सरस्वती वंदना – कवि जगमाल सिंह “ज्वाला” सुरतांणिया कृत
गीत जांगड़ो
शुभ्र वस्त्र वीण साज शुशोभित,बाई हंस बिराजे।
झनहण वीण ज तार झणंकत,राजीव उपर राजे।1।
वेद विरंचि खरेखर विमला,पुष्प शब्द प्रकाशे।
जाय बिराजे रसना जां के,उर जन होय उजासे।2।
धवल गात अरु सो पट धवला’धवल दंत मुख धारे।
धवल हंस शोभे धणियाणी,सेवक सोय सुधारे।3। […]