पांडव यशेन्दु चन्द्रिका – प्रथम मयूख
प्रथम मयूख मंगलाचरण छंद – अनुष्टुप् गुणालंकारिणो वीरौ, धनुष्तोत्र विधारिणौ। भू भार हारिणौ वन्दे, नर नारायणो उभौ।।१।। उत्तम गुणों से विभूषित, धनुष एवं चाबुक को धारण करने वाले तथा पृथ्वी के भार को हरने वाले, नर-नारायण इन दोनों वीरों (अर्जुन एवं कृष्ण) का मैं वन्दन करता हूँ। दोहा ध्यान-कीरतन-वंदना, त्रिविध मंगलाचर्न। प्रथम अनुष्टुप बीच सो, भये त्रिधा शुभ कर्न।।२।। ध्यान, कीर्तन एवं वन्दना ये तीन प्रकार के मंगलाचरण हैं। प्रथम अनुष्टुप छंद में मंगल करने वालों का तीनों प्रकार से मंगलाचरण किया गया है-यथा त्रिविध पृथक्करण :- १. धनुष्तोत्र धारण करने वाले रूप-स्वरूप का वर्णन अर्थात् ‘ध्यान’ पूर्वक मंगलचरण है। […]
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