देशाणराय रो गीत – चौथ बीठू
वेदां मह ढील रती नह वरनी।
धाबलयाल़ रही दिसी धरनी।
वीदग बेल थई वीसरनी।
किण दिस गई हमरकै करनी।।
आप तणी म्हारै अवलम्बा।
आवे मनमें घणा अचम्बा।
ईहग कूक सुणी नह अम्बा।
बोल़ी हुय बैठी जगतम्बा।।[…]
Charan Community Portal
वेदां मह ढील रती नह वरनी।
धाबलयाल़ रही दिसी धरनी।
वीदग बेल थई वीसरनी।
किण दिस गई हमरकै करनी।।
आप तणी म्हारै अवलम्बा।
आवे मनमें घणा अचम्बा।
ईहग कूक सुणी नह अम्बा।
बोल़ी हुय बैठी जगतम्बा।।[…]
ભગતબાપુના પ્યારા અને લાડીલા નામે ઓળખાતા પદ્મશ્રી દુલા કાગનો પરિચય ગુજરાતની પ્રજાને આપવાનો હોય શું? દેશ-પરદેશમાં વસતા ગુજરાતીઓમાં પણ ભગતબાપુના નામથી કોઈપણ અપરિચિત હોય?
પોતાની મૌલિકવાણીમાં ‘‘કાગવાણી’ ને આઠ – ભાગની ભેટ ગુજરાતની જનતાને આપનાર કવિશ્રી ગુજરાતની વિરલ વિભૂતિ છે, એમના વિશે શું લખવું? ગુજરાતના સાક્ષર વર્ગ ધણું લખ્યું છે,ભગતબાપુનો જન્મ સૌરાષ્ટ્રના મહુવા પાસેના સોડવદરી ગામે તુંબેલ (પરજિયા ચારણ) કુળમાં વિ.સં. ૧૯૫૮ના કારતક વદ અગીયારસ શનિવારે ઇ.સ. ૧૯૦૨માં થયો હતો. તેમના પિતાશ્રીનું નામ ભાયા કાગ અને માતાશ્રીનું નામ પાનબાઈ હતું. તેની શાખા કાગછે.[…]
आज संकट री घडी हे,
देश पर विपदा पडी हे,
कारगिल कसमीर मे,
कन्ट्रोल लाइन लडखडी हे।
जुध रो बाजे नगारो,
सुण रह्यो हे जगत सारो,
दोसती री आड दुसमण,
पाक सेना अड़वड़ी हे।
सबक तु इणने सिखावण, जेज मत बीरा लगाई।
जीत रणबंका सिपाही, जूंझ रण बंका सिपाही।।१।।[…]
મેધાવી કંઠના સુપ્રસિદ્ધ વાર્તાકાર મેઘાણંદ ગઢવીનો જન્મ ઘેડ વિસ્તારના છત્રાવા ગામે ચારણ જ્ઞાતિની લીલા શાખના ખેંગાર ગઢવીને ત્યાં સંવત ૧૯૧૮માં થયો હતો.
લોકસાહિત્યના ક્ષેત્રમાં “લોકવાર્તા” આગવું સ્થાન ધરાવે છે. પહેલાના જમાનામાં આવી લોકવાર્તાઓ જામતી. કોઈ રાજદરબારે, પણ આતો જનસમાજની વાતું જનસમાજમાં સહુને સાંભળવી હોયને! પોતાની રત્ન સમી સંસ્કૃતિની ગાથાથી જનસમાજ કેમ વંચિત રહે? અને આમ મેઘાણંદ ગઢવી જેવા પ્રચંડકાય વીર વાર્તાકારના બુલંદ કંઠને આમજનતા સમક્ષ વહેતો મૂક્યો શ્રી ગોકળદાસ રાયચૂરાએ.[…]
» Read more
आज संकट री घडी है।
देश पर विपदा पड़ी है।
कारगिल कश्मीर में,
कन्ट्रोल लाइन लडखड़ी है।
जुध रो बाजै नगारो।
सुण रह्यो संसार सारो।
दोस्ती री आड दुसमण,
पाक सेना अडबड़ी है।[…]
।।सवैया।।
नाँम जप्यो ध्रुव बालक नैम सु तात उताँन नही बतलायो।
लागिय धूँन अलँख धणी लग नारद मूनिय मँत्र सुणायो।
आद गुगो जुग ऐक अखँडज आसण ध्रूव अडिग थपायो।
राँम जपो नित नाँम रिड़ँमल सँतन को हरि काज सरायो।
ईस्वर सँकट मैटण आयो।।१[…]
मालाणी धर मांयने, भल सांसण भाद्रेस।
जिथ सूरै घर जनमियो, (उण) ईसर ने आदेस।।
ज्वाला गिरी जोगी जबर, गिर हिम निज तन गाऴ।
सुत जनम्यौ सूरा घरै, भगतां रो भूपाऴ।।
कज हरि तो हरिरस कथ्यौ, देवी कज देवियाण।
सुंण कुंडऴियां संचरै, सूरापण सुभियांण।।
मिस निंदा अस्तुति मुणी, वऴ कथ गुण वैराट।
ईसर इण विध अलखरा, ठाह्या भगती ठाट।।[…]
गौरीदान जी कविया गांव कुम्हारिया रा वासी माँ करणी जी रा मोटा भगत अटूट आस्थावान विचारधार अर दृढ धारणा रा धणी माँ भगवती भव भय भंजनी रा भजन मे मगन रहिया अर सदा सर्वदा माँ री शरणागत सेवा साधना मे जीवन समर्पित राखियो, आज री चितारणी में गौरीदान रो भुजंगप्रयात छंद।
।।छंद भुजंगप्रयात।।
क्रमं युक्त दोशी कलि काल आयो।
ज्वितं पात यूथं अनाचार छायो।
धरा भार उतार वा मात ध्याई।
बिराजै तुहीं अम्बिका इन्द्रबाई।।[…]
….कहते हुये उनकी आँखें भर आयी, सुनते हुये मेरी भी। फिर कहा, “तुम जानती हो, उसे वीर चक्र मिला। उसने अपना वादा तब भी निभाया। जिस सम्मान का हकदार वो था, मेरे ही हाथों से लिया गया। पीएम के हाथों मेडल लेते हुये मुझे गहरा खालीपन भी दिखता तो गर्व कर जाती। पर मैं क्या करूँ बेटा …तब मुझे देपाल का चेहरा दिख गया …याद आ गया ..सब सूना था ….सब कुछ ही खाली ..। शहीद होकर भी मेरी जिम्मेदारी उम्रभर की उसने ही ले रखी है। पेंशन के पैसे जब भी हाथ में उठाती हूँ, तब-तब गला रुँध जाता है। […]
» Read more
तूं तो भोल़ी भाऴ चिड़कली।
दुनिया गूंथै जाऴ चिड़कली।।
धेख धार धूतारा घूमै।
आल़ै आल़ै आऴ चिड़कली।।
मारग जाणो मारग आणो
हुयगी अब तो गाऴ चिड़कली।।
बुत्ता दे बस्ती भरमावै।
वै ई पैरै माऴ चिड़कली।।[…]