काव्य सरिता
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- श्री आवड़ आराधना – कवि चाळकदान जी रतनू मोड़ी
- शंकर स्मृति शतक – कवि अजयदान लखदान जी रोहडिया मलावा
- देशाणराय रो गीत – चौथ बीठू
- પદ્મશ્રી દુલા કાગ
- जीत रण बंका सिपाही – कवि मोहन सिंह रतनू
- जीत रण बंका सिपाही! – कवि मोहन सिंह रतनू
- भगत माला रा सवेया – कवि रिड़मलदाँन बारहठ (भियाड़)
- महात्मा ईसरदासजी री महिमा रा सोरठा – शुभकरण जी देवऴ (कूंपड़ास)
- अम्बिका इन्द्रबाई – गौरीदान जी कविया
- राजस्थानी भाषा
- चारणां कियौ नित अहरनिस चांनणौ – महेंद्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’
- श्री नरसिँह अवतार की स्तुति – कवि श्री रविराज सिंहढायच (मुळी सोराष्ट्र)
- मां सूं अरदास – जी. डी. बारहठ(रामपुरिया)
- लिछमी – कवि रेवतदान चारण
- चारणों की उत्पत्ति – ठा. कृष्ण सिंह बारहट
- पटवारी री पुकार – कवि स्व. भंवर दान जी, झणकली
- श्री आवड़ माता द्वारा हाकरा दरियाव (नदी) का शोषण करना – डॉ. नरेन्द्र सिंह आढ़ा (झांकर)
- शूरवीर चारण कानाजी आढा द्वारा मित्र का वैर लेना – डॉ. नरेन्द्रसिंह आढा (झांकर)
- गीत सांगा मैणा रो-कल्याण दास गाडण कहै
- प्रथम राष्ट्र कवि व जनकवि दुरसाजी आढ़ा – डॉ. नरेन्द्र सिंह आढ़ा (झांकर)
- गजल – थे भी कोई बात करो जी – जी.डी.बारहठ (रामपुरिया)
- जंगी गढ जोधांण / बंको बीकानेर
- करणी माता रा छंद – कवि खीमदान बारहठ
- बखत आय ग्यो खोटो – कवि स्व. भँवरदान जी वीठू “मधुकर” (झणकली)
- आह्वान – कवि रिड़मलदान चारण
- परित्यक्ता / पुनर्मिलन – कवियत्री छैल चारण “हरि प्रिया”
- कवि जालण सी – दूलेराय काराणी (अनुवाद: ठा. नाहर सिंह जसोल)
- जोग माया रो गीत सपाखरु – कविराज लांगीदास जी
- गीत घोड़ी री तारीफ रो – महादानजी महडू
- प्रतापसिंह बारहठ प्रशस्ति – ठा. उम्मेदसिंह जी धोल़ी “ऊम”
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