पुस्तक समीक्षा – चारण चंद्रिका – महेंद्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’

साहित्य अर इतिहास रै आभै में उजास करती ‘चारण चंद्रिका’ ~~महेंद्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’ राजस्थान रौ इतिहास जितरौ लूंठौ अर गौरवमय हैं उतरौ ई अनूठौ अठै रौ साहित्य हैं। राजस्थानी साहित्य री डिंगळ परंपरा नै देखां तो लागै कै इणमें वीरां री अजरी वीरता रै वरणाव साथै सामाजिक अर सांस्कृतिक परंपरावां, रीति रिवाज अर लोक-जीवण री छिब साकार व्हैती निगै आवै। इणी ज डिंगळ साहित्य रौ ऊजळौ अध्याय हैं–चारण चंद्रिका। डिंगळ रै प्रख्यात कवि -निबंधकार गिरधरदान रतनू इण कृति नै जिण लगन अर निष्ठा सूं संपादित करी, इणरै लारै वांरी गै’री सोच अर वडेरां रै प्रति असीम श्रद्धा लखावै। संपादित कृति […]

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भगत माल़ – गीत चित्त ईलोल़ -कवि ब्रह्मदास जी बीठू माड़वा, जैसलमेर

।।गीत – चित्त ईलोल़।।
प्रसण हुय प्रहल़ाद ऊपर, हर दिखाये हत्थ।
पाड़ सब्बल़ दैत्य पाड़्यौ, करण अदभुत कत्थ।।
तौ समरत्थ जी समरत्थ, सारी बात हर समरत्थ।।१

बाल़ धू वन जाय बैठौ, करण सेवस कांम।
देव अपणी ओट लीन्हौ, धणी अवचल़ धांम।
तौ निध नांम जी निध नांम, जग में व्यापियो निध नांम।।२[…]

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जेठवा री बात में कतिपय भ्रामक धारणाएं – श्री कैल़ाश दान उज्ज्वल आईएएस (रिटायर्ड)

‘चारण साहित्य का इतिहास’ नामक शोध ग्रन्थ लिख कर चारण साहित्य पर कालजयी व प्रणम्य कार्य करने वाले डॉ. मोहनलाल जिज्ञासु‘सौराष्ट्र नी रसधार’ के लेखक श्री झवेरचंद मेघाणी जैसे मनीषियों को सादर वंदन।
अस्तु इसी साहित्य इतिहास में एक बहुत बड़ी भूल हुई है – “ऊजळी-जेठवा री बात” इसमें ऊजळी को कवयित्री मानकर उसका परिचय तथा काव्य बांनगी भी दी गई है। यह भूल जिज्ञासुजी ने मेघाणीजी को आधार मानकर की थी। मेघाणीजी ने भी यह भूल जानबूझकर नहीं की अपितु विभिन्न कहानियों का संकलन करते समय अपवादस्वरूप हो गई।
इसी भूल पर राजस्थानी साहित्य के दिग्गज विद्वान श्रद्धेय कैलासदानजी उज्ज्वल ने शोध पत्रिका ‘विश्वंभरा’ अप्रैल-जून 1994 में एक शोध लेख लिखा था। जिसमें शोध के प्रतिमानों के आधार पर तथ्यात्मक दृष्टि से व्यापक प्रकाश डाला गया है।[…]

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पारख पहचाणीह !

मध्यकाल़ीन राजस्थान रो इतियास पढां तो कदै कदै ई आपांनै लागै कै केई वीरां अर त्यागी मिनखां साथै न्याय नीं हुयो। इण कड़ी में आपां मारवाड़ रो इतियास पढां तो महाराजा जसवंतसिंहजी प्रथम रो जद देवलोक हुयो अर उणांरै कुंवर अजीतसिंहजी नै क्रूर ओरंगजेब सूं बचावण अर दिल्ली सूं बारै सुरक्षित काढण री नौबत आई। उण बखत उठै कनफाड़ै जोगी रो रूप धार आपरी छाबड़ी में छिपाय अजीतसिंहजी नै छानै-मानै काढणियै जिण मिनखां रा नाम आपांरै साम्हीं आवै उणांमें एक नाम है मनोहरदास खीची अर दूजो नाम है मनोहरदास नांधू।[…]

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भैरव नाथ रो छंद – जयसिंह सिंहढायच, मंदा, राजसमंद

।।छंद – त्रिभंगी।।
मामा मतवाल़ा, गोरा काल़ा, लाज रूखाल़ा, लटियाल़ा।
कायम किरपाल़ा, भीम भुजाल़ा,विरद विलाल़ा,विरदाल़ा।
जोगेस जटाल़ा, मन मुदराल़ा, आभ उजाल़ा,भाण समो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।१
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।[…]

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भैरव वंदना – कवि डूंगरदान जी आशिया बाल़ाऊ

।।छंद – रेंणकी।।
ढम ढम बजि ढोल घूघरों घम घम रम रम खेतल रास रमें।
धम धम पग धरत धरत्रि धूजत, सुर देखत नृत तेण समें।
बम बम बम बोल बोलिया बावन, रम झम रम झम रमतोड़ा।
डम डम डम डाक डहकिया डैरव नम नम भैरव नाकोड़ा।।१[…]

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महादेव महिमा – डूंगर दान जी आसिया, बालाऊ

।।छंद – त्रिभंगी।।
आबू अचलेसर, तूं तांबेसर, ओम सिधेसर, अखिलेसर।
पूजै पिपलेसर, नमै नरेसर, चन्नण केसर, चरचै सर।
हर श्री हल़देसर, सिव रामेसर, दुख दालेदर, दूर दफै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।१[…]

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हेत बिन होळी अधूरी

मानज्यो आ बात पूरी
हेत बिन होळी अधूरी।
फगत तन रा मेळ फोरा,
मेळ मन रा है जरूरी।।

वासना री बस्तियां में
प्रीत-पोळां नीं मिलै,
रूप रूड़ा लोग कूड़ा,
साफ़ दिलडां बीच दूरी।। हेत बिन होळी अधूरी।।[…]

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हाथ वीजा को पकड़जो!

मध्यकाल़ रो इतियास पढां तो एक बात साव चड़ूड़ निगै आवै कै उण बखत रा लोग आपरै सिंद्धांतां माथै जीवता अर मरता। जिणरो अन्नजल़ करता उणरै सारू आपरो माथो हथेल़ी में हाजर राखता। यूं तो उण समय स्वामीभक्ति अर स्वाभिमान ऐ दो ऐड़ा जीवणमूल्य हा जिणांनै लगैटगै सगल़ा मिनख कायम राखता पण जद आपां इण विषय रा चारणां सूं संबंधित दाखला पढां तो आपांनै लागै कै स्वामिभक्ति अर चारण एक दूजै रा पर्याय हा। ओ ई कारण हो कै मारवाड़ रा धणी मानसिंहजी निशंक कह्यो हो कै-

‘स्वामिभक्त सत्यवक्ता रू वचनसिद्ध।’[…]

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सींथल़-सुजस इकतीसी

।।दूहा।।
सुकवी संतां सूरमां, साहूकार सुथान।
सांसण सींथळ है सिरै, थळ धर राजस्थान।।1

वंश वडो धर वीठवां, गोहड़ भो गुणियाण।
जिण घर धरमो जलमियो, महि धिन खाटण माण।।2

धरमै रो बधियो धरम, भोम पसरियो भाग।
जांगल़पत गोपाल़ जो, उठनै करतो आघ।।3

धरमावत मेहे धरा, कीरत ली कवराव।
सांगट देव हमीर सा, आसै जिसा सुजाव।।4[…]

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