‘आई’ लाधी गांगड़ी का न्याय

:::: ठा. नाहर सिंह जसोल द्वारा संकलित पुस्तक “चारणों री बातां” से ::::: माघ मास की धवल चांदनी में ‘वराणा’ नामक गांव के मां खोडियार के मंदिर के प्रांगण में चारणों का पूरा समुदाय इधर-उधर की बातों में मस्त है। उपलियाला गांव का लाभूदान चारण बीच में बैठा चुटकले, दोहे, छंद सुना रहा हैं। बातों ही बातों में लाधी गांगड़ी का प्रसंग आया तो किसी ने पूछाः ‘‘लाधी गांगड़ी तो खोडि़यार की भक्त थी ना!’’ ‘‘उनको तो लोग खोडि़यार की बड़ी बहन आवड़ स्वरूप मान के नमन करते थे, परन्तु वे खोडि़यार की परम उपासक थी।’’ चारणों की गांगड़ा शाखा […]

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दो आखर – ठा. नाहरसिंह जसोल

ठा. नाहरसिंह जसोल द्वारा लिखित पुस्तक “चारणों री बातां” की भूमिका “दो आखर” चारणों सारूं आदरमांन, श्रद्धा, अटूट विश्वास रजपूत रै खून में है। जुगां जुगां सूं चारणों अर रजपूतां रै गाढ़ा काळलाई सनातन संबन्ध रया है। आंपणों इतिहास, आंपणी परम्परावां, रीत-रिवाज, डिंगल साहित्य अर जूनी ऊजळी मरजादां, इण बात रा साक्षी है। केतांन बरसां तक ओ सनातनी सम्बन्ध कायम रयौ। न्यारौईज ठरकौ हौ। पण धीरे धीरे समय पालटो खायौ अर उण सनातनी संबन्धों में कमी आण लागी। ऐक दूजा रै अठै आण-जाण कम व्हे गयो, अपणास में कमी अर खटास आय गई, ओळखांण निपट मिट गई। इण सब बातां […]

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महादेव स्तुति – महाकवि सूर्यमल्ल मीसण (वंश भास्कर)

जय जय महेस संकर जडाल, कन्दर्ब जलंधर त्रिपुर काल।
गंगाकिरीट जय जय गिरीस, अजएक महानट अखिल ईस।।
रचनाप्ररोह जय संभु रूद्र, सिव जय अनादी करुणासमुद्र।
दुरितादिदलन जय बामदेव, दिवपट जय परिजितकामदेव।।
जय गरलकंठ विभु गहन जोग, भव भर्ग्ग भीम जय त्यक्तभोग।
लय सर्ग चरित जय उर्द्धलिंग, प्रभु जय मित्रीकृत एक पिंग।।[…]

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ऐसा छोड़ने वाला नहीं मिलेगा

महाकवि सूर्यमल्ल मिश्रण जितने महान कवि थे उतना ही तेज उनका मिजाज था, झट से बिगड़ जाता था। राजकुमार भीमसिंह की बारात में बांसवाडा गए वहां बूंदी के आमात्य बोहरा रतनलाल की किसी बात पर नाराज़ हो गए और तुरंत वहां से प्रस्थान  का मन बनाया। राजा रामसिंह ने मना किया मगर रूठ कर रवाना हो गए। जब रास्ते में रतलाम के राजा बलवंत सिंह ने यह सुना कि सूर्यमल्ल लौट रहे हैं तो उन्होंने पांच मील की दूरी तक सामने आकर महाकवि की अगुवाई की। मीसण को पुरी मान मनोव्वल के साथ राजा रतलाम लाये और बड़े सत्कारपूर्वक अपने […]

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कविता की संजीवनी और राणा सांगा

वीर महाराणा सांगा (संग्राम सिंह) के झंडे के नीचे सारे राजस्थान के वीर बाबर से युद्ध करने के लिए जुटे थे। युद्ध के मैदान में पूरी वीरता से देर तक लड़ते लड़ते घायल राणाजी को अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मूर्छा आ गयी। राणा को अचेत अवस्था में देखकर उनका महावत सावधानी से राणाजी के हाथी को युद्ध क्षेत्र से भगा ले गया। होश आते ही राणाजी को अपनी हार का पता चला तो वे क्रोध में पागल से हो गए। हारने की व युद्ध क्षेत्र छोड़ने की लज्जा ने उनको पूरी तरह से तोड़ दिया। युद्ध में उनका एक हाथ […]

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चारणों की विभिन्न शाखाओं का संक्षिप्त परिचय

