पांडव यशेन्दु चन्द्रिका – दशम मयूख
।।दशम मयूख।। भीष्मपर्व वैशंपायन उवाच दोहा द्वैपायन रिख नागपुर, सुत समुझावन आय। कहत सभा बिच शांतिहित, जो उत्पात लखाय।।१।। वैशंपायन कहने लगे, हे जन्मेजय! कौरव तथा पांडव जब परस्पर लड़ने को तैयार हुए तभी मुनि वेदव्यास हस्तिनापुर आए और उत्पात देख कर राज सभा में गए। वहाँ वे सुलह शान्ति के लिए धृतराष्ट्र को समझाने लगे। व्यास वचन कवित्त द्यौषचारी कूकै निशा निशाचारी कूकै द्यौष, बनचारी नग्र नग्रचारी बन धावै हैं। आम बीच फूलै कंज कंज मैं लगे है केरी, काल देश वस्तु को विरोध सो लखावै हैं। बिना पौन तूटै ध्वजा जलै ना आहूति होम, गृद्धन के झुंड कुरु […]
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