दोय दृष्टांन्त माँ भगवती इन्द्रेश भवानी के

।।माँ भगवती इन्द्रेश भवानी की समदृष्टि व कड़े अनुशासन की पालना के दो दृष्टांन्त।।

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भव-भय-भंजनी भगवती मावड़ी के चारण-वास में हुये प्रवास के दस दिवस के दौरान हर श्रध्दालुगण भक्तों नें माँ को मिजमानी देने की अथाह तथा पुरजोर कोशिश की तथा भाग्यशाली भक्तों के घर माँ भगवती ने पधार कर भोजन ग्रहण करना स्वीकार भी किया। वहीं पर साधारण व सदगृहस्थ भैरवदानजी जागावत भी रहते थे व उनकी धर्मपत्नि श्रीमती मोहनकुंवर कवियाणी बड़ी धर्मपरायणा व सीधी संकोची स्वभाव की नारी थी।[…]

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विप्लव का कवि “मनुज देपावत”

धोरां आळा देस जाग रै, ऊंठा आळा देस जाग।
छाती पर पैणां पड़्या नाग रै, धोरां आळा देस जाग।।

इस क्रान्तिकारी कवि का जन्म कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी विक्रम संवत 1984 को बीकानेर जिले के देशनोक ग्राम में हुआ। इनका असली नाम मालदान देपावत था, परन्तु रचनाकार के रूप में ये मनुज देपावत के नाम से जाने जाते थे। आप डिंगल भाषा के ख्याति प्राप्त कवि श्री कानदान जी देपावत के सुपुत्र थे। मनुज ने श्री करणी-विद्यालय देशनोक और फोर्ट हाई स्कूल बीकानेर से क्रमशः मिडिल और मेट्रिक पास की।[…]

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गजेन्द्र मोक्ष पर समान बाई का सवैया

पान के काज गयो गजराज,
कुटुम्ब समेत धस्यो जल मांहीं।
पान कर्यो जल शीतल को,
असनान की केलि रचितिहि ठाहीं।
कोपि के ग्राह ग्रह्यो गजराज,
बुडाय लयो जल दीन की नांहीं।
जो भर सूँड रही जल पै तिहिं,
बेर पुकार करि हरि पाहीं।।[…]

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झालामान शतक – नाथूसिंह जी महियारिया

नाथूसिंहजी महियारिया रचित झालामान शतक सर कोटि री उंचे दरजे री बेजोड़ रचना है, जिण कृति में सादड़ी (मेवाड़) रै राजराणा झाला मानसिंह जी रै उद्भट शौर्य, अदम्य साहस अर सूरापण, अर बिना सुवारथ बऴिदान रो बड़ो बर्णन करियो है। हऴ्दीघाटी री लड़ाई रो बड़ वीर नायक झालामान आप रै प्राणा नै निछावर कर आपरा धणी महाराणा रा प्राण बचाय इतियास मं अखीजस खाटियो।
हेक मान मुगलांण दिस, हेक मान हिंदवाण।
कूरम गज हौदे रह्यो, सुरग गयो मकवांण।।[…]

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चित्तौड़ का साका और राव जयमलजी – राजेंन्द्रसिंह कविया (संतोषपुरा-सीकर)

जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी के पुत्र दूदाजी के वंश के जयमलजी मेड़तिया युध्द विद्या में प्रवीण विसारध हुए जो प्रतापी राव मालदेव से अनेक युध्द करके उनके हमलों व अत्याचारों से तंग आकर मेड़ता छोड़कर उदयपुर महाराणा उदयसिंहजी की सेवा में चले गए एवं वहां पर अपनी शौर्य वीरता दिखाकर स्वर्णिम इतिहास में नाम कायम कर दिया। आज भी यदा कदा चित्तौड़ की वीरता की गाथाओं के साथ जयमलजी का नाम जरूर आता है।

जयमलजी वीर के साथ साथ भगवान चारभुजा नाथ के बहुत बड़े भक्त भी थे। भक्तमाल मे भी उनका वर्णन आता है किः…..

