स्तुति श्री करणी माँ की – कवि जयसिंह सिढ़ायच (मण्डा-राजसमन्द)

।। छन्द – नाराच।।
नमो अनन्द कन्द अम्ब, मात मैह नन्दिनी।
निकन्द फन्द दास द्वन्द, विश्व सर्व वन्दिनी।।
कृपा निधाण किन्नियांण, बीस पाण धारणी।
नमौ धिराण दैशणोक, तीन लौक तारणी।।
माँ, सर्व काज सारणी।।१।।[…]

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भगतमाल़ – छंद त्रिभंगी – ब्रह्मदास जी बीठू माड़वा

।।छंद – त्रिभंगी।।
ईसर उठ भग्गा, धोमर अग्गा, बेवै नग्गा, लग बग्गा।
हुय नार सुहग्गा, मिल़ियौ मग्गा, दाणव पग्गा, रच दग्गा।
ललचायौ ठग्गा, नाचण लग्गा, सीस करग्गा, विणसंतू।
धिन हो दुख वारण, काज सुधारण, भगत उधारण भगवन तू।
जिय भगतां तारण भगवन तू।।१[…]

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पुस्तक समीक्षा – चारण चंद्रिका – महेंद्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’

साहित्य अर इतिहास रै आभै में उजास करती ‘चारण चंद्रिका’ ~~महेंद्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’ राजस्थान रौ इतिहास जितरौ लूंठौ अर गौरवमय हैं उतरौ ई अनूठौ अठै रौ साहित्य हैं। राजस्थानी साहित्य री डिंगळ परंपरा नै देखां तो लागै कै इणमें वीरां री अजरी वीरता रै वरणाव साथै सामाजिक अर सांस्कृतिक परंपरावां, रीति रिवाज अर लोक-जीवण री छिब साकार व्हैती निगै आवै। इणी ज डिंगळ साहित्य रौ ऊजळौ अध्याय हैं–चारण चंद्रिका। डिंगळ रै प्रख्यात कवि -निबंधकार गिरधरदान रतनू इण कृति नै जिण लगन अर निष्ठा सूं संपादित करी, इणरै लारै वांरी गै’री सोच अर वडेरां रै प्रति असीम श्रद्धा लखावै। संपादित कृति […]

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भगत माल़ – गीत चित्त ईलोल़ -कवि ब्रह्मदास जी बीठू माड़वा, जैसलमेर

।।गीत – चित्त ईलोल़।।
प्रसण हुय प्रहल़ाद ऊपर, हर दिखाये हत्थ।
पाड़ सब्बल़ दैत्य पाड़्यौ, करण अदभुत कत्थ।।
तौ समरत्थ जी समरत्थ, सारी बात हर समरत्थ।।१

बाल़ धू वन जाय बैठौ, करण सेवस कांम।
देव अपणी ओट लीन्हौ, धणी अवचल़ धांम।
तौ निध नांम जी निध नांम, जग में व्यापियो निध नांम।।२[…]

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भैरव नाथ रो छंद – जयसिंह सिंहढायच, मंदा, राजसमंद

।।छंद – त्रिभंगी।।
मामा मतवाल़ा, गोरा काल़ा, लाज रूखाल़ा, लटियाल़ा।
कायम किरपाल़ा, भीम भुजाल़ा,विरद विलाल़ा,विरदाल़ा।
जोगेस जटाल़ा, मन मुदराल़ा, आभ उजाल़ा,भाण समो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।१
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।[…]

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भैरव वंदना – कवि डूंगरदान जी आशिया बाल़ाऊ

।।छंद – रेंणकी।।
ढम ढम बजि ढोल घूघरों घम घम रम रम खेतल रास रमें।
धम धम पग धरत धरत्रि धूजत, सुर देखत नृत तेण समें।
बम बम बम बोल बोलिया बावन, रम झम रम झम रमतोड़ा।
डम डम डम डाक डहकिया डैरव नम नम भैरव नाकोड़ा।।१[…]

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महादेव महिमा – डूंगर दान जी आसिया, बालाऊ

।।छंद – त्रिभंगी।।
आबू अचलेसर, तूं तांबेसर, ओम सिधेसर, अखिलेसर।
पूजै पिपलेसर, नमै नरेसर, चन्नण केसर, चरचै सर।
हर श्री हल़देसर, सिव रामेसर, दुख दालेदर, दूर दफै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।१[…]

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श्री आवड़ आराधना – कवि चाळकदान जी रतनू मोड़ी

।।छंद – हरिगीत।।
अंजुलिय इक्कर नलगि नख्खर सिन्धु हक्कर सोखिये।
तेमड़े तिहि कर दनू दह कर महिष भक्कर मोखिये।
मद रूपमत्ती सिंह सझत्ती वज्रहत्थी बदावड़ा।
जय मातु जगत्ती बीसहत्थी, आद सगती आवड़ा।
जिय आद रूपा आवड़ा।।१।।[…]

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देशाणराय रो गीत – चौथ बीठू

वेदां मह ढील रती नह वरनी।
धाबलयाल़ रही दिसी धरनी।
वीदग बेल थई वीसरनी।
किण दिस गई हमरकै करनी।।

आप तणी म्हारै अवलम्बा।
आवे मनमें घणा अचम्बा।
ईहग कूक सुणी नह अम्बा।
बोल़ी हुय बैठी जगतम्बा।।[…]

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પદ્મશ્રી દુલા કાગ

ભગતબાપુના પ્યારા અને લાડીલા નામે ઓળખાતા પદ્મશ્રી દુલા કાગનો પરિચય ગુજરાતની પ્રજાને આપવાનો હોય શું? દેશ-પરદેશમાં વસતા ગુજરાતીઓમાં પણ ભગતબાપુના નામથી કોઈપણ અપરિચિત હોય?
પોતાની મૌલિકવાણીમાં ‘‘કાગવાણી’ ને આઠ – ભાગની ભેટ ગુજરાતની જનતાને આપનાર કવિશ્રી ગુજરાતની વિરલ વિભૂતિ છે, એમના વિશે શું લખવું? ગુજરાતના સાક્ષર વર્ગ ધણું લખ્યું છે,ભગતબાપુનો જન્મ સૌરાષ્ટ્રના મહુવા પાસેના સોડવદરી ગામે તુંબેલ (પરજિયા ચારણ) કુળમાં વિ.સં. ૧૯૫૮ના કારતક વદ અગીયારસ શનિવારે ઇ.સ. ૧૯૦૨માં થયો હતો. તેમના પિતાશ્રીનું નામ ભાયા કાગ અને માતાશ્રીનું નામ પાનબાઈ હતું. તેની શાખા કાગછે.[…]

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