ચકા રાણા -ચકી રાણી

અરે!બચપણ મહી મેં સાભળી તી એમની ક્હાણી;ચકા રાણા-ચકી રાણી!
ચકો થોડો હતો બુધ્ધુ ચકી થોડી હતી શાણી,ચકા રાણા-ચકી રાણી!
અને એ બેય મળતાં તા સતત આબા તણી ડાળે ;તા વાતો પ્રેમ ની કરતાં,
ચકી સંબોધતી “રાજા”ચકો સંબોધતો “રાણી”;ચકા રાણા-ચકી રાણી![…]

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દર્પણ

દર્પણ ગોરી ને અવલોકે!
શકે ન સ્પર્શી એ દુઃખ માં એ રડતુ પોકે પોકે!

ગોરી ના ગોરા ગાલો ને એય ચુમવા ચાહે રે!
અવઘિ દિવાલે અટવાયેલુ જલે વિરહ ના દાહે રે!
કરે વિનવણી સૌને ક્ષણ ભર તો મળવા દેશો કે!
દર્પણ ગોરી ને અવલોકે!
શકે ન સ્પર્શી એ દુઃખ માં એ રડતુ પોકે પોકે![…]

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Hello! હું તમને યાદ કરું છું! – ગઝલ

Hello! હું તમને યાદ કરું છું!
યાદ કરું છું!સાદ કરું છું!
છપ્પન ત્રણસો અડતાલીસ પર,
ક્ષણે ક્ષણે સંવાદ કરું છું!
Hello!કેમ છો?કુશળ ક્ષેમ છો!,
પ્રશ્નો નો વરસાદ કરું છું!
Hello ! તમારું નામ લઇ હું,
નિશદિન અંતરનાદ કરું છું![…]

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कागद़ लिखदूं थानें साई!

कागद़ लिखदूं थानें साई!
मन रा आखर भाव मांडदूं, कलम नेह रसनाई!

बालम!साजण!पीव!छबीला!छैला!कुंवर कन्हाई!
रसिया!मन बसिया!,नट-नागर!कहूं आप नें कांई!1

अठै आप बिन दाय न आवै, मन री कही न जाई!
बाटूं बिरह व्यथा जो ब्रज में, हँससी लोग लुगाई!2[…]

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हंसा इती उतावल़ कांई

प्रमुख स्वामी महाराज को शब्दांजली

हंसा! इती उतावल़ कांई।
बैठौ सतसंग करां दुय घडी, लेजो पछै विदाई।
उडता उडता थकिया व्होला, राजहंस सुखदाई।
जाजम ढाली नेह नगर में, माणों राज! मिताई।।१
मोती मुकता चरो भजन रा, मनोसरोवर मांई
पांख पसारे, बैठो पाल़े, तोडो मत अपणाई।२[…]

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म्हूं तो मन माने ज्यूं राचूं

म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।
कदे वेदना हँस हँस गाऊ, कदे खुशी में रोऊं।
मनोभाव मणिमुकता माल़ा, जोडूं तोडूं प्रोऊं।
लडियां कडियां आँच अनुभव, कर कर कुंदन जांचूं।
म्हूं तो मन मानें ज्यूं राचूं।
साँवरियो बण कागद लिख द्यूं, मीरां ह्वै फिर बांचूं।[…]

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संतो! वरे भाव री हेली!

संतो! वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यों मनडो भींज्यों, हरी हुई हिव वेली!
खल़कै खाल़ा, वहता व्हाल़ा, भरिया नद सरवरिया!
कोई उलीचै भर भर खोबा, डूबाणा केई तरिया!
बडी बडी झड़ लगी जोर री, नेवै धरो तपेली!
संतो वरे भाव री हेली!
तनडो भींज्यो मनडो भीज्यो हरी हुई हिव वेली![…]

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कविता की ताकत

मोरबी जहाँ से मैने इंजनीयरिंग करी थी उस पर बनाई हुई रचना । इस रचना के पीछे एक कहानी जुडी हुई है मेरा चार साल का इंजनीयरिंग छह साल तक लंबा हो गया और उस पर सेवन्थ सेमेस्टर में मेरे ए टी के.टी एक सबजेक्ट में आई। जिसकी वजह से एट्थ सेमेस्टर के बाद भी मुझे एक महिना और रुकना पडा। जब फेयरवेल के फंक्शन में मुझे किसी ने पूछा कि मोरबी के बारे में आपका क्या खयाल है तो यह रचना उसके जवाब में मैंने सुनाई यह कहकर कि हालात बदल जाते है तो खयालात अपने आप बदल जाते है। […]

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कासा थामें चला कलंदर

कासा थामे चला कलंदर!
चौखट गाँव गली दर घर घर!
सहरा, जंगल, परबत, बस्ती,
गाहे गाहे मंज़र मंज़र!
बाहर बाहर दिखै भिखारी,
भीतर भीतर शाह सिकंदर!
रेत कौडियाँ गौहर मछली
अपने भीतर लिए समंदर![…]

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म्हूं सबद-ब्रहम रो चेलो

म्हूं सबद -ब्रह्म रो चेलो!
सबद रीझतौ, सबद खीझतौ, मिल्यौ गुरू अलबेलो!
सबद नाथ रे कुम कुम चोखा, धरूं भाव रस भरिया,
सबद अमीणी राधा मीरां, सबद सखी साँवरिया,
नवधा भगति करूं आप री, सुणो सबदजी हेलो!
म्हूं सबद ब्रह्म रो चेलो![…]

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