आपां बात करां औरां री, आपां री करसी कोई और
आपणो ओ संसार बादळां री फिरत-घिरत री छाया रै मानींद कद किण सूं छूट जाय, इणरो ठाह कोई नैं ई पण नीं है। देही रै अवसाण पछै पाछो कोई देही मिलसी का नीं इण बात रो ई कोई नैं ठाह नीं है पण ओ जरूर ठाह है कै जको जलम्यो है उण सारू मरणो लाजमी है। मौत अटल साच है, इणमें कोई मीन-मेख नीं है। हां! मौत रा गेला घणा है। कद अर कुणसै बैवै कोई नैं मरणो पड़ै ओ करमां री खेती पर टिकेड़ो है। करमां सारू रिख-मुनियां लारला कई जलमां रा खाता खंगाळण री बातां मांडी है। इण जलम रो ई नीं कई जलमां रो पाप अर पुन्न जीवात्मा रै साथै संचरण करै। आ बात कोरी मानखै पर नीं वरन समूची जीयाजूणा पर लागू हुवै। हां! मिनखा देही री आ बदताई है कै इण देही मांय आपां आछा अर बुरा करमां री जाणकारी ले सकां।[…]
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