याकूब आमीर के तरही मिसरे पर गज़ल

आप से रोशन हुई राहें सभी चारों तरफ।
अब न भटकेगी मिरी आवारगी चारों तरफ॥
चांद, तारों, बादलों, फूलों, बहारों में जरा,
ढूंढले बिखरी पडी है शायरी चारों तरफ॥
कौन यह आया कि सहरां भी गुलिस्तां हो गया,
जिसकी आहट नें करी जादूगरी चारों तरफ॥[…]

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welcome -2000

साहिर लुधियानवी मेरे पसंदीदा शायर है। उनकी एक रचना की एक पंक्ति को आधार बनाकर मैंने भी एक नज्म लिखी थी। welcome 2000 इक्कीसवी सदी के स्वागत हेतु। साहिर की पंक्ति थी – “आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वासते” उस पंक्ति के बाद की कल्पना मेरी है।

🌺welcome -2000🌺

आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वासते,
क्योंकि हमारा कल ही आने वाला आज है।
हर आने वाला लमहा जो सपनों में पला हो,
ऐसे हसींन पल का निराला अंदाज है।
आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वासते।[…]

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हिंगल़ाज वंदना

🍀नाराच छंद🍀
शिवा! अनूपमेय! शक्ति! सांभवी! मनोहरी! ।
त्रिशूलिनी! भुजंग-कंकणा! , त्रिलोकसुंदरी।
सुभव्यभाल, केश-व्याल, माल -लाल, कंजनी।
भजामि मात हिंगल़ाज भक्त भीड भंजणी।।१।।
ध्वनि मृदंग ध्रंग ध्रंग चारू चंग बज्जही।
झमाल झांझ, औ पखाज, वेणु वाजती मही।
डमाल डाक डं डमाक राग तान रंजणी
भजामि मात हिंगल़ाज भक्त भीड भंजणी।।२[…]

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भद्रकालिका नाराचवृत्त स्तवनम्

🌺भद्रकालिका स्तवन🌺
।।नाराच वृत्तम्।।
संस्कृत
शवासनी स्मशानवासिनी शिवे, दयानिधे।
अघोरघोर गर्जनी, रता मदे दिगंबरी।
विशाल-व्याल केशिनी, प्रपूजिता मुनिश्वरैः।
महाकपालि! मुण्डमालि! भद्रकालिकां भजे।।१[…]

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महा पदारथ लाधो संतो! – गज़ल

महा पदारथ लाधो संतो!
अलख-ब्रह्म आराधो संतो!
मूरख पढ पढ बणिया ग्यानी,
दो आखर इक आधो संतो!
भाव-नगर, री पोल़ पूगिया,
क्यूं नीं तोरण-वांदो संतो?
सबद भाव हांडी धर चूल्है,
मन तांदल़जो रांधो संतो!
सबद-अमर इण जग सोनलिया,[…]

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ओल़्यू

बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारै देस!
ओल़्यू थांरी आवे म्हानैं रे छोडो परदेस!!

बागां में कोयल बोले रे, भँवरा भटकेह!
पण थां बिन पुरी प्रथमी रे, खाविंद खटकेह!!
एकर अरजी म्हानौ मारी रे छोडो परदेस रे थें छोडो परदेस!
बालमजी नें जाय कहिजो रे आवो म्हारे देस![…]

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ચોગરદમ ફૈલ્યુ અજવાળું – ગઝલ

ચોગરદમ ફૈલ્યુ અજવાળું

મન ના ઘર માં આજે માળુ!
ચોગરદમ ફૈલ્યુ અજવાળુ!
દીપ જલાવી કોણ ભગાડે,
અંધારું આ ભમ્મર કાળુ!
એ જ કાશ મળવા આવ્યા છે,
લાવ ઢોલિયો અંદર ઢાળુ!
સખી!સહજ શણગાર કરી લઉ,
આપ પટોળા ,મલમલ, સાળું![…]

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रामदेव पीर आवाहन

🌺रामादेव पीर आह्वान🌺

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

वीरमदे सुगणा रा वीरा, अजमल सुत अवतारी!
मेणादे रा लाल लाडला, नेतल तो घर नारी! १

रामा! बाट निहारूं थांरी।
आवो बेगा अलख धणी, हे लीले रा असवारी!

सिर धर सुंदर पाग सुरंगी, पीतांबर तन धारी!
जरकसी जामा प्हैरै ठाकर, अलख पुरूष अलगारी! २[…]

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आज उडाए बाज

व्यर्थ न अब बैठे रहो,बनकर यारों बुद्ध।
सुख शांति सौहार्द को, यवन करे अवरूद्ध।।१
अमन चैन की बात कर, चलते चाल विरूद्ध।
उनको देने दंड अब, करें न क्यों हम युद्ध।।२
हाथों में गांडीव धर,अर्जुन है तैयार।
आज कृष्ण पर मौन क्यों,महा समर को यार।।३

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સૂરજ ઝાકળ માં ઝડપાયો!

સૂરજ ઝાકળ માં ઝડપાયો!
રહ્યો ભાગતો કિંતુ બિચારો પરોઢિયે પકડાયો!

લાલ લ્હેરિયુ ઊષા લાડી નું ખેચ્યુતું ગઇ કાલે!
ને તમ તમતા મરચાં જેવા ભર્યા ચુંબનો ગાલે!
બિચારી ને પ્રેમ પિયાલો ‘ના’કહેતાં પણ પાયો![…]

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