आवड मां रो रेणकी छंद – कवि केसरजी खिडीया

॥छंद: रेणकी॥
गहकत तर बिम्मर दादर सुर सहकत,
सगत नजर भर अठ तसणी।
झळहऴ कुंडळ उज्जळ मिळ झूलर,
दूठ निजर दामण दमणी।
मिळिया दळ सबळ तैमडै माथै
शगत नवै लख हेक समै।
झबकत कर चूड झणणणणण झांझर
रामत डुँगरराय रमै॥ 1 ॥[…]

» Read more

माँ हिंगलाज का छंद – कवि अज्ञात

॥छंद: नाराच॥
भमंक अंज काळ भंज सिंघ संज सज्जियै।
झमंक झंझ ताळ खंज वीर डंज बज्जियै।
चौसठ्ठ मझ्झ रास रंझ स्याम मंझ सम्मियै।
गिरंद गाज बीण बाज हिंगळाज रम्मिये।
मां हिंगळाज रम्मिये जि हिंगळाज रम्मिये॥ 1॥[…]

» Read more

किरियावर

आप सही फरमावो हो
कै
आपरो किरियावर है
म्हारै बडेरां माथै!
म्हारै माथै!
मोटोड़ै मिनखां!
म्है कीकर विसराय सकूं
किरियावर आपरो?
आपनै तो शायद
पांतरो पड़ग्यो होवैला
पण
म्हनै चेतो है[…]

» Read more

खोडियार मां रो डिंगळ गीत – कवि दादूदान प्रतापदान मीसण

तट हिरण रे वासो थारो।
धरो गाजै जठै इक धारो
तरवर फूलां वास तिहारो।
महके वायु रो मंहकारो॥1॥
झरणां मह झणकार करै थुं।
नीर विच घेरो नाद करे थुं
वगडा मंह वनराई घटा थुं।
लाल गुलाबी वेलि लता थुं॥2॥[…]

» Read more

तरस मिटाणी तीज!

हड़हड़ती हँसती हरस, तरस मिटाणी तीज।
हरदिस में हरयाल़ियां, भोम गई सह भीज।
भल तूं लायो भादवा, तरस मिटाणी तीज।।
भैंसड़ियां सुरभ्यां भली, पसमां घिरी पतीज।
मह थल़ बैवै मछरती, तकड़ी भादव तीज।।
सदा सुहागण सरस मन, धन उर राखै धीज।[…]

» Read more

ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!

इण दिनां होय रैयै अंतर्राष्ट्रीय खेलां म़े भारत रै पुरष खिलाड़ियां रै प्रदर्शन नै लेय कई कवि मित्रां आपरी काव्यात्मक टिप्पणियां की। इणी कड़ी में कीं ओल़्यां आपरी निजर कर रैयो हूं पण खाली खिलाड़ियां नैं इंगित नीं कर र ऐड़ी समूली मानसिकता रै माथै-

ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!
उठणै री आंरी पौच नहीं, माथै लैणै रो भार!!
आंख्यां में आंरै गीड झरै,
सैफड़ रा बैवै परनाल़ा।
उठतां री पींड्यां धूजै है,
आंख्यां रै आडा तिरमाल़ा।

» Read more

राखड़ी रो नेग !

राखड़ी
बांधणियै
जद जद ई
किणी रै बांधी है!
तो एक सुखद अहसास
होयो मन में !
पनपियो है भाव द्रढता रो
एक अदीठ डर सूं
भिड़ण री, बचण री
दीसी है जुगत
फगत राखड़ी रै धागै रै पाण
पनपियो है आपाण[…]

» Read more

हिम्मत मत ना हार मानवी – गजल – कवि गिरधारी दान बारहठ (रामपुरिया)

हिम्मत मत ना हार मानवी
कर लै खुद सूं प्यार मानवी।
थारै उठियां ही थरकैला,
आतंक-अत्याचार, मानवी।
करम किये जा फल री चिंता,
मन मांही मत धार मानवी।
दिल में जिण रै देश बसै ना,
भूमी पर वै भार मानवी।[…]

» Read more

कलमां री ताकत रै आगै

अबार रै कवियां री कलम में कितरी ताकत है? इणरै अनुमान रो दाखलो अजै सुणण में नीं आयो पण आपांरी आगली अर इणां सूं पैलड़ी पीढी रै कवियां री कलम में कितरी ताकत ही इणरा फगत तीन दाखला आपनै देय रैयो हूं [1]महाकवि पृथ्वीराजजी राठौड ‘पीथल’, [2]कवि भूषण सूर्यमल्लजी मीसण, [3]कवि पुंगव केशरीसिंहजी बारठ री वाणी रै पाणी सूं आप परिचित हो – […]

» Read more

આજ તરછોડ માં જોગમાયા – કવિવર દુલા ભાયા “કાગ”

છંદ – ઝૂલણા
ભાન બેભાનમાં માત ! તુજને રટયા, વિસારી બાપુનું નામ દીધું,
ચારણો જન્મથી પક્ષપાતી બની, શરણ જનનીતણું એક લીધું ;
તેં લડાવી ઘણાં લાડ મોટાં કર્યા, પ્રથમ સત્કાવ્યનાં દૂધ પાયાં ;
ખોળલે ખેલવ્યાં બાળને માવડી, આજ તરછોડ માં જોગમાયા ! ૧[…]

» Read more
1 81 82 83 84 85 114