शिव स्तुति – पन्नारामजी मोतीसर जुढिया कृत

छंद नाराच
करूं प्रणाम जोग धाम संग धाम गो सिरं।
भुजंग दाम कंठ ताम रक्त नाम लेररं।
महान थान छै अकाम मुक्ति ग्राम मगलं
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। १

नगन्न अंग सीस गंग धूत रंग धारणी।
अफीम भंग बीज चंग पान रंग पारणी।
मतंग चाल पे विराज साज ध्यान निस्चलं।।
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। २ […]

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श्री सोमनाथ महादेव स्तुति – गंगारामजी बोगसा, सरवड़ी कृत

।।छंद – भुजंगी।।

नमो स्याय संता नमो सोमनाथं, महाजोग जोगेस दक्खं(दक्ष) जमातं।
जुधं काम पूर्यो प्रथी वात जानं, थरू वास कैलाश उद्यान थानं।।1

धर् या हात धानंख त्रेसूल धारी, त्रये नेत्र अगनी जरै त्रिपुरारी।
गले रूंडमाळा जटाधार गंगा, उमा प्राण प्यारी सदा वांम अंगा।।2

भख्यौ काळकूटं भयानंख भारी, अहीफेन सूगं धतुरां अहारी।
भलै तेज चंदं ललाटं भळक्कै, कितं भूत पिछास(पिशाच) दौळी कलक्कै।।3[…]

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||शिव वंदना अष्टक – जोगीदान गढवी कृत||

छंद: त्रिभंगी

करतुंड कटंकर खाग खटंकर मुंड मटंकर भयभीन्ना |
मंथन दधी मंकर भुजबल भंकर गरल गटंकर गणकीन्ना ||
निलकंठ नटंकर लचक लटंकर जटा जटंकर जणणाटी |
नम हर शिव शंकर डाक डणंकर धोम धणंकर धणणाटी||01||

जोगण पत जंकर बात बधंकर दक्ष दधंकर हथलीन्ना |
गीयणां गणणंकर चकर चटंकर प्रथी पटंकर रतपीन्ना ||
दावानल दंकर फाट फटंकर खडग खटंकर खणणाटी |
नम हर शिव शंकर डाक डणंकर धोम धणंकर धणणाटी||02||[…]

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भर्तुहरी कृत नीति शतक का राजस्थानी पधानुवाद

दिसा काल पूरण दिपै, अनुभव घट आनन्द|
लख्यौ अलख नें भरथरी, नमो सच्चिदानंद||१
समझ जाय ना- समझ ही, समझै समझण हार|
ब्रह्मा गुरू व्है भरतरी, समझै मूढ न सार||२
जडता हर चित साच भर, मान बढे हर पाप|
भरतरी कीरत लोक में, फल सतसंग प्रताप||३
जय रस सिध्ध कविसरां, दिव्य जोत दरसाय|
मरियां भरतरी आप रो, जस तन जुगां न जाय||४ […]

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स्वामी ब्रह्मानंद जी (लाडूदान जी आसिया)

सिरोही का राज दरबार खचाखच भरा हुआ था। महाराजा के कहने पर, युवा कवि लाडूदान आसिया ने अपनी स्वरचित कविताएं सुनाना शुरू कर दिया। बच्चे के शक्तिशाली और धाराप्रवाह काव्य वाचन ने दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया, काव्यपठन समापन होते ही करतल ध्वनि और वाहवाही से पूरा राज दरबार गूँज उठा। भीड़ अभी भी विस्मय से युवा कवि के बारे में चर्चा कर रही थी, सिरोही के महाराजा के मन में विचार आया “कितना अच्छा हो यदि हमारे राज्य के इस अमूल्य रत्न की प्रतिभा की महक हर जगह फैले। ” इस सदाशय से सिरोही के महाराजा ने भुज […]

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भवाष्टक – कवि जोगीदान कविया (सेवापुरा)

भवा अन्न तू धन्न तू विश्व व्यापै,भवा कर्म तू धर्म तू आप आपै।
भवा नेम तू व्रत तू सृष्टि साधै, भवा काम सारै लियाँ नाम आपे।।१।।

भवा भक्त रै रूप तू शक्ति सेवै,भवा शक्ति रै रूप तू भक्ति देवै।
भवा भक्ति रे रूप तू चित्त सोधै, भवा चित्त रै रूप तू धी प्रबोधै।।२।। […]

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🌹करणी स्तुति🌹- बारहठ खेतसी (मथाणिया) कृत

🌸दोहा🌸
बिमळ देह सिंहवाहणी, ओपे कळा अखंड|
बडां बडी चहुँवै वळां, महि पताळ नभ मंड||

💐गीत जात प्रहास शाणोर💐
बिमळ देह धारियां सगत जँगळधर बिराजै, थांन देशांण श्री हाथ थाया|
उठे कवि भेजियो राव करबा अरज, जोधपुर पधारो जोगमाया|| […]

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🌹सूर्यनारायण स्तुति🌹-कविराज नवलदानजी आसिया (खांण)

🌹छंद रेणंकी🌹
नित नित नवलेश शेश कर समरन, जुग अशेश कर क्लेश जरे|
सुमिरत अमरेश शेश पुनि शारद, ध्यांन धनेश गणेश धरे|
विलसत दश देश बेस बल व्यापक, प्रगट विग्यान अग्यान परे|
दिनकर कर निकर उदयगिरि ऊपर, होय उदयकर तिमिर हरे||१ […]

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