बांका पग बाई पद्मा रा
राजस्थान में एक कहावत है “बांका पग बाई पद्मा रा” अर्थात यदि आपको किसी बात पर किसी व्यक्ति पर पूरा शक है कि ये गलती इसी की है तो कह दिया जाता “बांका पग बाई पद्मा रा” अर्थात कसूर तो इसका ही है। संदर्भ कथा – आज से कोई चार सौ वर्ष पहले मारवाड़ राज्य के एक गांव में मालाजी सांदू नाम के एक बारहठ जी रहते थे उनके एक पद्मा नाम की बहन थी। राजस्थान में चारण जाति के लोग हमेशा से बहुत बढ़िया कवि रहे है। पद्मा भी बहुत अच्छी कविताएँ कहने में माहिर थी एक अच्छी कवियत्री होने […]
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