शबद आराधना
शबद अमीणौ साइनो, मै शबदां रो पीर।
करुं शबद आराधना, सुरसत रे मंदीर॥1
शबद दरद, अहसास मन, वाणी, ध्वनि, लय, छंद।
यति, गति मय विध रुप धर, उर बगसे आणंद॥2
म्हूं शबदां रो जोहरी, कविता नवलख हार।
पोयी लडियां शबद री, “शारद कर स्वीकार”॥3 […]
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शबद अमीणौ साइनो, मै शबदां रो पीर।
करुं शबद आराधना, सुरसत रे मंदीर॥1
शबद दरद, अहसास मन, वाणी, ध्वनि, लय, छंद।
यति, गति मय विध रुप धर, उर बगसे आणंद॥2
म्हूं शबदां रो जोहरी, कविता नवलख हार।
पोयी लडियां शबद री, “शारद कर स्वीकार”॥3 […]
आई मोगल चालीसा
(कवि परताप री कही)
जगदंबा जगदीशरी, मोगल मोरी मात।
भव भय हरणी अंबिका, समपी तौने जात॥1॥
देवी चारण जात री, जग पुजाती बाइ।
ओखा धर उजवाळवा, मोगल प्रगटी आइ॥2॥
आद भवानी इशरी, प्रगटी जिण दन वार।
भगतां रो मंगळ हुओ, जग मांहि जयकार॥3॥ […]
शंकर री कर सेव,जटी, धुरजटी, गंग- धर।
वडो विभु महादेव,कर हर समरण काळिया॥131
परसु-धरण पिनाक,भाल-ससी , भव, भूतपत ।
कापालिक, कर- डाक,कर हर समरण काळिया॥132
नमन करो नटराज,पति नगराज- सुता, परम।
सकल दियण सुख साज,कुण है शिव बिन काळिया॥133 […]
🌹सूर्य वंदना के भाव के🌹
वंदन कर विख्यात,जगत तात जगदीस ने।
प्हेली ऊठर प्रात,काछप सुत भज काळिया।111
अवनी भरण उजास,नह चूके नित ऊगणौ।
सदा- रथिन् सपतास,काछप सुत भज काळिया॥112
भास्कर आदित भांण, मित्र मिहिर मार्तंड वळ।
करवा जग कल्यांण,कायम ऊगै काळिया॥113 […]
हेलो सुणै हमेश,मामा थूं रहजे मदत।
वळे न चहूं विशेष,करजै इतरो काळिया॥71
तन सिंदूरी तेल,बळे चढावूं बाकरा।
छाक धरूंला छेल,कर किरपा अब काळिया॥72
लाखां दाखां लार, राखां नाखां तज लवँग।
तिण रो मद है त्यार,कहूं छाक ले काल़िया॥73 […]
सौ कोसां साजन बसे, पूगावै उण पोळ।
सुपना वाळ सुहामणी, मांझल रात अमोल॥1
बालम तौ जालम घणौ, करतौ टाळम टौळ।
(पण) सुपने सजण मिलावती, मांझल रात अमोल॥2
इक चंदौ आकाश में, दूजौ रंग रे म्हौल।
झिल मिल झिल मिल जोसना, मांझल रात अमोल॥3 […]
» Read moreपाल़ै सदा हि प्रीत,अबखी वेल़ा आयने।
मानो साचो मीत,कल़जुग मांही काल़िया।।१।।
गफलत मांय गंवार,लङे अपणोंं सु लोक में।
सम्पती मे ही सार,कल़जुग मांही काल़िया।।२।।
लगनी नित लगाय,हरि ने सिमरे हेत सूं।
निरफल जासी नांय,करणी वांरी काल़िया।।३।। […]
आदरणीय साहित्य सेवी अर देवी उपासक श्री मोरारदानजी सुरताणिया रै सम्मान में कीं दूहा म्हारै कानी सूं भेंट
सत साहित री साधना, सकव करै सतकार।
स्नेह भाव सुरताणियो, मनसुध रखै मुरार।।१
करै साहित री केवटा, सरस ग्रहै मनसार।
सजन साच सुरताणियो, मनसुध रखै मुरार।।२
सैण सँवारै वैण सह, उर में प्रीत अपार।
सौ कोसां सुरणाणियो, नैड़ो लगै मुरार।।३ […]
सोरठा
पैला वाल़ी प्रीत ,सबदां में सिमटी परी।
रजवट वाल़ी रीत ,कहण सुणण री काल़िया।।१
सजन बैठ सतसंग,निरमल़ मन कीधो नहीं।
गहर नाय नित गंग ,कारी लगै न काल़िया।।२
आदर रू अपमान,लिखदी विधना लीकड़ी
मनसुध साची मान,कुण लोपेला काल़िया।।३ […]
गळ विच गूंजामाळ,मोर पंख रो मौड सिर।
रहजै थूं रखवाळ,करूणा सागर काळिया॥1
कविता बाग-कळीह,सौरम देवै सांतरी।
भावां शबद भरीह,केवूं साची काळिया॥2
अनहद नद बध बध बहै,अंतस होय अणंद।
दूहा सोरठा छंद,कल कल धारा काळिया॥3 […]