श्री करनी सवैया – अज्ञात कवि

जानि सके न बड़े मुनि वृन्द बखानि सके न गिरा गुन ग्वैरहि ।
वेद बताय सके न यथा विध टारि टरै न सनातन स्वैरहि ।
आनंद के घन मे चमकै दमकै जमकै चपला जिम च्वैरहि ।
धिन्न है तो महिमा जगदम्ब निरंजन के बिच अंजन व्हैरहि।।१।।[…]

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अष्टपदी – किशोर सिंह जी ‘वार्हस्पत्य’ कृत

श्री करनी सुख करनी, अजरामर ए!
आदि शक्ति अवतार, जय देवेशि जये।।1 ।।
विश्व विमोहन कारणि, भवतारिणी ए!
जय जय त्रिगुणातीत, जय देवेशि जये।।2।।[…]

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हिंद की राजपुतानीया – कवि दुला भाया “काग”

रंगम्हेल मे बानियां बो’त रहे,
एक बोल सुने नही बानियां का,
दरबार मे गुनिका नाच नचे,
नही तान देखे गुनकानियां का,
नरनार प्रजा मिली पांव नमे,
नही पांव पेसाराय ठानियां का,
जग जिनका जीवन पाठ पढे,
सोई जीवन राजपुतानियां का…..(1)

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माँ करणी गीत – वैळिया साणौर

कीरत मया किंनयाणी करनल, सुमिरन करतां आय सहाय ।
विङद राखजो मां वरदायक, गिधियो गीत तिहारा गाय ।।
पूजां जोङ पांण परभाते, निमतो सीस तिहारो नाम ।
धाम धरा पर धवळ धजाळो, गढ दिखतो देसाणै गाम ।।

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स्तुति – अज्ञात कवि

स्तुति
मढ हूँत बेग पलाण मखत्ती,बावन झूल सहेत बखत्ती
हेकण ताल़ी बाघ हकत्ती, सीस उबेल़ण आव शकत्ती।

साख बीससत काज सरन्नी, बेद किसो जिण जाय बरन्नी
धाबल़ लोवड़ ताय धरन्नी, कवि उबारण आव करन्नी।

शीश चाड जणा साद सुणीजेभारी हुवै कामल़ी भीजे
देबी आय बेग सुख दीजे,किनियाणी अब जेज न कीजे […]

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🌹श्रीब्रह्मानंदमंगलस्तवनम्🌹- श्री कृष्णवल्लभाचार्य कृत

शार्दूलविक्रीडीतवृत्तम्
य: षड्भावविवर्जिताङक्षरपदस्थानादिमुक्त:स्वयं|
स्वेष्टाङ्ज्ञावशवर्तनाङप्तनृजनि सच्चारणज्ञातिक:|
सिद्धार्थ:सुरकोटिगो मतिमतां मूर्धन्य ईष्टव्रती|
आजीवाङदृतनैष्ठिको विजयते श्रीलाडुसंज्ञ:कवि:||१

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वाह घोडा वाह – कवि दुला भाया “काग”

गीत सपाखरू
छूटा ग्राहबे वोम बछूटा रोकता धराका छेडा
उठाहबे पागा महि शोभता अथोग
धाहबे खगेश तके वेगरा अथाह धख्या
साहबे नाखता पागा नटव्वा अमोध (1)

डाबला मांडतां धरा धमंके साबधी दणी
झमंके साजहीं कोटे रंभरा झकोळ
चमके वाहसे जाणी वीजळी जालदा चळी
भ्रम्मवाळा भारे ठाळा गतिवाळा मोर (2) […]

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धरंत ध्यान आपको – गिरधारी दान रामपुरिया

।।छंद नाराच।।
धरंत ध्यान आपको, अणंद भाव आवतो।
नमंत नाम नेम सूं, जपंत रोग जावतो।।
करंत याद कीरती, मिटंत दोस मावड़ी।
करो सहाय आप आय, धाय बेल धावड़ी।।[…]

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शिव स्तुति – पन्नारामजी मोतीसर जुढिया कृत

छंद नाराच
करूं प्रणाम जोग धाम संग धाम गो सिरं।
भुजंग दाम कंठ ताम रक्त नाम लेररं।
महान थान छै अकाम मुक्ति ग्राम मगलं
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। १

नगन्न अंग सीस गंग धूत रंग धारणी।
अफीम भंग बीज चंग पान रंग पारणी।
मतंग चाल पे विराज साज ध्यान निस्चलं।।
नमो शिवाय सोमनाथ मो अनाथ को मिलं।। २ […]

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