पंथी एक संदेसड़ो तेजल नैं कहियाह

किणी कवि सही ई कैयो है कै जे प्रीत उत्तम सूं लाग ज्यावै तो कदै ई बोदी नीं पड़ैज्यूं पत्थरी सौ वरसां तक जल़ में रैवण पछै ई अग्नि रो साथ नीं छोडै – प्रीत पुराणी नह पड़ै जे उत्तम सूं लग्ग। सौ वरसां जल़ में रहे पत्थरी तजै न अग्ग।। ऐड़ो ई एक गीरबैजोग किस्सो है भाटी तेजमाल अर रतनू हरपाल रो। जैसलमेर री धरा माथै रामसिंह भाटी सपूत अर सूरमो मिनख। इणां एक ब्याव अमरकोट रै सोढै जोधसिंह री बेटी करमेती सूं कियो। करमेती आपरी कूख सूं पांच सूरमां नै जन्म दियो – करमेती कुंती जिसा जाया पंडव […]

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साध होयग्या तोई चारणपणो नीं गयो

जद- जद ई खत्रवट में खोट दीसी उण बगत चारणां खोट काढण खातर सबदां री चोट करण सूं नीं चूका। किणी कवि सही ई कैयो है – खत्रवट देखै खोट देखै दुख पावै दुसह। चारण चुभती चोट हिरदै सबदा री हणै।। ऐड़ो ई एक किस्सो है जोधपुर महाराजा विजयसिंह री बगत रो। महाराजा मारवाड़ रै च्यार मोटै सिरदारां नैं आपरो गुरु रै मोकाण रै मिस बुलाय मरा दिया। इण च्यारां में एक पोकरण ठाकुर देवीसिंह ई भेल़ा हा – केहर दोलो छत्रसल दोल़ो राजकंवार। मरतै मोडै मारिया चोटी वाल़ा च्यार।। देवीसिंह चांपावत नामी वीर पुरुष अर स्वामी भक्त राजपूत हा। […]

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गीत सुपंखरो

इच्छा बैराट उपाय जै नमस्ते नमो आदेश्वरी,
समस्ते रचाया रूप अनेका सनाद।
गणपति शारदा ब्रह्मा विष्णु रुद्र गाया,
अम्बे महमाया जयो शकत्ती अनाद ।।1।।

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हिंद की राजपुतानीया – कवि दुला भाया “काग”

रंगम्हेल मे बानियां बो’त रहे,
एक बोल सुने नही बानियां का,
दरबार मे गुनिका नाच नचे,
नही तान देखे गुनकानियां का,
नरनार प्रजा मिली पांव नमे,
नही पांव पेसाराय ठानियां का,
जग जिनका जीवन पाठ पढे,
सोई जीवन राजपुतानियां का…..(1)

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माँ करणी गीत – वैळिया साणौर

कीरत मया किंनयाणी करनल, सुमिरन करतां आय सहाय ।
विङद राखजो मां वरदायक, गिधियो गीत तिहारा गाय ।।
पूजां जोङ पांण परभाते, निमतो सीस तिहारो नाम ।
धाम धरा पर धवळ धजाळो, गढ दिखतो देसाणै गाम ।।

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लाखो फूलाणी तूं लछा

“ठगीजै सो ठाकर” री बात कुड़ी नीं है। हथाई रो कोड होवै उण नैं दमड़ा खरचणा पड़ै। ओ काम कोई मोटै मन रो मानवी ई कर सकै। इण में कौई जात रो कारण नीं है। ऐड़ै ई एक मोटै मन रै मिनख रो किस्सो। पोकरण रै पाखती गांव लालपुरो। रतनू जात रो जागीरी गांव। इण गांव रै रतनू भोजराज री उदारता विषयक ओ दूहो घणो चावो- लायक रतनू लालपुर गिरवर सुत बड गात। कवि भोजै री कोटड़ी रहै सभा दिन रात।। इणी गांव में लछीराम नाम रो सुथार रो घर। लछीराम री खातोड़ में आठूं पोर काम अर हथाई। लछीराम […]

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स्तुति – अज्ञात कवि

स्तुति
मढ हूँत बेग पलाण मखत्ती,बावन झूल सहेत बखत्ती
हेकण ताल़ी बाघ हकत्ती, सीस उबेल़ण आव शकत्ती।

साख बीससत काज सरन्नी, बेद किसो जिण जाय बरन्नी
धाबल़ लोवड़ ताय धरन्नी, कवि उबारण आव करन्नी।

शीश चाड जणा साद सुणीजेभारी हुवै कामल़ी भीजे
देबी आय बेग सुख दीजे,किनियाणी अब जेज न कीजे […]

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🌹श्रीब्रह्मानंदमंगलस्तवनम्🌹- श्री कृष्णवल्लभाचार्य कृत

शार्दूलविक्रीडीतवृत्तम्
य: षड्भावविवर्जिताङक्षरपदस्थानादिमुक्त:स्वयं|
स्वेष्टाङ्ज्ञावशवर्तनाङप्तनृजनि सच्चारणज्ञातिक:|
सिद्धार्थ:सुरकोटिगो मतिमतां मूर्धन्य ईष्टव्रती|
आजीवाङदृतनैष्ठिको विजयते श्रीलाडुसंज्ञ:कवि:||१

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वाह घोडा वाह – कवि दुला भाया “काग”

गीत सपाखरू
छूटा ग्राहबे वोम बछूटा रोकता धराका छेडा
उठाहबे पागा महि शोभता अथोग
धाहबे खगेश तके वेगरा अथाह धख्या
साहबे नाखता पागा नटव्वा अमोध (1)

डाबला मांडतां धरा धमंके साबधी दणी
झमंके साजहीं कोटे रंभरा झकोळ
चमके वाहसे जाणी वीजळी जालदा चळी
भ्रम्मवाळा भारे ठाळा गतिवाळा मोर (2) […]

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शंभु स्तवन

।।छंद – भुजंगी।।
नमो वास कैल़ास ऐवास बाबो।
गुढै गात पे धारबा नाय गाभो।
जुड़ै ऐहड़ी बोहल़ी वा जमातं।
नमो शंभु नाथं नमो शंभुनाथं।।१[…]

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