भ्रमरावली – वंश भास्कर
करकि करकि कोप तरकि तरकि तोप,
लरकि लरकि लोप करन लगी।
करखि करखि कत्ति परखि परखि पत्ति,
हरखि हरखि सत्ति हरन लगी।
समर लखन आय अमर गगन छाय,
भ्रमर सुमन भाय निकर जुरे।
सरजि सरजि सोक लरजि लरजि लोक,
बरजि बरजि ओक दिगन दुरे।।1।। […]