सूरमदे सुजस

।।गीत-प्रहास साणोर।।
धिनो गोर आलोत रै प्रगट भांडू धरा,
चाढणी सरासर सुजल़ चंडी।
बराबर दिपै तूं हेमजा बीसहथ,
मुरधरा रोहड़ां जात मंडी।।10

सईकै चबदमै इकावन साल सुध,
मही धिन आलरी पवित मांडू।
सूरमदे नाम जन जाणियो सांपरत,
भवा तन धारियो आय भांडू।।11[…]

» Read more

रामदेव पीर आवाहन

🌺रामादेव पीर आह्वान🌺

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

वीरमदे सुगणा रा वीरा, अजमल सुत अवतारी!
मेणादे रा लाल लाडला, नेतल तो घर नारी! १

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

सिर धर सुंदर पाग सुरंगी, पीतांबर तन धारी!
जरकसी जामा प्हैरै ठाकर, अलख पुरूष अलगारी! २[…]

» Read more

कागद़ लिखदूं थानें साई!

कागद़ लिखदूं थानें साई!
मन रा आखर भाव मांडदूं, कलम नेह रसनाई!

बालम!साजण!पीव!छबीला!छैला!कुंवर कन्हाई!
रसिया!मन बसिया!,नट-नागर!कहूं आप नें कांई!1

अठै आप बिन दाय न आवै, मन री कही न जाई!
बाटूं बिरह व्यथा जो ब्रज में, हँससी लोग लुगाई!2[…]

» Read more

तरस मिटाणी तीज!

हड़हड़ती हँसती हरस, तरस मिटाणी तीज।
हरदिस में हरयाल़ियां, भोम गई सह भीज।
भल तूं लायो भादवा, तरस मिटाणी तीज।।
भैंसड़ियां सुरभ्यां भली, पसमां घिरी पतीज।
मह थल़ बैवै मछरती, तकड़ी भादव तीज।।
सदा सुहागण सरस मन, धन उर राखै धीज।[…]

» Read more

આજ તરછોડ માં જોગમાયા – કવિવર દુલા ભાયા “કાગ”

છંદ – ઝૂલણા
ભાન બેભાનમાં માત ! તુજને રટયા, વિસારી બાપુનું નામ દીધું,
ચારણો જન્મથી પક્ષપાતી બની, શરણ જનનીતણું એક લીધું ;
તેં લડાવી ઘણાં લાડ મોટાં કર્યા, પ્રથમ સત્કાવ્યનાં દૂધ પાયાં ;
ખોળલે ખેલવ્યાં બાળને માવડી, આજ તરછોડ માં જોગમાયા ! ૧[…]

» Read more

म्हूं तो मन माने ज्यूं राचूं

म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।
कदे वेदना हँस हँस गाऊ, कदे खुशी में रोऊं।
मनोभाव मणिमुकता माल़ा, जोडूं तोडूं प्रोऊं।
लडियां कडियां आँच अनुभव, कर कर कुंदन जांचूं।
म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।[…]

» Read more

म्हूं सबद-ब्रहम रो चेलो

म्हूं सबद -ब्रह्म रो चेलो!
सबद रीझतौ, सबद खीझतौ, मिल्यौ गुरू अलबेलो!
सबद नाथ रे कुम कुम चोखा, धरूं भाव रस भरिया,
सबद अमीणी राधा मीरां, सबद सखी साँवरिया,
नवधा भगति करूं आप री, सुणो सबदजी हेलो!
म्हूं सबद ब्रह्म रो चेलो![…]

» Read more

કાંકરી – કવિ શ્રી દુલા ભાયા કાગ

કુળ રાવળ તણો નાશ કીધા પછી, એક દી રામને વહેમ આવ્યો;
“મુજ તણા નામથી પથ્થર તરતા થયા, આ બધો ઢોંગ કોણે ચલાવ્યો?”
એ જ વિચારમાં આપ ઊભા થયા, કોઇને નવ પછી સાથ લાવ્યા;
સર્વથી છૂપતા છૂપતા રામજી, એકલા ઉદધિને તીર આવ્યા. 1
ચતુર હનુમાનજી બધું ય સમજી ગયા, […]

» Read more

शिरोमणि दानी सांगो गौड -अजय दान जी लखदान जी रोहडिया (मलावा)

वीरता में ज्यूं राजस्थान, रियौ है आगे प्रान्त अजोड।
त्यूहिं परसिध है जग सौराष्ट्र, शूरवीरों री धर सिरमोड।।१
जिको गांधी भी जलम्यो जेथ, कियो भारत नें जिण आजाद।
कहो किण रे मनडे रे मांय, नहीं है इण धरती री याद।।२
जठे कइ वेगा वीर जवान, मरण लग जिको न तजता माण।
पण्ड पर सह लेता सब पीड, पिरण पर दे देता पण प्राण।।३[…]

» Read more

रुद्राष्टकम – हिम्मत सिंह कविया नोख

परणाम करूँ विभुव्यापक को ब्रह्म वेद सरूप उद्धारक को ।
निरवाण सरूप महा शिव को दिस ईशन के प्रभुधारक को ।।

थिरहो निज रूप गुणातित भेद नही मनसा कुछ भीतर में ।
नभ चेतन रूप सदा शिव शंकर ऐक अनादि चराचर में ।।
पट धारण अंबर आप करो शशि सूरज तेज उजाळक को ।
परणाम करूँ विभुव्यापक को ब्रह्म वेद सरूप उद्धारक को।।1[…]

» Read more
1 4 5 6 7 8 12