अखिल चराचर मांय मानखै जितरा रिश्ता-नाता बणाया है, वां मांय अेक उल्लेखणजोग रिश्तो है- मिताई वाळी। मिताई यानी कै मित्रता, यारी, दोस्ती, भायलाचारी। इतियास री आंख सूं देखां तो मिताई री मोटी-मोटी मिसालां आपणै सामी है, जिणमें भगवान कृष्ण अर सुदामा री मिताई तो जगचावी है। कृष्ण अर अरजण पण तगड़ा मित्र हा। श्रीराम रै ई सुग्रीव अर विभीखण जियांकला मित्रां री कथावां आपणै सामी है। भगवान कृष्ण री फोटू वाळो अेक पोस्टर देख्यो, जकै माथै लिख्योड़ो हो कै – कृष्ण सूं कोई पूछ्यो कै महाराज मित्रता रो मतलब कांई है? कृष्ण भगवान मुळकता सा जबाब दियो कै भोळा “मतलब हुवै बठै मित्रता कद हुया करै?”[…]
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