મછરાળી મોગલ ગાંડી થઈ ડણકી ને ડુંગર ગાળીયે

માડી તારા નવ નગર ને નવ નેહડા,માડી તારી નજરૂ ફરે છે નવખંડમાથે રે
મછરાળી મોગલ ગાંડી થઈ ડણકી ને ડુંગર ગાળીયે…(1)
માડી, તે કાળા રે સરપુંનેકીધો કોરડો,માડી, એ તો વખડાં વમને ને ફણીધરફુફે રે,
મછરાળી મોગલ….ગાંડી થઈ ડણકી ને ડુંગર ગાળીયે…(2)
માડી, તારા કોરડે હાલે છે વ્યોમે વાવડો,માડી, તેંતો કોરડે દૈત્યું ને દંડતે દીધા રે,
મછરાળી મોગલ…ગાંડી થઈ ડણકી ને ડુંગર ગાળીયે…(3)
માડી, તારા સીમાડા લોપ્યા નેઅંગડા માગીયા,માડી, તેં તો ભેળીઓ ઉતારી જોનેબાંધી ભેટે રે, […]

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छंद शेखर रासाष्टक चंचरीक(चर्चरी)छंद

।।छंग – चर्चरी / चंचरीक।।

इक निशि ससि अति उजास, प्रौढ शरद रूतु प्रकास,
रमन रास जग निवास, चित विलास कीन्है।
मुरली धुन अति रसाल, गहरे सुर कर गुपाल,
तान मान सुभग ताल, मन मराल लिन्है।
ब्रह्मतिय सुन भर उछाव, बन ठन तन अति बनाव,
चितवत गत नृत उछाव, हाव भाव साचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।१[…]

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छंद शेखर श्री रासाष्टक रेणकी छंद

🌸छंद रेणंकी🌸
सर सर पर सधर अनर तर अनुसर,कर कर वर घर मेल करे|
हरि हर सुर अवर अछर अति मनहर,भर भर अति उर हरख भरे|
निरखत नर प्रवर प्रवर गण निरजर,निकट मुकुट सिर सवर नमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| १

झणणणण झणण खणण पद झांझर,गोम धणण गणणण गयणे|
तणणण बज तंत ठणण टंकारव,रणणण सुर धणणण रयणे|
त्रह त्रह अति त्रणण घणण अति त्रांसा,भ्रमण भमरवत रमण भमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| २ […]

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सूर्यमल्ल जी मीसण रा मरसिया – रामनाथ जी कविया

मिल़तां काशी माँह, कवि पिंडत शोभा करी।
चरचा देवां चाह, सुरग बुलायौ सूजडौ।।१।।

निज छलती गुण नाव, मीसण छौ खेवट मुदै।
अब के हलण उपाव, सुकवी भरतां सूजडौ।।२।।

करता ग्रब कविराज, मीसण नित थारौ मनां।
सुरसत दुचित समाज, सुकवी मरतां सूजडौ।।३।।[…]

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दशावतार रूप स्वामी सहजानंद स्तुति

छंद रोमकंद
प्रथमं धर रूप अनूप प्रथी पर, कायम मच्छ स्वयं छकला|
जळ लोध करै महा जोध पति जग, कारण सोहि लई कमला|
शिर छेद संखासुर वेद लिये सब मेटण खेद विरंचि मही|
अति आणंद कंद मुनिंद अराधत, सो सहजानंद रूप सही||१

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श्री हरि काव्याष्टक

छंद त्रिभंगी
सुंदर छबि प्यारी, त्रिभुवन न्यारी, अनँत अपारी, उपकारी|
अगणित नरनारी, शरण उगारी, भव दुखवारी, ऊतारी|
सिखवत बुधि सारी, विषय बिसारी, रटत उचारी, त्रिपुरारी|
जय हरि वृतधारी, जन दुःख हारी, अतिसुखकारी, अवतारी||१

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हिंद की राजपुतानीया – कवि दुला भाया “काग”

रंगम्हेल मे बानियां बो’त रहे,
एक बोल सुने नही बानियां का,
दरबार मे गुनिका नाच नचे,
नही तान देखे गुनकानियां का,
नरनार प्रजा मिली पांव नमे,
नही पांव पेसाराय ठानियां का,
जग जिनका जीवन पाठ पढे,
सोई जीवन राजपुतानियां का…..(1)

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કામપ્રજાળણ નાચ કરે

એક દિવસ આનંદ ધર, હર હરદમ હરખાય;
કરન નાચ તાંડવ કજુ, બહુ બિધી કેફ બનાય.
ઘટ હદ બિજ્યા ઘૂંટી કે, આરોગે અવિનાશ;
લહર કેફ અનહદ લગી,પૂરણ નૃત્ય પ્રકાશ.
લિય સમાજ સબ સંગમે, ત્રયલોચન તતકાળ;
કાળરૂપ ભૈરવ કઠિન, દિયે તાળ વિકરાળ.
ઘોરરૂપ ઘટઘટ ભ્રમણ, ઊતયા-રમણ અકાલ;
કારણ જીવકો આક્રમણ, દમન-દૈત દ્દગ-ભાલ.
લખ ભૈરવ ગણ સંગ લિય, ડાકિની સાકિની ડાર; […]

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सदगुरू का बंदा ब्रह्मानंदा

🌸छंद त्रिभंगी🌸
भट वेद पठंदा,संध्या वंदा,कर्मन फंदा,उर्झंदा|
ओंकार जपंदा,मौन रहंदा,अंतर मंदा,मुर्झंदा|
पुनि कथा कहंदा,लोग ठगंदा,विकल फिरंदा,वर्तंदा|
सदगुरु का बंदा,ब्रह्मानंदा,साँच कहंदा, सब हंदा|| १ […]

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🌹श्रीब्रह्मानंदमंगलस्तवनम्🌹- श्री कृष्णवल्लभाचार्य कृत

शार्दूलविक्रीडीतवृत्तम्
य: षड्भावविवर्जिताङक्षरपदस्थानादिमुक्त:स्वयं|
स्वेष्टाङ्ज्ञावशवर्तनाङप्तनृजनि सच्चारणज्ञातिक:|
सिद्धार्थ:सुरकोटिगो मतिमतां मूर्धन्य ईष्टव्रती|
आजीवाङदृतनैष्ठिको विजयते श्रीलाडुसंज्ञ:कवि:||१

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