कवि सम्मान री अनूठी मिसाल
कवि मनमौजी अर कंवल़ै काल़जै रो हुवै। जिण मन जीत लियो कवि उणरो कायल। इण मामलै में वो छोटो कै मोटो नीं देखै। ओ ई कारण है कै वो निरंकुश कहीजै। बुधजी आसिया भांडियावास, कविराजा बांकीदासजी रा भाई पण उणां री ओल़खाण आपरी निकेवल़ी मतलब मनमौजी कवि रै रूप में चावा। एक’र बीमार पड़िया तो दरजी मयाराम उणां रा घणा हीड़ा किया। उणरी सेवा सूं रीझ’र बुधजी ‘दरजी मयाराम री बात‘ लिखी। आ बात राजस्थानी बात साहित्य री उटीपी रचनावां मांय सूं एक।[…]
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