बापू रा तीन बांदर
बापू देख बीगड़्या बांदर, सो बदल़ै नित भेख सही।
लिखिया लेख तिहाल़ा लोपै, नटखट राखै टेक नहीं।।१
ईखै बुरी रोज ही आखां, काज बुरां री खोज करै।
माणै मोज तिहाल़ा मरकट, डोकर तोसूं नोज डरै।।२
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बापू देख बीगड़्या बांदर, सो बदल़ै नित भेख सही।
लिखिया लेख तिहाल़ा लोपै, नटखट राखै टेक नहीं।।१
ईखै बुरी रोज ही आखां, काज बुरां री खोज करै।
माणै मोज तिहाल़ा मरकट, डोकर तोसूं नोज डरै।।२
राजस्थान रै साहित्यिक इतिहास में कविवर आसाजी / आसाणंदजी बारठ रो नाम जितरो चावो उतरो ई आदरणीय। सत्य वक्ता, निर्लोभी, मित्र धर्म पाल़णिया, घण जोड़ा अर चारणाचार सूं मंडित आसोजी समूल़ी राजपूत रियासतां में मोटो नाम। भाद्रेस रा बारठ दीताजी रै घरै कवि रो जनम होयो अर नाथूसर कवि री कर्मस्थल़ी – दीतावत मालुम दुनी सो जाणै संसार। नाथूसर मथुरा नगर आसो हरि अवतार।। कोटड़ै रा राठौड़ वाघोजी कोटड़ियो उणां रा मन रा मीत ।एकै दांत रोटी तूटै।वाघैजी नैं राव मालदेव डावड़ी भारमली दीनी।रूप री रंभा अर लावण्य री मूर्ति। रावजी रो मन भारमली रै बिनां लागै नीं।उणां आसैजी नैं […]
» Read more।।छंद – त्रिभंगी।।
मरूधरा मँझारम धिन देह धारम, वण कल़ु वारम करतारम।
सगती साधारम सकल़ संसारम, भोम उतारम अघ भारम।
संकट रा कारम तुंह सुधारम, आंण उबारम वेग अती।
धिन जांगल़ धरणी हर दुख हरणी, वाहर करणी वीसहथी।
जियै वण तूं वाहर वीसहथी।।१[…]
||छंद रेखता||
कविराज कहे राजनीत रुडी,सामे कान कपाट न खोलता है
शूर नाम कथा कहे रामकथा,ऐक आखर आप न बोलता है
सुणी चानक गोकळराज समा,महाराज न बोलत डोलता है
मेरा ठाकर चाकर संग करी,नित कूडका चापडा छोलता है…
गल गुंजनमाल, रू नैन विशाल, चलै गजचाल सदा शुभ जो री।
कटि फेंट धरी मुरली, पटपीत, लिये लकुटी कर में लखियो री।
मुकुटं सिर सुंदर मोरपखा मुख मंजुल चोरत है मति मोरी।
रँग डाल गुलाल अबीर उछाल सखी नँदलाल रचावत होरी।।१।।
बरसे रंग आज सखी ब्रजमें, उर आनंद की सरिता सरसे।
सरसे सब गोपिन के तन के तरू, पल्लव पात नये दरसे।
दरसे दसहू दिस लाल गुलालअबीरन गाल पिया परसे।
परसे हुई आज निहाल अली! ब्रजबाल पे लाल कृपा बरसे।।२।।[…]
आज बिरज में धूम है, जन जन करे धमाल।
फागुन छाया है सखी!, बरसे लाल गुलाल।।१
गोरी गोरे गाल की, जिसके नैन विशाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।२
सिर पर छोटी बेंदुली, चमके जिसका भाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नँदलाल।।३
बातें मिसरी की डली, लगती मोहनथाल।
उससे होली खेलता, नागरिया नंद लाल।।४
आँखें है जादूगरी, नेह नीर के ताल।
उससे होरी खेलता, नागरिया नंद लाल।।५[…]
सेल त्रिभागो झालियां मूंछां वांकड़ियांह। आंखड़ियां देखां पदम सुख्यारथ घड़ियांह।। इण दूहै रै रचणहार कवि एकदम सही कही है कै जिण बगत पदमसिंह नैं देखूं बा घड़ी सुख री होवै। बीकानेर महाराजा कर्णसिंह रा सपूत पदमसिंह महान वीर, उदार पुरुष अर क्षत्रिय गुणां सूं मंडित राजपूत हा। उदारता अर वीरता इणां नैं वंश परंपरा में मिली – दादो रायांसिंघ है नांनो राव रतन्न। प्रिथी वडाल़ा पदमसी दियण वडाल़ा दन्न। उणां री वीरता विषयक घणी ई बातां इतिहास में संकलित है पण म्है उणां री अदभुत उदारता री बात बताय रैयो हूं। मगरै रै गांव मोखां रा बीठू गोगदान रै घरै नादारगी […]
» Read moreपरथम अजर अमर अपरमरा
जररा जरण भगतरा जोर
नररा नंग नागरा नाथण
नमो निगमरा अणगम नोर
खळरा दळण लंकरा खेधण
कळरा अकळ कंसरा काळ
गिरिरा धरण मोहरा गाळण
प्रमरा अप्रम प्रजारा पाळ […]
किणी कवि सही कैयो है कै देणो मरणै सूं ई दोरो। इणी कारण ओ दूहो चावो है कै जिकै समझदार होवे उणां सूं तीन काम संज नीं आवै दैणो, मरणो अर मारणो। ऐ काम तो काला होवै बै ई कर सकै –
नर सैणां सूं व्है नहीं, निपट अनैखा नाम।
दैणा मरणा मारणा, कालां हंदा काम।।
ऐड़ो ई एक प्रसंग है बीकानेर महाराजा गजसिंहजी रै खास मर्जीदान कवि गोपीनाथजी गाडण रो। गोपीनाथजी गाडण आपरी बगत रा मोटा कवि जिणां महाराजा गजसिंहजी री वीरता अर उदारता नै वर्णनीय विषय बणाय “ग्रंथराज ” नामक ग्रंथ बणायो। […]
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बीकानेर रा राव लूणकरणजी वीर, स्वाभिमानी अर उदार नरेश हा। केई जंगां में आपरी तरवार रो तेज अरियां नैं बतायो तो दातारगी री छौल़ा ई करी। राव लूणकरणजी रै ई समकालीन कवि हा लालोजी मेहडू। बीकानेर रा संस्थापक राव बीकैजी रै साथै आवणियां में एक मेहडू सतोजी ई हा। इणी सतोजी रा बेटा हा लालोजी मेहडू। सतोजी नै राव बीकाजी खारी गांव दियो। लालोजी मेहडू आपरी बगत रो मोटा कवि अर बलाय रो बटको हा। एकर लालोजी जैसलमेर गया। जैसलमेर रावल देवीदासजी, बीकानेर राव लूणकरणजी रा हंसा उडाया अर आवल़िया बकिया। लूणकरणजी रा हंसा सुण र लालैजी नैं रीस आयगी बां […]
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