जै जै जैमल भूप के,
समर सिध्दता हरी करी।।
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मेड़ता आदि मरूधर धरा,
अंस वंस पावन करियौ।
जयमल परचै भगत को,
इन जन गुन उर विस्तरियो।।

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वींजै बाबे रा छंद – जनकवि वृजलाल जी कविया

🌸छंद रोमकंद🌸
नर नारिय ऊठ सदा सिर नावत ,पावत भोजन नीर पछै।
चढ़वाय कपूर चढै सिर चन्नण, सामिय ध्यावत मान सचै।
परभातांय सांझ समे कर पूजन,जोगिय नाम वींजांण तपै।
धुन एकण ध्यांन लग्यो धणी धावत, तापस मेर वड़ाल़ तपै।
जिय तापस नग्ग वड़ाल़ तपै।।१[…]

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🌺रातै भाखर बाबै रा छंद🌺 – जनकवि ब्रजलाल जी कविया

संतो पीरों और मुरशिदों की वंदना स्तवन हमारी कविता की एक परंपरा रही है। कवि ब्रजलाल जी कविया बिराई के थे।आप नें जालंधरनाथ की एक जगह जो कि पश्चिमी राजस्थान में रातै भाखर बाबे के नाम से जानी जाती है और उस लाल पहाड़ी पर जालंधर नाथ जी का मंदिर है जिसकी आप नें सरस सरल और सुगम्य शब्दों में वंदना की है।

🌷दूहा🌷
देसां परदेसां दुनी,क्रीत भणें गुण काज।
स्याय करै सह सिष्ट री, रातै गिर सिधराज।।१
वाल़ां री वेदन बुरी,इल़ ऊपर दिन आज।
हे सांमी!संकट हरे, राते गिर सिधराज।।२[…]

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मुकंददास दधवाड़िया की वीरता का गीत

मुकंददासजी जोधपपुर महाराजा अभय सिंह के साथ अहमदाबाद की लड़ाई में शामिल थे और इस युध्द में वीरता प्रदर्शित करते हुये शौर्यपूर्वक वीरगति को प्राप्त हो गये थे।ये एक श्रैष्ठ कवि भी थे। वि.सं. १७८७ मे हुये इस युध्द में इनकी वीरगति पर हिम्मता ढोली बऴूंदा ने इनकी वीरता व शौर्य-प्रदर्शन पर एक गीत बनाया जो निम्न प्रकार है।

।।गीत।।

सतरै संम्वत सितियासियै,
भूप सजै दऴ भारी।
सबऴा करी अभा रै साथै,
त्रिजड़ां बंध तैयारी।।[…]

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नवदुर्गा वंदना – कवि स्व. अजयदान जी लखदान जी रोहड़िया मलावा

शैलपुत्री जय शिवप्रिया, प्रणतपालिनी पाहि।
निज अपत्य टेरत तुझे, त्राहि त्राहि मां त्राहि।।१
जयति जयति ब्रह्मचारिणी, बीज सरूपिणी बानि।
विषम समय पर राखिये, प्रियजन के सिर पानि।।२
चारू चंद्र घंटा सुमति, प्रणति देहु कर प्रीति।
भवभय भंजनी भंजिए, ईति, भीति अनीति।।३
कुषुमांडा बिनती करत, सेवक करहु सुयोग।
कल्याणी अरु काटिये, कल्मष, कष्ट, कुयोग।।४[…]

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रक्षा कवच – करणी सायर कार – कामदार सा. श्री शिवदानसिंह जी हापावत

अबखी पुळ अबखी घडी, हाज़िर विपद हज़ार।
उण संकट में आपरी, करणी सायर कार।।१।।
देश प्रदेशा रात दिन, पग धरतां घर ब्हार।
जांणि अजांणी सब जगां, करणी सायर कार।।२।।
उण्डा पाणी उतरतां, नद्दी नाळा पार।
पग डिगतां बिखमी वखत, करणी सायर कार।।३।।
साँप बिच्छुँ गर गौहिरो, फण जहरी फुफकार।
जाड़ा डाढ़ा जकड़तां, करणी सायर कार।।४।।[…]

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