भ्रमरावली – वंश भास्कर

करकि करकि कोप तरकि तरकि तोप,
लरकि लरकि लोप करन लगी।
करखि करखि कत्ति परखि परखि पत्ति,
हरखि हरखि सत्ति हरन लगी।
समर लखन आय अमर गगन छाय,
भ्रमर सुमन भाय निकर जुरे।
सरजि सरजि सोक लरजि लरजि लोक,
बरजि बरजि ओक दिगन दुरे।।1।। […]

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महाकवि हिंगलाज दान कविया

हिंगलाज दान कविया सेवापुरा के रामप्रताप जी कविया के दो पुत्रो में ज्येष्ठ थे। उनका जन्म माघ शुक्ला १३ शनिवार सम्वत १९२४ को सेवापुरा में हुआ था। तब उनके दादा नाहर जी कविया विद्यमान थे और उन्ही से इन्होने अपनी आरंभिक शिक्षा पाई। जब वे साढ़े तीन वर्ष के थे तो पिता बारहठ रामप्रताप कविया ने उन्हें बांडी नदी के बहते हुए जल में खड़ा करके जिव्हा पर सरस्वती मन्त्र लिख दिया था। बांडी सेवापुरा के पास हो कर ही बहती है और इस में बरसात में ही पानी आता है। बहता पानी निर्मल गंगा की तरह ही पावन माना जाता है। बांडी नदी के प्रवाह के प्रति भावना व आस्था के साथ पिता ने जो मन्त्र दिया, उसने अपना चमत्कारिक प्रभाव दिखाया। पांच वर्ष की अल्पायु में ही हिंगलाज दान की कवित्व-शक्ति प्रस्फुटित हो गयी और अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति तथा वंशानुगत संस्कारों के फलस्वरूप वे डिंगल के सर्वश्रेष्ठ महाकवि के रूप में प्रतिष्ठित और मान्य हुए।[…]

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લાગો મને નટવરથી નેડો…

લાગો મને નટવરથી નેડો…

લાગો મારે નટવરથી નેડો,
કે હવે મેં તો શિર નાખ્યો છેડો રે; -ટેક

કે સહુ મળી ને મુજને વારી,
કે અટકી મન વૃતિ મારી,
કે ધણી મેં તો ધાર્યા ગિરિધારી રે,-લાગો

કે શું મતલબ મારે કોઇ સાથે,
કે મહેણું મારે મોહન નું માથે,
કે હરિવરે મુંને ઝાલી હાથે રે, -લાગો

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आउवा सत्याग्रह – वंश भास्कर

उमामूर्ति थप्पी सु पूजि अब, सप्तम दिन बित्तत जिम्मे सब।
अंबा की प्रतिमा के अग्गैं, ज्वलन हविस्य धूप जहं जग्गैं।।
बाद्य पटह दुन्दुभि मुख बग्गैं, लक्खन बिध पद्यन नुति लग्गैं।
भीरु सुनत सिंधुन स्वर भग्गैं, मरुप उदय पीठहु डगमग्गैं।।
अस्त्रन मैं हु उमा आवाहन, करिकरि कढ्ढि जजन लग्गे जन।
बैठैं सबन निसा सु बिहाई, इम इच्छित बेला ढिग आई।।
अर्धउदित रवि जानि तजन असु, सिवगृह सिर थप्प्यो गोविन्द सु।
खिल रहि मैं न लखो इतनों खय, इम गल छेदि गिर्यो सु इनोदय।।
पिक्खि गिरत गोबिंदहि दृढपन, तित तित मरन लगे जाचक जन।
वह खाटिक दुल्लह बिच आयो, बप्प तनय जुग मरन बतायो।।

