हम भारत के युवा

विश्वधरा पर ज्ञानदेव के सबसे बड़े पुजारी हैं।
हम भारत के युवा हमारी, मेधा सब पर भारी है।।

सागर से गहराई सीखी, हिमगिरि से दृढताई सीखी।
नदियों से हिलमिल कर चलना, फूलों से तरुणाई सीखी।
तारों से मुस्कान, दीप स,े कर्म दृष्टि उद्दात मिली है।
भारत भू के इक-इक कण से, साहस की सौगात मिली है।
वीर शिवा के वंशज हैं हम, शक्ति शौर्य हमारी है।
हम भारत के युवा हमारी, मेधा सब पर भारी है।।[…]

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किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां

किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां, किण आगळ फरियाद करूं।
कुणसै कांधै सिर धर रोऊं, कह दै किणनैं याद करूं।।
किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां…………।।

बूढापै री लाठ्यां म्हांरी, अेक नहीं है तीन मुरारी।
जाझै जतनां करी करारी, तीनां री शोभा हद भारी।
तीनूं तेल पियोड़ी ताजी, जिणरै हाथ लगै सो राजी।
रिच्छा राड़ दोनां में रूड़ी, कोनी म्हारी आ कथ कूड़ी।
पण म्हारै हित आज माधवा, परतख तीनूं तीन पराई।
हाथ घालतां फांस गड़ै है, खपत करंतां खाल बचाई।
सांस-सांस रै संग सांवरा, सुबक-सुबक कर साद करूं।
किणनैं दरद सुणाऊं कान्हां…………।।[…]

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अपने चारों धाम खेत में

तीर्थ-स्नान तमाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।

श्रम की पूजा सांझ-सकारे।
और न दूजा देव हमारे।
जस उसका उसके जयकारे।
सच्चे सात सलाम खेत में।
अपने चारों धाम खेत में।।[…]

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सुनो सपूत हिंद के

सुनो सपूत हिंद के! सुपुत्रियो सुनो ज़रा!
सुनो तुम्हें पुकारती, ये मादरे वसुंधरा!
मनु के आत्मजो सुनो! सुनो आदम के अंशजो!
गुरु-ग्रंथ पूजको सुनो! सुनो यीशु के वंशजो!
जिनेन्द्र जैनियो सुनो! प्रबुद्ध बुद्ध अर्चको!
सुनो सुकर्म साधको! विशुद्ध ज्ञान चर्चको![…]

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विचार अर संसार

गीली माटी मांय प्रजापत, सूखी ल्याय मिलाई।
नीर मिला रौंदण जद लाग्यो, माटी तद मुस्काई।।

बोली अरे! कुंभकार क्यूं, बर-बर और मिलावै।
रौंदी उणनैं राम सिंवर कर, क्यूं नीं चाक चढ़ावै।।

कुंभकार बोल्यो सुण माटी, आज इसी मन आई।
चिलम बणाणी छोड़ चाव सूं, घड़स्यूं अबै सुराई।।

माटी भाग सरावत बोली, करी भली करतार।
तोर विचार बदळतां म्हारो, बदळ् गयो संसार।।[…]

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चकवी अर चकवो

अेक रात री बात बताऊं,
सुणी जकी सागण समझाऊं।
चकवो चकवी बोलण लाग्या,
रात अंधारो तोलण लाग्या।
पीपळ पर चकवी रो बासो,
चकवै रो बड़ अळगो खासो।
बातां करता टेम बितावै,
इतरै में आंधी आ ज्यावै।
चकवी रो मन डरपण लागै,
डरती बड़लै कानी भागै।[…]

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नारी बन तू निडर निर्भया

खुद के भीतर देख निर्भया,
बदल ब्रह्म के लेख निर्भया,
तू सूरज है, तेजपुंज तू,
वहसी तम की रेख निर्भया,
खुद के भीतर देख निर्भया।

भीतर का भय त्याग निर्भया,
जगना होगा, जाग निर्भया,
तेरी ताकत सागर जैसी,
दुष्ट झाग सम पेख निर्भया,
खुद के भीतर देख निर्भया।[…]

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जावण नीं द्यूं नंदकुमार

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

नैण कोटड़ी राज छुपायर, बंद पलक कर द्वार।
दिवस रैण प्हेरो हूं देवूं, काढे़ काजल़ कार!।।१

जावण नी द्यूं नंद कुमार!
रोकण करसूं जतन हजार!

रोज रीझावूं रसिक मनोहर, निज रो रूप निखार।
प्हेर पोमचो नाचूं छम छम, सज सोल़े सिणगार।।२[…]

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गंगा स्तवन

🌺दोहा🌺
जय गंगे! जय जाह्नवी, तरल तरंगे आप।
शंकरमौलि विहारिणी, सुरसरि हर संताप।।१
अच्युत-चरण-तरंगिणी, हिमगिरि करण विहार।
जय पातक हर जाह्नवी, हे! जग पाल़णहार।।२

🌷छंद त्रिभंगी🌷
अंबा-अरधंगे!, हणण अनंगे!, मस्त मलंगे!, मातंगे!
भूतावल़ स़गे!, कंठ भुजंगे!, भव! भसमंगे!, तन नंगे!
पीवत नित भंगे!, उण उतबंगे!, रमणी रंगे, मनहारी!
जय भगवति गंगे!, तरल तरंगे, सरल सुचंगे, अघहारी!!१[…]

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पदमण सुजस प्रकाश

।।छंद रेंणकी।।
जस रो हद कोट जोड़ नह जिणरी,
रण चढिया अणमोड़ रह्या।
चावो चित्तौड़ पाट चक च्यारां,
वसुधा सतवाट घोड़ बह्या।
तांणी खग मोड़ तोड़ दल़ तुरकज,
कीरत कंठां कोड़ करै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।1[…]

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