जय तेमड़ेराय – चिरजा – कवि सोहनदान जी सिढायच

तेमडाराय
भाकरीयो मन भावणो ,जठे आवङ माँ रो थान रे |
जठे आई माँ रो धाम रे, ङुगरीयो रलियावणो ||

ऊँचे ङुगर ओर लो ज्यारी धजा उङे असमान रे |
जोत जगामग जगमगे माँ रा नामी धूरत निशान रे ||1||
ङुगरियो रलियावणो………..

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अमर सहीद कुंवर प्रतापसिंह बारठ – प्रहलादसिंह “झोरड़ा”

कै सोनलियै आखरां वीर रो मांडू विरद कहाणी में।
बो हँसतौ हँसतौ प्राण दिया आजादी री अगवाणी में।।टेर

आभे में तारा ऊग रिया रातड़ली पांव पसारे ही
महलां में सूते निज सुत रो माँ माणक रूप निहारे ही
नैणां सूं नींद उचटगी ही बातां कीं सोच विचारे ही
मन ही मन विचलित मावड़ली बेटे री निजर उतारे ही
अरे थुथकारो नाखै ही माँ थूं नाम कमा जिंदगाणी में।।[…]

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छँद देवल रो – कविराज जुँझारदान जी दैथा ‘मीठड़िया’

🌹छँद रौमकँद🌹
सुरराय सदा अघ मेटण सॉप्रत पाय नमौ पह रीत पणॉ ।
रवराय देवी दुरगा वड राजत धाय दियायत खाय घणॉ ।।
सैवकॉ पर साय उपाय साधारण जौत धुबाय तुँ आय जिनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।१।। […]

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🌹 गरमी मे गुडफील🌹

गरमी भीसण गजबरी,सिरपर रखिये साल।
छक कर पीवो छाछने,रखिये साथ रुमाल।।१
गरमी भीसण गजबरी, खाणी अलप खूराक।
पाणी ज्यादा पीवणो, छोड दिराणी छाक।।२
गरमी भीसण गजबरी,खाणा नित खरबूज।
खस खस मिसरी खोपरा,ताजा फल तरबूज।।३

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भगवान ना ओळुम्भा २०२५ मे काळ पड़ने पर – कवि स्व. भँवरदान जी वीठू “मधुकर” (झणकली)

॥छन्द जात झुलणा॥

अनादी वखत सूं तुमारी आस पर, जला कर अटल विश्वास जोती।
मरुधरा वासीयां कष्ट मोटा आया, पेट बांधे पढी पोथी।
ग्वाळ गोपाळ रा गीत गाया उठे, आज क्यां धेन माता उदासी।
आफती निवारण आवजो ईश, जगदीश वर तुम्हारी पेट जासी,
ए प्रभु पेट पाल्यां बिना पेठ जासी ॥१॥ […]

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पाबू प्रशंसा – कवि स्व. भंवर दान जी, स्व.अनौपदान जी झणकली कृत

।।गीत सपाखरौ।।

दैवलौक सुं उतरी एला, हीसती वाजींद दैख ।
धायौ खींची जींधराव, मीशणा रा द्वार।
हैवरी रै मौल रौकङा, धाम्या कै हजार ।
एहंगा नाकार सुणै रूठियौ अपार……. 1 […]

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🌹शारदा स्तुति🌹- कवि स्व. अजयदान जी रोहडिया कृत

🌸छंद रेणंकी🌸
निरमल नव इन्दु बदन विलसत भल, द्रग खंजन मृग मद दलितम्।
कुम कुम वर भाल बिन्दु कल भ्राजत, तन चंदन चरचित पुनितम्।
झल़कत अरू झल़ल़ झल़ल़ चल लोलक, लसत सु श्रवण ललाम परम्।
शारद कर प्रदत सुक्ति यह सुखकर, किंकर पर नित महर करम्।।१

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🌹जय करनी जय शंकरनी🌹- कवि स्व. अजयदान जी रोहडिया

🌸दोहा🌸
जग करनी, हरनी जगत, जग भरनी जगदंब।
किनियांणी करनी नमो, काटनि क्लेश कदम्ब।। १
देत बुआ सिर डूचको, अंगुलिन भइ अनुरूप।
नाम करनी या तें दियौ, लख निज करनि अनूप।। २

🌸छंद रेणंकी🌸
बरनी नहि जाय विशद तव करनी, आदि शक्ति नति अघ हरनी।
हरनी मद मोह, कोह तम तरनी, युग युग अवतरनी धरनी।
धरनी कर त्रिशुल मुण्ड निर्जरनी, धूर्त धृष्ट जग वध करनी।
करनी जन कष्ट नष्ट कलि करनी, जय करनी!जय शंकरनी।। १[…]

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जल संरक्षण बाबत सवैया – कवि वीरेन्द्र लखावत कृत

आप बचाय लहो इतरौ जळ जा सूं बचै सब री जिन्दगाणी।
नेह सूंमेह रौ नीर घरै संचय करणा री सबै समझाणी।
पालर पाणी री एक एक बूंद रौ लेखौ लियां ई बचैला पाणी।
होद बणा हर एक ई आंगण मांगण री मत राख मचाणी ।।[…]

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🌹सरस्वती वंदना🌹- कवि स्व अजयदान जी लखदान जी रोहडिया

🌹छंद नाराच🌹
घनान्धकार नाशिनी विनाशिनी विमूढता।
प्रज्ञा प्रदायिनी प्रकाश वर्धनी प्रगूढता।
हरि हरादि पूजिता, विरंचि वंदिता अति।
प्रसन्न हो प्रयच्छ बुद्धि स्वच्छ मां सरस्वती।। १

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