हिम्मत मत ना हार मानवी – गजल – कवि गिरधारी दान बारहठ (रामपुरिया)

हिम्मत मत ना हार मानवी
कर लै खुद सूं प्यार मानवी।
थारै उठियां ही थरकैला,
आतंक-अत्याचार, मानवी।
करम किये जा फल री चिंता,
मन मांही मत धार मानवी।
दिल में जिण रै देश बसै ना,
भूमी पर वै भार मानवी।[…]

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આજ તરછોડ માં જોગમાયા – કવિવર દુલા ભાયા “કાગ”

છંદ – ઝૂલણા
ભાન બેભાનમાં માત ! તુજને રટયા, વિસારી બાપુનું નામ દીધું,
ચારણો જન્મથી પક્ષપાતી બની, શરણ જનનીતણું એક લીધું ;
તેં લડાવી ઘણાં લાડ મોટાં કર્યા, પ્રથમ સત્કાવ્યનાં દૂધ પાયાં ;
ખોળલે ખેલવ્યાં બાળને માવડી, આજ તરછોડ માં જોગમાયા ! ૧[…]

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કાંકરી – કવિ શ્રી દુલા ભાયા કાગ

કુળ રાવળ તણો નાશ કીધા પછી, એક દી રામને વહેમ આવ્યો;
“મુજ તણા નામથી પથ્થર તરતા થયા, આ બધો ઢોંગ કોણે ચલાવ્યો?”
એ જ વિચારમાં આપ ઊભા થયા, કોઇને નવ પછી સાથ લાવ્યા;
સર્વથી છૂપતા છૂપતા રામજી, એકલા ઉદધિને તીર આવ્યા. 1
ચતુર હનુમાનજી બધું ય સમજી ગયા, […]

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शिरोमणि दानी सांगो गौड -अजय दान जी लखदान जी रोहडिया (मलावा)

वीरता में ज्यूं राजस्थान, रियौ है आगे प्रान्त अजोड।
त्यूहिं परसिध है जग सौराष्ट्र, शूरवीरों री धर सिरमोड।।१
जिको गांधी भी जलम्यो जेथ, कियो भारत नें जिण आजाद।
कहो किण रे मनडे रे मांय, नहीं है इण धरती री याद।।२
जठे कइ वेगा वीर जवान, मरण लग जिको न तजता माण।
पण्ड पर सह लेता सब पीड, पिरण पर दे देता पण प्राण।।३[…]

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🌺वाह! जवानां🌺 – कारगिल माथै कवि वीरेन्द्र लखावत कृत एक गजल

कढ करगिल परवांन जवानां वाह जवानां।
भारत री थै शान जवानां वाह जवानां ।
जग ने दियौ जताय भीम भारत री फौजां,
जस चढ्यौ असमान जवानां वाह जवानां।
भुल्यौ भगनी भ्रात बंध्यो हित देश बचावण,
धी रौ कियौ न ध्यान जवानां वाह जवानां।[…]

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शारदा स्तुति -प्रबीन सागर से

🍀भुजंग प्रयातम् छंद🍀
ओंकार प्रेमं प्रभा नाद बिंदा।
जयो मातुरा चातुरा भेद छंदा।
गिरा ग्यान गोतीत गूढं गनानी।
जयो पार विस्तारता वेद बानी।।१[…]

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हेत हु की न करो तुम हांसी – प्रबीन सागर से सवैया

सागर रावरे कागद को इत
ज्योंज्यो लगे अरहंट फरेबो।
त्यौं त्यों हमे अखियान अहोनिश
बार की धार धरी ज्यौं ढरैबो।
ज्यों ज्यों प्रवाह बहै अँसुवानको
त्यों त्यों व्रिहा हिय हौज भरैबो।
ज्यों ज्यों सुरंज सनेह चढै मधि
त्यों त्यों जिया निंबुवा उछरेगो।।१[…]

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चंदू मा रा छंद – धूड़जी मोतीसर जुढिया

।।छंद – सारसी।।
मनधार मत्ती सज सगत्ती, आप रत्थी आविया।
पोक्रण पत्ती बड कुमत्ती, छोह छत्ती छाविया।
तन झाल़ तत्ती सूर सत्ती, रूक हत्थी राड़वै।
बढ चरण वंदू शील संधू, मात चंदू माड़वै।।1[…]

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नागदमण – सांयाजी झूला

सांयाजी झूला महान दानी, परोपकारी भक्त कवि थे। वे कुवाव गांव गुजरात के निवासी थे। इनका लिखा हुआ “नागदमण” भक्ति रस का प्रमुख ग्रन्थ है|

भक्त कवि श्री सांयाजी झूला कृत “नागदमण”
।।दोहा-मंगलाचरण।।
विधिजा शारदा विनवुं, सादर करो पसाय।
पवाडो पनंगा सिरे, जदुपति किनो जाय।।…१
प्रभु घणाचा पाडिया, दैत्य वडा चा दंत।
के पालणे पोढिया, के पयपान करंत।।…२
किणे न दिठो कानवो, सुण्यो न लीला संघ।
आप बंधाणो उखळे, बीजा छोडण बंध।।…३
अवनी भार उतारवा, जायो एण जगत।
नाथ विहाणे नितनवे, नवे विहाणे नित।।…४
।।छंद – भुजंगप्रयात।।
विहाणे नवे नाथ जागो वहेला।
हुवा दोहिवा धेन गोवाळ हेला।।
जगाडे जशोदा जदुनाथ जागो।
मही माट घुमे नवे निध्धि मांगो।।…१[…]

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