आढ़ा चारणों की बीस मूल शाखाओं  (बीसोतर) में “वाचा” शाखा में सांदु, महिया तथा “आढ़ा” सहित सत्रह प्रशाखाएं हैं। इसके अन्तर्गत ही आढ़ा गौत्र मानी जाती है। आढ़ा नामक गांव के नाम पर उक्त शाखा का नाम पड़ा जो कालान्तर में आढ़ा गौत्र में परिवर्तित हो गया। चारण समाज में महान ख्यातनाम कवियों में दुरसाजी आढ़ा का नाम मुख्य रूप से लिया जाता है। इनका जन्म 1535 ईस्वी में आढ़ा (असाड़ा) ग्राम जसोल मलानी (बाड़मेर) में हुआ। इनके पिता मेहाजी आढ़ा तथा दादा अमराजी आढ़ा थे। ये अपनी वीरता, योग्यता एवं कवित्व शक्ति के रूप में राजस्थान में विख्यात हुए। […]

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मनोज मिश्रण

नाम: मनोज मिश्रण पुत्र श्री रणजीत सिंह मिश्रण

स्थाई पता: गाँव-मोलकी, पोस्ट-अन्ता, जिला-बाराँ, राजस्थान

शिक्षा: कंप्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर (M.Sc. in Computer Science)
[DRDO Sponsored programme at DAVV, Indore][…]

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ठाकुर जोरावर सिंह बारहट

गौरवर्ण, उर्ध्व ललाट, दीर्घ नेत्र, मुखाकृति फैली हुई, भव्य दाढ़ी सब मिलाकर ठाकुर जोरावर सिंह बारहट का व्यक्तित्व बड़ा आकर्षक था। इनका जन्म १२ सितम्बर १८८३ को इनके पैत्रक गाँव देवखेडा (शाहपुरा) में हुआ था। देशप्रेम, साहस और शौर्य उन्हें वंश परंपरा के रूप में प्राप्त हुआ था। जोधपुर में प्रसिद्ध क्रन्तिकारी भाई बालमुकुन्द से (जिन्हें दिल्ली षड़यंत्र अभियोग में फांसी हुई थी) जो राजकुमारों के शिक्षक थे, उनका संपर्क हुआ। राजकीय सेवा का वैभव पूर्ण जीवन उन्हें क्रांति दल में सम्मिलित होने से नहीं रोक सका। निमाज़ (आरा) के महंत की राजनैतिक हत्याओं में वे सम्मिलित थे, परन्तु वे फरार […]

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शहीद प्रताप सिंह बारहट

कुँवर प्रतापसिंह बारठ भारतीय इतिहास गगन-पटल पर चमकने वाला एक ऐसा उज्ज्वल नक्षत्र है, जिसने अपने कर्म से न सिर्फ अपने परिवार को, न सिर्फ अपने समाज और जाति को, न केवल राजस्थान को बल्कि पूरे भारत-वर्ष को गौरवान्वित किया था। देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्राणों की आहुती देने वाले अमर शहीद कुंवर प्रताप सिंह का जन्म पिता क्रांतिकारी बारठ केशरीसिंहजी के घर माता माणक कुँवर की उज्ज्वल कोख से वि.सं.1950 ज्येष्ठ शुक्ला नवमी तदनुसार दि. 24 मई 1893 को उदयपुर में हुआ। उनकी शिक्षा दयानंद स्कूल जैन बोर्डिंग में हुई थी। अल्पायु में पिताश्री ने बालक प्रताप […]

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ठाकुर कृष्ण सिंह बारहट

ठाकुर कृष्ण सिंह बारहट का जन्म सन 1849 में शाहपुरा में हुआ था। राजस्थान में अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की अलख जगाने वाले तथा अपनी तीन पीढ़ियों को क्रांतियज्ञ में आहूत करने वाले स्वनाम धन्य ठाकुर केसरी सिंह बारहट व जोरावर सिंह बारहट इनके सुपुत्र थे। ठाकुर कृष्णसिंह बारहट विरचित पुस्तक “चारण-कुल-प्रकाश” का संपादन इनकी प्रपोत्री श्रीमती राजलक्ष्मी देवी “साधना” जी ने किया है जिसमे अपने सम्पादकीय में उन्होंने अपने प्रपितामह के बारे में निम्न वर्णन किया है जो उन्ही के शब्दों में प्रस्तुत है। “मेरे प्रपितामह श्री कृष्णसिंहजी बारहठ, अर्ध-स्वतंत्र राज्य शाहपुरा के प्रतोली-पात्र (पोळपात), उच्च-कोटि के इतिहासकार, कवि […]

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