प्रतापसिंह बारहठ प्रशस्ति – ठा. उम्मेदसिंह जी धोल़ी “ऊम”
अमर कविराज आपही, भारत अम्मर भाल।
अमर आप चेतावणी, अमर राण फतमाल।।1।।
अंगरेजां सु डरियो नह, शुत्रुवां रो उरसाल।
भारत मा रो लाडलो, खरवा रो गोपाल।।2।।
जोड़ बारठ राव जबर, भारत अजादि धार।
संगठन बण्यो सूरमा, भारत रा जूंझार।।3।।
कर्जन दल्ली दरबार हि, अंगरेजां री शान।
भूप उदेपर ढाबतां, मिटेज यां रो मान।।4।।
रांण उदेपर रामजी, जांणे बंशज हांन।
भेळा दरबार न मिले, (तो) फिकि अंगरेजां शान।।5।।[…]