पंथी एक संदेसड़ो तेजल नैं कहियाह
किणी कवि सही ई कैयो है कै जे प्रीत उत्तम सूं लाग ज्यावै तो कदै ई बोदी नीं पड़ैज्यूं पत्थरी सौ वरसां तक जल़ में रैवण पछै ई अग्नि रो साथ नीं छोडै – प्रीत पुराणी नह पड़ै जे उत्तम सूं लग्ग। सौ वरसां जल़ में रहे पत्थरी तजै न अग्ग।। ऐड़ो ई एक गीरबैजोग किस्सो है भाटी तेजमाल अर रतनू हरपाल रो। जैसलमेर री धरा माथै रामसिंह भाटी सपूत अर सूरमो मिनख। इणां एक ब्याव अमरकोट रै सोढै जोधसिंह री बेटी करमेती सूं कियो। करमेती आपरी कूख सूं पांच सूरमां नै जन्म दियो – करमेती कुंती जिसा जाया पंडव […]
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