देशनोक-दर्शन – भलदान जी चारण
।।छप्पय।।
पोखर मथुरापुरी, सेत बंधण रामेसर।
कर बदरी केदार, अधिक आबू अचलेसर।
पापां गमण प्रयाग, गया गंगा गोमती।
मुकतिदेण सुरमात, सकल महिमा सुरसत्ती।
कुरूक्षेत्र नाथ कासी सकल,
जात घणा जुग जीविया।
करनला आप दरसण कियां,
कवि केता तीरथ किया।।[…]