आहुवा पच्चिसी – कवि हिम्मत सिंह उज्ज्वल (भारोड़ी)
जबत करी जागीर, जुलमी बण जोधाणपत।
व्रण चारण रा वीर, जबरा धरणे जूंझिया।।1।।
रचियोड़ी तारीख, आजादी भारत तणी।
सत्याग्रह री सीख, जग ने दीधी चारणां।।2।।
अनमी करग्या नाम, अड़ग्या आहुवे अनड़।
करग्या जोगा काम, मरग्या हठ करग्या मरद।।3।।
लोही हंदा लेख, लड़िया बिण लिखिया सुभट।
रगत तणी इल़ रेख, खेंची खुद रा खड़ग सूं।।4।।[…]