श्री आवड़ माता द्वारा हाकरा दरियाव (नदी) का शोषण करना – डॉ. नरेन्द्र सिंह आढ़ा (झांकर)

वि.स.808 के चैत्र शुक्ल नवमी मंगलवार के दिन मामड़जी चारण के घर पर भगवती श्रीआवड़ माता ने अवतार लिया। एक बार अकाल के समय मामड़जी अपने कुटूम्बियों के साथ अपने पशुधन को लेकर सिंध चले गये। उस समय तक सिन्ध पर अरबी मुसलमानों का कब्जा हो चुका था। उन्होंने सिंध के हिन्दुओं को जबरदस्ती धर्मपरिवर्तन के लिए बाध्य करके बड़े पैमाने पर उन्हें इस्लाम स्वीकार करने को विवश कर दिया था। मामड़जी का परिवार सिंध के प्राचीन नानणगढ (सुल्तानपुर), जो बहावलपुर के 20 कोस उत्तर में आया हुआ था, के पास हाकरा दरियाव (नदी) के किनारे अपनी झोपड़ी (नेस) बनाकर रह रहा था। भगवती श्री आवड़ माता की सातों बहिन शक्ति की अवतार थी। ये सातों ही बहिनें बहुत रूपवान थी।[…]

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गीत संपखरो – तेमड़ाराय रो

नमो माडरांणी बखाणी तो सुरारांणी नमो नमो,
दीपै भांणी सात अहो भाखरां रै देस।
सालिया मेछांणी मुरड़ मंडिया केक संतां,
इल़ा मौज माणी राज अन्नड़ां आदेस।।1

धमां -धमां रमै जेथ गूघरां वीनोद गूंजै,
धूजै धरा धमां-धमां कदम्मां री धाक।
हमां-हमां करंती किलोल़ लाख नवै हेरो,
नमै जेथ खमा -खमा सुरां-नरां नाक।।2[…]

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तृतीय वर्षगांठ – www.charans.org

वि.स. २०७५ आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (१० अक्टूबर २०१८)

नवरात्री स्थापना की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आज का दिन एक और कारण से विशिष्ठ है क्योंकि तीन वर्ष पूर्व आज ही के दिन माँ भगवती की प्रेरणा से www.charans.org साईट का शुभारम्भ किया गया था। आज इसकी तीसरी वर्षगांठ है।
एक छोटा सा पौधा जो तीन वर्ष पूर्व शारदीय नवरात्री स्थापना के दिन लगाया गया था, आज आप सभी के सहयोग एवं उत्साहवर्धन से निरंतर प्रगति कर रहा है। कुछ तथ्य प्रस्तूत हैं:[…]

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शूरवीर चारण कानाजी आढा द्वारा मित्र का वैर लेना – डॉ. नरेन्द्रसिंह आढा (झांकर)

।।शूरवीर चारण कानाजी आढा द्वारा आमेर के शासक सांगा को मारकर अपने मित्रवत् स्वामी करमचंद नरूका का वैर लेना।।

(सन्दर्भ: ख्यात देश दर्पण पृ स 28-29 कृत दयालदास सिंढायच व श्यामलदास जी दधवाडिया कृत वीर विनोद के भाग 3 के पृ स 1275)

बीकानेर की धरती के कानोजी आढा चारण जाति के बडे शूरवीर योद्धा थे कानोजी आढा दुरसाजी आढा की तरह कलम व कृपाण दोनो में सिद्धहस्त चारण थे। कानोजी अमल खूब खाते थे इनके अमल ज्यादा खाने से इनके भाईयों ने इन्हें घर से निकाल दिया। ये अमल की जुगाड में इधर उधर ठिकाणों में जाने लगे। घूमते हुए आमेर की सीमा में आ गये।[…]

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प्रथम राष्ट्र कवि व जनकवि दुरसाजी आढ़ा – डॉ. नरेन्द्र सिंह आढ़ा (झांकर)

दुरसाजी आढ़ा का जन्म चारण जाति में वि.स.1592 में माघ सुदी चवदस को मारवाड़ राज्य के सोजत परगने के पास धुन्धला गाँव में हुआ था। इनके पिताजी का मेहाजी आढ़ा हिंगलाज माता के अनन्य भक्त थे जिन्होंने पाकिस्तान के शक्ति पीठ हिंगलाज माता की तीन बार यात्रा की। मां हिंगलाज के आशीर्वाद से उनके घर दुरसाजी आढ़ा जैसे इतिहास प्रसिद्ध कवि का जन्म हुआ। गौतम जी व अढ्ढजी के कुल में जन्म लेने वाले दुरसाजी आढ़ा की माता धनी बाई बोगसा गोत्र की थी जो वीर एवं साहसी गोविन्द बोगसा की बहिन थी। भक्त पिता मेहाजी आढ़ा जब दुरसाजी आढ़ा की आयु छ वर्ष की थी, तब फिर से हिंगलाज यात्रा पर चले गये। इस बार इन्होनें संन्यास धारण कर लिया। […]

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गजल – थे भी कोई बात करो जी – जी.डी.बारहठ (रामपुरिया)

थे भी कोई बात करो जी,
भैरू जी नै जात करो जी।
अपणो बेटो पावण सारूं,
दूजो सिर सौगात करो जी।।

जनम दियो सो जर जर होया,
पीळा पत्ता झड़ जासी,
सुध-बुध वांरी मती सांभळो,
मंदिर में खैरात करो जी।।[…]

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चारणों के गाँव – जिले वार सम्पूर्ण लिस्ट

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