गज़ल की गज़ल

सन्नाटे को चीर गज़ल।
बन जाती शमशीर गज़ल॥1
शायर ने क्या खुब सजाया,
लगती जैसे हीर गज़ल॥2
जन जन के मन की जाने है,
संवेदन की पीर गज़ल॥3
नटखट कवि कान्हा को मिलने,
राधा बनी अधीर गज़ल॥4
चित में बस छाई फगुनाई,
छिडकै सदा अबीर गज़ल।5[…]

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लाली

🌺गुजराती के वरिष्ठ कवि आदरणीय संजु भाई वाल़ा की (दोहा ग़ज़ल) कविता का राजस्थानी भावानुवाद🌺

लाली मेरे लाल की, जित देखूं तित लाल।
नभ रे नेवां सू वहै, अनहद वसु पर व्हाल।।१
तल़ में रमती वीजल़ी, प्रगटेला अब हाल।
मूट्ठी में पकडे शिखा, खेंच’र काढूं खाल।।२
छानां छपनां डोकिया, घट सूं काढे व्याल।
ओल़ख जिण मुसकल घणी, ओल़खतां मन न्याल।।३
ऐ केडा दिन थें दिया, करूं कठे फरियाद।
घणा हलाडूं हाथ पण, बजै नहीं करताल।।४[…]

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કહું વાત કાન માં!

આવો જરાક આમ કહું વાત કાન માં!
અથ થી ઇતિ તમામ કહું વાત કાન માં!
ઉચ્ચૈશ્રવા ઉમંગ ના જે હણહણી રહ્યા,
તેને કરો લગામ કહું વાત કાન માં!
બાજુ ના ઘર માં કઇક તો નક્કી થયું જ છે,
ખખડી રહ્યાં છે ઠામ કહું વાત કાન માં!
સાવજ બની ને રોજ જે ડણકે છે ગર્વ થી,
તે ઘરમાં છે ગુલામ કહું વાત કાન માં![…]

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ग़ज़ल: बेलियों नें गाल़ दूं

धूड पर जाजम धरो री ढाल़ दूं।
बैठ बेली! दीप-तारक बाल़ दूं।।१
चांदणौ चमचम झरे है आभ सूं,
आव पुरसै हेत रौ रस थाल़ दूं।।२
बेलियों रे थाल़ भोजन लापसी,
वाडकी भर घी जिकण पर वाल़ दूं।३
घोडलां नें नाज पाणी खूब द्यूं,
सांढण्यां रे बांध घूंघरमाल़ दूं।४[…]

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अंतस रा आखर

बात उण टेम री है जद म्हारी बाई (माताजी) आज सूं डेढ साल प्हैली अजुवाळी चवदस रा देशणोक म्हारै नानाणां सूं आप रा दूजा संगी साथी अर संबंधियों रे साथै देशणोक दरसण करवा रवाना हुवी। उण टेम म्है एक दूहौ मन में बणायौ के

ओरण माणस ऊमड्या, फेरी देवा काज।
आयी चवदस आपरी, मेहाई महराज।।

औ दूहौ बणियौ जद म्है औ सोचियौ के इण तरे रा चौथा चरण वाळा दोहा आज तांई किणी नी बणाया है। अर मौलिक चरण री वजह सूं अगर कोशिश करी जाय तो नामी फूटरा दूहा बण सके। इण रे बाद मां भगवती मेहाई री किरपा सूं एक पछै एक दुहा बणता गिया। म्है ऐ दुहा म्हारा सोसियल मिडिया रा ग्रुप “डिंगळ री डणकार” अर “थार थळी” मैं लगातार एक पछै एक पोस्ट करतौ रियौ।[…]

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ग़ज़ल: नुवे बरस री जै माताजी

पंडित!, फादर!, ग्यानी!, काज़ी!,
नुवे बरस री जै माताजी!१
रहो जीतता सदा बेलियाँ,
जीवन री चौसर री बाजी!!२
रेय आप रे खुशी खेलती,
करे कृपा घर करनल माजी!!३[…]

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बोल रबारी ! जै बाबा री

🍀ग़ज़ल🍀
मतकर ज्यादा थारी मारी,
बोल रबारी! जै बाबारी!
बाट बेव बस ह्वै अलगारी,
बोल रबारी! जै बाबारी!१

छाल़्यां थूं संभाल़ बावल़ा,
औ थारौ अणमोल खजानो,
हवल़ै. जा देतौ टीचकारी,
बोल रबारी जै बाबा री!२[…]

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चरागों का जब बोलबाला रहेगा

🌺गज़ल🌺
चरागों का जब बोलबाला रहेगा।
सियह रात में भी उजाला रहेगा।।१

भरा हो,छलकता,अधूरा कि खाली,
नजर में सभी की वो प्याला रहेगा।२

भले आप धोलें उसे चांदनी में,
अँधेरा है काला तो काला रहेगा।।३[…]

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बहुत मुमकिन गुलों पर वार होगा!

🌺गज़ल🌺
बहुत मुमकिन गुलों पर वार होगा!
अगर उस शाख पर ना खार होगा!१

भरोसा ना-खुदा पर जो करे है,
उसी को डूबना मँझधार होगा!२

सफर को खूबसूरत मोड देने,
हुआ रूखसत वो आखिरकार होगा!३[…]

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