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🌹गणितिक प्रहेलिका काव्य🌹

समंदर में २८ नाविक एक जहाज में थे| जहाज जब डूबने लगा तो नाविक कहने लगे की इस जहाज में से अगर चौदह आदमी कम होंगे तभी नाव किनारे तक पहुँचेगी वरना सारे डूब जाएगे| तो जो चौदह हब्शी (अश्वेत) नाविक थे वे श्वेत नाविक लोगों को बलात बाहर फेंकने लगे तो एक चतुर श्वेत अंग्रेज को युक्ति सुझी और उसनें सबको समझाया कि कृपया झगडे नहीं| उसने सबको कहा कि हम सब २८ लोग एक वर्तुल बनाकर बैठते है फिर मैं गिनती करके नौ(९) नंबर तक गिनुंगा| जिसका गिनती में नवां नंबर आएगा उस को समंदर में फैक देंगे| इस तरह एक से लगाकर नौ तक की गिनती हम चौदह बार करेंगै| श्वेत अंग्रेज की इस बात के छलावे में सारे निग्रो(अश्वेत) लोग आ गए, और गिनती में जिसका नंबर ९ आए उसने समंदर में कूदना पडेगा इस बात को कुबूल कर लिया|

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माया पंचक

कोउ करत उपवास, कोउ अन खात अलूणा|
कोउ खात फल कंद, कोउ बोलत कोउ मूना|
कोउ ठाडे तप करत, कोउ ऊंधै सिर झूलत|
मन क्रत कूं सत मान, मोख मारग से भूलत|
वासना ह्रदय त्यागे बिना, विफल करत बनवास है|
कहै ब्रह्ममुनि हरि प्रगट बिन, सब माया के दास है||१ […]

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नरनारायण देव स्तुति

🌸छंद त्रिभंगी🌸
जय नाथ निरंजन,भव दुख भंजन,जन मन रंजन,जग त्राता|
जय काम निकंदन,वर सुर वंदन,धर्म सुनंदन,दो भ्राता|
जय महितल मंडन,खल बल खंडन,विषय विखंडन,बनवासी|
जय स्हायक संतन,काल निक्रंतन,आद न अंतन ,अविनासी||१ […]

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જગતમાં એક જ જન્મ્યો રે…..

જગતમાં એક જ જન્મ્યો રે…..

જગતમાં એક જ જન્મ્યો રે જેણે રામને ઋણી રાખ્યાં

રામને ચોપડે થાપણ કેરા ભંડાર ભરીને રાખ્યાં
ન કરી કદીએ ઉઘરાણી તેમ સામા ચોપડા ન રાખ્યાં
જગતમાં એક જ જન્મ્યો રે જેણે રામને ઋણી રાખ્યાં

માગણા કેરા વેણ હરખથી કોઈને મોઢે ન ભાખ્યાં
રામકૃપાના સુખ સંસારી સ્વાદભર્યાં નવ ચાખ્યાં
જગતમાં એક જ જન્મ્યો રે જેણે રામને ઋણી રાખ્યાં […]

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गीत – हंसावळो – इशरदासजी कृत

परथम अजर अमर अपरमरा
जररा जरण भगतरा जोर
नररा नंग नागरा नाथण
नमो निगमरा अणगम नोर

खळरा दळण लंकरा खेधण
कळरा अकळ कंसरा काळ
गिरिरा धरण मोहरा गाळण
प्रमरा अप्रम प्रजारा पाळ […]

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🌹श्री ध्यान चिंतामणि घनश्यामाष्टक🌹

देखत बड भाग लाग, पोत सरस नवल पाग,
अंतर अनुराग जाग, छबि अथाग भारी।
अति विशाल तिलक भाल, निरखत जन हो निहाल,
उन्नत त्रय रेख जाल, काल व्याल हारी।
विलसत भुँह श्याम वंक, चिंतत उर जात शंक,
मृग मद भर बीच पंक, अंक भ्रमर ग्यानी।
जय जय घनश्याम श्याम, अंबुज द्रग क्रत उदाम,
सुंदर सुखधाम नाम, साँवरे गुमानी॥१

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