छप्पय

।।छप्पय।।
सब सेणां रै साथ, प्रात उठ दरसण पाऊं।
मात चरण में माथ, नेम सूं नित्त नमाऊं।
सुरसत देवै सुमत, कुमत मेटै किनियाणी।
जुगती सबदां जोड़, उरां उकती उपजाणी।
जगदम्ब कृपा रै जबर बल, पंगु पहाड़ां पूगियो।
कर जोड़ नमन गजराज कर, आज भाण भल ऊगियो।[…]

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सुकवी गजदान सुणावै रे

सब सज्जनां मन होय सौराई, दुष्ट दौराई दूरै।
भेळप-संप रखै सब भाई, प्रेम भलाई पूरै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 01।।

हर घर माँहीं हेत-हथायाँ, कुटिल मितायाँ कड़खै।
अणहद माण मिलै घर आयाँ, रंच न जायां रड़कै।
(तो) सुकवी गजदान सुणावै रे, चित चारण वो दिन चावै।। 02।।[…]

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नमो जुड़दै नाम

सुण मोदी सरकार, सुणो तो दरद सुणावां।
मुलक आजादी मांय, क्यूं न आजाद कहावां।
रहां भोम रजथान, मान-मरजाद न मोड़़ां।
हरदम रह हद मांय, जस्स रा आखर जोड़ां।।
मदद कर्यां गुण मानस्यां, अदद अेक अरदास है।
गजराज कहै मोदी गुणो, (म्हानैं) थांसूं अणहद आस है।। 01।।[…]

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भोर भई अब जाग जीव तू

भोर भई अब जाग जीव तू, आदीतो अम्बर आयो।
अरुण-किरण उठ आभै आई, हर पंछी मन हरसायो।।
चहकत द्वार चारु चिड़कलियां, कलियां चटकत सुख चायो।
गलियां महकत गुल-सोरम सूं, अलिसुत रलियां हित आयो।।
हिमकर उतर तजी असवारी, हिरणी रो मन हरसायो।
दधिसुत खिलत छूटियो अलिसुत, कौमुदसुत मन कुमलायो।।
नव किसलय निरखत सुख निपजै, दरखत-दरखत सरसायो।
सीतल-मन्द-सुगंध समीरण, घर-घर बांटन को आयो।।[…]

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रीत-नीत तज राड़ करै

रीत-नीत तज राड़ करै,
बाखळ में ऊभ बोबाड़ करै,
परिवार दुखी वां पूतां सूं,
कुळ नै रिगदोळ कबाड़ करै।
सावळ कावळ रो भान नहीं,
कुळ गौरव रो अभिमान नहीं,
लालच रै लपकां लाग्योड़ा,
ऐ गिणै कोई अहसान नहीं।[…]

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चिरजा: बिड़द रख बीसहथी वरदाई

बिड़द रख बीसहथी वरदाई,सेवग दुख हर लीजे सुरराई।

खल को खंडन कर खलखंडनि, मेछां उधम मचाई।
संतन के मन गहरो सांसो, पुनि-पुनि-पुनि पछताई।।1।।

खल संग निर्मल होय सफल कब, अंत मिलत अफलाई।
दुष्ट दलन कर हे दाढाळी, एक आसरो आई।।2।।[…]

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मन मान्यै री बात

मन री सत्ता घणी मजबूत है। मन री गति अपार। बिना सवारी मन तीनूं लोकां री जात्रा करतो आनंद री ल्हरां लेवै। मन री सत्ता सूं संत अर फकीर ई घबरावै। ओ ई कारण है कै कबीर जियांकलै फक्कड आदमी नैं ई मन नैं नियंत्रण में राखण सारू कलम चलावणी पड़ी। कबीर री रचनावां मांय ‘मन को अंग’ नाम सूं मोकळी साखी लिखीजी है।

मन लोभी मन लालची, मन चंचल मन चोर।
मन के मते न चालिए, पलक पलक मन और।।

कबीर आद मोकळा संतां री सीख सुण्यां पछै ई मानखो तो मन री सत्ता नैं ई मानै अर मनगत मोजां माणै।[…]

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एतबार रखिए अवस

एतबार रखिए अवस, इस बिन सब अंधार।
रिसते रिश्तों के लिए, अटल यही आधार।।

एतबार पे ही टिके, घर-परिवार-संसार।
एतबार से ही बहे, रिश्तों की रसधार।।

प्रीति परस्पर है वहीं, उर-पुर जंह पतियार।
प्रीति अगर परतीति बिन, केवल मिथ्याचार।।

मन की तनक न मानिए, मन नाहक मरवाय।
मन के शक की मार से, एतबार मर जाय।।[…]

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खुद तो खुद सूं साचो बोल

खुद तो खुद सूं साचो बोल
सै सूं पैली खुद नै तोल,
खुद रै मन री घुन्ड्यां खोल,
औरां सूं तो झूठ भलांई
खुद तो खुद सूं साचो बोल।
मन री सगळी घात बता तूं,
प्रतिघाति हालात बता तूं,[…]

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शहीद प्रभू सिंह राठौड़ नें श्रध्धांजली

अड़यो ओनाड़ वो आतंक सूं सिंवाड़ै
मौद सूं फूल नह कवच मायो।
अमर कर नाम अखियात इण इळा पर
अमरपुर सिधायो चंदजायो।।

प्रभू नै पियारो होयग्यो प्रभुसिंह
सोयग्यो चुका कर कर्ज सारो।
मौयग्यो मरद वो हिन्द री भोम नै
तनक में खोयग्यो चंद-तारो।।[…]

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