‘आई’ लाधी गांगड़ी का न्याय
:::: ठा. नाहर सिंह जसोल द्वारा संकलित पुस्तक “चारणों री बातां” से ::::: माघ मास की धवल चांदनी में ‘वराणा’ नामक गांव के मां खोडियार के मंदिर के प्रांगण में चारणों का पूरा समुदाय इधर-उधर की बातों में मस्त है। उपलियाला गांव का लाभूदान चारण बीच में बैठा चुटकले, दोहे, छंद सुना रहा हैं। बातों ही बातों में लाधी गांगड़ी का प्रसंग आया तो किसी ने पूछाः ‘‘लाधी गांगड़ी तो खोडि़यार की भक्त थी ना!’’ ‘‘उनको तो लोग खोडि़यार की बड़ी बहन आवड़ स्वरूप मान के नमन करते थे, परन्तु वे खोडि़यार की परम उपासक थी।’’ चारणों की गांगड़ा शाखा […]
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