत आदरणीय स्थान है। राजस्थान के ग्राम, नगर, कस्बों में समान बाई के गीत जन-जन के कंठहार बने हुए हैं। पितृ कुल का परिचय: समान बाई राजस्थानी के ख्याति प्राप्त कवि रामनाथ जी कविया की पुत्री थी। रामनाथजी के पिता ज्ञान जी कविया सीकर राज्यान्तर्गत नरिसिंहपुरा ग्राम […]

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बीरम गायन

चारणों के वैवाहिक कार्यक्रमों में यदि बीरम न हो तो विवाह की आभा अधूरी रह जाती है| विवाह के दौरान होने वाली हर छोटी बड़ी रस्मो पर उसी के अनुरूप गायन करके बीरम उस रस्म के आनंद को कई गुना कर देते हैं। समय के साथ यह कला भी धीरे धीरे लुप्त होती जा रही है। इस पेज पर बीरमो द्वारा गाये गए गीतों, चिरजाओं इत्यादी को संकलित किया जाएगा। जिस किसी के पास रिकॉर्डिंग हो, कृपया admin@charans.org पर ईमेल द्वारा भेजें।

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चारणत्त्व – पुनर्जागरण का शंखनाद

पत्रिका पढने अथवा डाउनलोड करने के लिए सम्बंधित अंक के लिंक पर क्लिक करें: वर्ष २ – अंक जनवरी वर्ष १ – अंक चतुर्थ वर्ष १ – अंक तृतीय वर्ष १ – अंक द्वितीय वर्ष १ – अंक प्रथम सम्पादक: महेंद्र सिंह चारण दुधालिया  प्रबंधन: जयदेव सिंह चारण अडूशिया  वितरण: रणजीत सिंह चारण मुंडकोसिया कार्यालय: करणी इन्फोसिस, 57, कोलीवाड़ा, DCM शो रूम के पीछे, उदयपुर – 313001 मोबाइल: 9983921903, 7425916103, 9829122671, 7300174927           Disclaimer: This page is reserved for displaying past editions of “Charanatva” magazine. It’s a different initiative and any views mentioned in this magazine […]

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